एक खेत में दो फसलें उपजा सकेंगे किसान! इस तकनीक से दोगुनी होगी कमाई, सरकार भी देगी 50% सब्सिडी

Subsidy: लतरवाली सब्जी की खेती के लिए आलान प्रबंधन की योजना है, जिसपर आवेदित किसान को 50% अनुदान मिलेगा. इच्छुक किसान उद्यान विभाग के पोर्टल पर आवेदन करें. पहले आओ-पहले पाओ के तर्ज पर आवेदित किसानों को योजना का फायदा दिया जाएगा.
एक खेत में दो फसलें उपजा सकेंगे किसान! इस तकनीक से दोगुनी होगी कमाई, सरकार भी देगी 50% सब्सिडी

Aalaan Management Scheme: बिहार सरकार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (Pradhan Mantri Rashtriya Krishi Vikas Yojana) के तहत सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए 'आलान प्रबंधन योजना' चला रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बिहार राज्य में सब्जियों हेतु आलान प्रबंधन कर सब्जियों के गुणवत्तायुक्त उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाकर किसी की आय में बढ़ोतरी करना है.

20 हजार आलान इकाइयां बनाने का लक्ष्य

बिहार सरकार ने कृषि को बढ़ावा देने और कृषकों की आय में सुधार के लिए सब्जियों के लिए आलान प्रबंधन योजना 2025-26 की शुरुआत की है. इस योजना के तहत बिहार के अलग-अलग जिलों में कुल 20 हजार आलान इकाइयां बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

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लतरवाली सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन में बढ़ोतरी

उद्यान विभाग के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य लतरवाली सब्जियों जैसे नेनुआ, लौकी, झिंगनी, करेला, बोड़ो आदि की गुणवत्तायुक्त उत्पादान व उत्पादकता को बढ़ाना है. जिससे किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी हो सके.

एक इकाई का साइज

इस योजना के तहत आलान बनाने के लिए एक इकाई का रकबा 125 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है.

50% मिलेगी सब्सिडी

इसके लिए बांस, लोहे के तार, प्लास्टिक सूतली, पाट सूतली आदि की खरीद पर होने वाली अनुमानित लागत 4,500 रुपये तय की गई है. इसमें से 2,250 रुपये यानी 50% राशि अनुदान के रूप में किसानों को दी जाएगी. अनुदान की राशि DBT in Cash के रूप में दी जाएगी.

16 इकाई तक ले सकते हैं एक किसान फायदा

लाभुक किसान को योजना के तहत न्यूनतम 1 और अधिकतम 16 इकाई तक का फायदा मिलेगा. जरूरी सामाग्री किसान खुद खरीदेंगे और विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम करेंगे.

परंपरागत खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

आलान पर सब्जि की खेती सदियों पुरानी परंपरा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपने आंगन, खेत और यहां तक कि झोपड़ियों पर भी लतरवाली सब्जियां उगाते हैं. इन्हें स्थानीय भाषा में मचान नाम से जाना जाता है. सतह पर उगाई गई सब्जियों की तुलना में आलान पर उगाई गई सब्जियां ज्यादा आकार की, गुणवत्ता युक्त और कम रोगग्रस्त होती है.

ऑनलाइन करें आवेदन

  • योजना का फायदा केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो डीबीटी पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं.
  • किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
  • योजना का फायदा पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा.
  • गैर-रैयत किसान भी इकरारनामा के आधार पर इसका फायदा ले सकते हैं.
  • लाभार्थियों का चयन सामान्य श्रेणी में 78.537%, अनुसूचित जाति में 20% और अनुसूचित जन जाति में 1.463% के अनुपात में किया जाएगा.
  • सभी श्रेणी में 30% महिलाओं की भागीदारी की जाएगी.

जरूरी दस्तावेज

  • इच्छुक कृषकों को भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र/दो वर्ष पूर्व तक अद्यतन राजस्व रसीद/ऑनलाइन अपडेटेड रसीद/वंशावली/एकरारनामा (विहित प्रपत्र) के आधार पर विधि मान्य भू-स्वामित्व का प्रमाण-पत्र में से कोई एक उपस्थापित करना अनिवार्य होगा.
  • अगर आवेदक का नाम भूमि-स्वामित्व/राजस्व रसीद में स्पष्ट नहीं है, तो भूमि-स्वामित्व/राजस्व रसीद के साथ वंशावली लगाना अनिवार्य होगा.

कैसे होगा अनुदान का भुगतान

अनुदान राशि का भुगतान सीएफएमएस के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में किया जाएगा.

विशेषताविवरण
योजना का उद्देश्यआलान विधि से सब्जियों का उत्पादन बढ़ाना और आय सुधार
इकाई आकार1 इकाई = 125 वर्ग मीटर (अधिकतम 16 इकाई तक)
लागत और अनुदान₹4,500 प्रति इकाई, 50% = ₹,2,250 अनुदान
लाभार्थी वर्गसीमांत/लघु किसान, पट्टेदार, महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति
चयन आधारपहले आओ, पहले पाओ; महिलाओं के लिए 30% आरक्षण

आलान तकनीक क्या है?

  • खेती की विधि में जमीन पर 3-4 फीट ऊंचाई पर बांस की संरचना, लोहा तार और पाट/प्लास्टिक सूतली से जालीदार प्लेटफ़ॉर्म बनाया जाता है.
  • इस प्लेटफॉर्म पर बेल वाली सब्जियां जैसे कद्दू, करैला आदि उगाये जाते हैं, जबकि नीचे पत्तेदार सब्जियां पहले स्तर में उगाई जाती हैं,
  • इससे एक ही भूखंड में दो फसलों की पैदावार संभव होती है, जिससे उत्पादन लगभग 20-30% तक बढ़ जाता है.

आलान प्रबंधन योजना – FAQ

1. आलान प्रबंधन योजना क्या है?
यह योजना बिहार सरकार द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य लतरवाली सब्जियों (जैसे नेनुआ, लौकी, करेला आदि) के गुणवत्तायुक्त उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है.

2. इस योजना के तहत कितनी इकाइयाँ बनाई जाएंगी?
वर्ष 2025–26 तक कुल 20,000 आलान इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

3. योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?
एक इकाई की लागत ₹4,500 है. इस पर 50 फीसदी यानी ₹2,250 का अनुदान मिलेगा. यह राशि सीधे DBT in Cash के ज़रिए किसानों के खाते में भेजी जाती है.

4. एक किसान अधिकतम कितनी इकाइयों का लाभ ले सकता है?
एक किसान न्यूनतम 1 और अधिकतम 16 इकाइयों तक का लाभ ले सकता है.

5. इस योजना का लाभ कौन ले सकता है?
वे किसान जो DBT पोर्टल पर पंजीकृत हैं. गैर-रैयत किसान भी इकरारनामा के आधार पर आवेदन कर सकते हैं.

6. लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया जाएगा?
लाभ "पहले आओ-पहले पाओ" के आधार पर दिया जाएगा.

7. आवेदन कैसे करें?

आवेदन केवल ऑनलाइन किया जा सकता है. किसान को DBT पोर्टल (horticulture.bihar.gov.in) पर लॉगिन करके योजना में आवेदन करना होगा.

8. कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, अपडेटेड राजस्व रसीद (पिछले 2 वर्षों की), ऑनलाइन अपडेटेड रसीद, वंशावली और इकरारनामा (गैर-रैयत किसानों के लिए).

9. अनुदान राशि का भुगतान कैसे किया जाएगा?
अनुदान राशि का भुगतान सीएफएमएस (CFMS) प्रणाली के माध्यम से सीधे किसान के बैंक खाते में किया जाएगा.

10. किस विभाग द्वारा यह योजना संचालित की जा रही है?
यह योजना बिहार राज्य उद्यान निदेशालय द्वारा चलाई जा रही है.

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