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Agri Business Idea: मध्य प्रदेश में रेशम कीट पालन (Sericulture) एक महत्वपूर्ण कुटीर उद्योग है, जिसमें रेशम कीटों को पालकर उनसे कच्चा रेशम पाया जाता है. यह उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए विशेष रूप से आय का स्रोत बना है. नर्मदापुरम जिले के ग्राम तिन्दवाड़ा की विनीता पटेल मध्य प्रदेश सरकार की स्वावलंबन योजना के माध्यम से रेशम कीट पालन को अपनाकर लखपति दीदी (Lakhpati Didi) बनी हैं.
लखपति दीदी योजना (Lakhpati Didi Yojana) के तहत सरकार महिलाओं को 5 लाख रुपये तक का लोन देती है. ये लोन इंटरेस्ट फ्री होते हैं. मतलब लोन लेने के बाद महिलाओं को सिर्फ उतना ही पैसा चुकाना है, जितना कर्ज के तौर पर उन्होंने लिया है. इस पर कोई अतिरिक्त ब्याज उनसे नहीं वसूला जाएगा. इस पैसे से कोई भी महिला अपना बिजनेस शुरू कर सकती है और खुद को आत्मनिर्भर बना सकती है.
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रेशम कीट पालन, जिसे सेरीकल्चर भी कहा जाता है, रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम के कीड़ों को पालने की प्रक्रिया है. यह एक कृषि-आधारित कुटीर उद्योग है, जिसमें किसान रेशम के कीड़ों को शहतूत के पत्तों पर पालते हैं और उनके कोकून से रेशम प्राप्त करते हैं. रेशम कीट पालन एक महत्वपूर्ण उद्योग है जो न केवल किसानों के लिए आय का स्रोत है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार भी पैदा करता है. यह एक पर्यावरण के अनुकूल उद्योग भी है जो प्राकृतिक फाइबर प्रदान करता है.
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विनीता पटेल ने मात्र 1 एकड़ भूमि में रेशम कीट पालन करती है. मध्य प्रदेश सरकार की स्वावलंबन योजना ने उनके जीवन को नई दिशा दी. उन्होंने योजना का फायदा उठाते हुए रेशम कीट पालन का काम शुरू किया. वर्ष 2024-25 में मात्र 1 एकड़ भूमि से ₹1.03 लाख की कमाई की.
रेशम विभाग द्वारा समय-समय पर दी गई उन्नत तकनीकों की जानकारी, प्रशिक्षण, गुणवत्तायुक्त ककून उत्पादन के लिए गाइडेंस और मदद ने उनके काम को और भी अधिक सशक्त बनाया. ककून मार्केट में उन्होंने अपने उत्पाद विक्रय कर अच्छे दाम पाए, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई.