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ये कांटेदार पौधा आपको बना सकता अमीर
एलोवेरा अब सिर्फ दवा या ब्यूटी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रही. इसकी खेती ने देशभर के कई किसानों की किस्मत बदल दी है. कम पानी, कम मेहनत और बढ़ती मांग के चलते यह पौधा अब आम किसानों के लिए भी एक बड़ा फायदा देने वाली फसल बन गया है. खास बात यह है कि बंजर या कम उपजाऊ ज़मीन पर भी इसकी खेती सफल हो रही है.
कैसे होती है एलोवेरा की खेती
एलोवेरा की खेती के लिए ज़मीन की ज़्यादा उपजाऊ होने की ज़रूरत नहीं होती. हल्की बलुई मिट्टी जिसमें पानी न ठहरे, उसमें यह आसानी से उग जाता है. खेत को 1-2 बार जुताई कर उसमें 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद डाल दी जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. इसके बाद पौधों को जड़ों से निकले छोटे पौधों यानी सकर या राइज़ोम कटिंग से लगाया जाता है. एक एकड़ में लगभग 14,500 पौधे लगाए जाते हैं. इनकी दूरी लगभग 40×45 सेमी रखी जाती है.
देखरेख और सिंचाई का तरीका
एलोवेरा को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. सिर्फ शुरुआत में ही सिंचाई की जाती है और सूखे के दौरान हर 15 दिन में एक बार पानी देना काफी होता है. बहुत ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ने लगती हैं. खरपतवार हटाने के लिए साल में 2–3 बार निराई-गुड़ाई की जाती है. साथ ही, गोबर की खाद के अलावा थोड़ी मात्रा में NPK उर्वरक (20:20:20 किलो प्रति एकड़) भी दी जाती है.
3 से 5 साल तक होता है मुनाफा
एलोवेरा के पत्ते लगने के 6 से 8 महीने बाद काटने लायक हो जाते हैं. दूसरे साल से इसका पूरा उत्पादन शुरू हो जाता है और एक पौधा 3 से 5 साल तक पत्ते देता रहता है. पत्तों को नीचे से काटा जाता है, ताकि पौधा फिर से बढ़ सके.
कम लागत में लाखों की आमदनी
एलोवेरा की खेती में शुरुआत में एक एकड़ ज़मीन पर लगभग 40,000 से 55,000 रुपए का खर्च आता है. लेकिन अच्छी देखरेख और सिंचाई के साथ एक एकड़ में सालाना 15 से 18 टन पत्ते पैदा होते हैं, जिनकी बाज़ार में कीमत 15,000 से 20,000 रुपए प्रति टन तक मिलती है. इसका मतलब यह हुआ कि एक एकड़ में 2 से 6 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है. अगर कोई किसान इसकी प्रोसेसिंग कर एलोवेरा जूस या कॉस्मेटिक उत्पाद बनाता है, तो कमाई इससे भी ज्यादा हो सकती है.