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माइक्रोग्रीन्स की खेती मिट्टी नहीं, ट्रे और कोकोपीट में भी हो सकती है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI/Gemini)
Microgreens Farming: सिर्फ एक हफ्ते में तैयार होने वाली ऐसी खेती, जो न खेत मांगती है और न भारी निवेश. छत, बालकनी या कमरे के एक छोटे से कोने में उगने वाले माइक्रोग्रीन्स (Microgreens) अब नौकरीपेशा, युवाओं और महिला उद्यमियों के लिए कमाई का नया सुपरफूड मॉडल बनते जा रहे हैं. हेल्थ-फूड की बढ़ती डिमांड और कम समय में तैयार होने वाली फसल ने इस खेती को तेजी से लोकप्रिय बना दिया है. अगर आप घर के किसी कोने या छोटी सी बालकनी में खेती शुरू करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए बेस्ट विकल्प है.
शबला सेवा संस्थान के संस्थापक अविनाश कुमार ने ज़ी बिजनेस से बातचीत में कहा, माइक्रोग्रीन्स खेती स्वास्थ्य के अलावा आर्थिक रूप से भी लाभकारी है. पारंपरिक खेती में फसल 120 से 140 दिनों में तैयार होती है, लेकिन इस खेती में 7 से 14 दिनों में अपनी फसल को काटकर बेच सकते हैं. इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में कम मेहनत और कम लागत है. मुनाफा अधिक है. पर्यावरण के अनुकूल खेती है और जल का संचय होता है.
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माइक्रोग्रीन्स सब्जियों और जड़ी-बूटियों के वे नन्हे पौधे हैं, जिन्हें बीज अंकुरण के ठीक बाद यानी उनकी 'कोटिलेटन'पत्तियों के आने पर ही काट लिया जाता है. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें परिपक्व सब्जियों की तुलना में 40 गुना तक ज्यादा पोषक तत्व होते हैं. यह एक-दो हफ्तों के भीतर तैयार हो जाते हैं.
इनमें मूली, सरसों, मेथी, धनिया, सूरजमुखी, ब्रोकोली, चना, मटर और गेहूं जैसी फसलों के माइक्रोग्रीन्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।
पोषक तत्वों की सघनता के कारण इन्हें यह दर्जा मिला है.
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माइक्रोग्रीन्स उगाना साइंस से ज्यादा एक कला है. यहां इसकी आसान प्रक्रिया दी गई है:
बीज का चुनाव और तैयारी
मिडियम तैयार करना
बीज बुवाई और ढकना
फसल की कटाई

माइक्रोग्रीन्स को पकाकर खाने के बजाय कच्चा खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि गर्मी से इनके विटामिन नष्ट हो सकते हैं.
अगर आप एक शहरी निवासी हैं जिसके पास जमीन नहीं है, तो माइक्रोग्रीन्स आपके लिए किचन गार्डन का सबसे आधुनिक रूप है. यह न केवल आपके परिवार की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि कम निवेश में एक बेहतरीन होम-बिजनेस मॉडल भी बन सकता है.
हेल्थ और न्यूट्रिशन को लेकर बढ़ती जागरूकता माइक्रोग्रीन्स मार्केट को तेजी से आगे बढ़ा रही है. कम जगह, कम समय और हाई-वैल्यू आउटपुट के कारण इसे शहरी खेती का मजबूत मॉडल माना जा रहा है.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में माइक्रोग्रीन्स सिर्फ हॉबी नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल एग्री-बिजनेस मॉडल बन सकता है.
| माइक्रोग्रीन्स खेती | डीटेल्स |
| फसल तैयार होने का समय | 7-14 दिन |
| जगह की जरूरत | बहुत कम |
| पानी की जरूरत | कम |
| शुरुआती निवेश | ₹10,000 से शुरू |
| मुख्य खरीदार | होटल, कैफे, हेल्थ स्टोर |
| सबसे लोकप्रिय वैरायटी | मूली, मेथी, ब्रोकोली |
करीब 100 से 200 वर्गफुट जगह से भी शुरुआत की जा सकती है. शहरी युवाओं और महिलाओं के लिए यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है/.
मार्केट में माइक्रोग्रीन्स ₹500 से ₹2,000 प्रति किलो तक बिकते हैं. कई प्रीमियम वैरायटी इससे ज्यादा दाम भी दिलाती हैं. अगर सही मार्केट मिल जाए तो छोटे सेटअप से भी हर महीने अच्छी अतिरिक्त आय बन सकती है.
इनकी मांग खासतौर पर कैफे, सलाद बार, पांच सितारा होटल और ऑर्गेनिक स्टोर्स में ज्यादा रहती है.
आज कई युवा नौकरी के साथ पार्ट-टाइम बिजनेस के तौर पर भी इसे अपना रहे हैं.
हां, लेकिन सही मैनेजमेंट से इन्हें संभाला जा सकता है. मुख्य चुनौतियां-
क्योंकि यह जल्दी खराब होने वाला प्रोडक्ट है, इसलिए कटाई के बाद तुरंत बिक्री जरूरी होती है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 माइक्रोग्रीन्स और स्प्राउट्स में क्या फर्क है?
स्प्राउट्स को बीज समेत खाया जाता है, जबकि माइक्रोग्रीन्स में पत्तियां और तना उपयोग में आते हैं.
Q2 क्या बिना मिट्टी के माइक्रोग्रीन्स उगाए जा सकते हैं?
हां, कोकोपीट, टिश्यू पेपर या हाइड्रोपोनिक माध्यम में भी उगाए जा सकते हैं.
Q3 माइक्रोग्रीन्स कितने दिन तक ताजा रहते हैं?
आमतौर पर 5-7 दिन तक फ्रेश रह सकते हैं, अगर सही तरीके से स्टोर किए जाएं.
Q4 क्या माइक्रोग्रीन्स उगाने के लिए खाद की जरूरत होती है?
नहीं, क्योंकि इन पौधों को शुरुआती ऊर्जा बीज से ही मिल जाती है.
Q5 सबसे आसान माइक्रोग्रीन्स कौन से हैं?
शुरुआत के लिए मेथी, सरसों और मूली सबसे आसान और तेजी से उगने वाले विकल्प हैं.