बेहद चमत्कारी है ये पेड़! हर हिस्से में छिपा सेहत का खजाना, मांग है जबरदस्त, बागवानी बनाएगी मालामाल

Sahjan ki Kheti: इसे पूरी दुनिया में 'मिरेकल ट्री' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां, फूल, बीज और छाल सभी किसी न किसी औषधीय गुण से भरपूर हैं.
बेहद चमत्कारी है ये पेड़! हर हिस्से में छिपा सेहत का खजाना, मांग है जबरदस्त, बागवानी बनाएगी मालामाल

Sahjan ki Kheti: सहजन, जिसे ड्रमस्टिक या मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है, भारत की धरती पर उगने वाला एक साधारण-सा पेड़ है, लेकिन इसके औषधीय गुण इसे असाधारण बनाते हैं. इसे पूरी दुनिया में 'मिरेकल ट्री' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसकी पत्तियां, फलियां, फूल, बीज और छाल सभी किसी न किसी औषधीय गुण से भरपूर हैं. सहजन की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है और यह छोटे किसानों से लेकर बड़े कृषि उद्यमियों तक के लिए एक लाभदायक विकल्प बनकर उभरी है.

सहजन की खेती के फायदे

कम लागत और कम देखरेख- एक बार पौध तैयार हो जाने पर ज्यादा रखरखाव की जरूरत नहीं होती.
जलवायु अनुकूलता- यह सूखा और गर्म जलवायु में भी पनपता है.
जल्दी उत्पादन- पौधा रोपाई के 6-8 महीनों के भीतर फल देना शुरू कर देता है.
औषधीय गुण- इसकी पत्तियां, फलियां, फूल और जड़ें आयुर्वेदिक दवाओं और हेल्थ सप्लीमेंट्स में काम आती हैं.
निर्यात की संभावना- सहजन के पाउडर और तेल की अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बढ़ रही है.

Add Zee Business as a Preferred Source

किस्म का नाम विशेषता

PKM-1 ज्यादा पैदावार, 6-7 महीने में फलियां
PKM-2 लम्बी फलियां, अधिक फूल और पत्तियां
Rohit-1 कर्नाटक क्षेत्र में लोकप्रिय
Dhanraj महाराष्ट्र के लिए उपयुक्त
Bhagya बायोटेक्नोलॉजिकल तरीके से विकसित

किस्म का नामविशेषता
PKM-1ज्यादा पैदावार, 6-7 महीने में फलियां
PKM-2लम्बी फलियां, अधिक फूल और पत्तियां
Rohit-1कर्नाटक क्षेत्र में लोकप्रिय
Dhanrajमहाराष्ट्र के लिए बेहतर
Bhagyaबायोटेक्नोलॉजिकल तरीके से विकसित

खेती की विधि

भूमि की तैयारी- सहजन की खेती के लिए हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होनी चाहिए. खेत को अच्छी तरह जुताई कर समतल बना लें.

बीज या कटिंग से पौधारोपण- बीज या शाखा कटिंग दोनों से सहजन की खेती की जा सकती है. बीज से रोपाई के लिए 1-2 सेमी गहराई पर बोएं. कटिंग से रोपाई के लिए 1 मीटर लंबी और 2-3 इंच मोटी शाखा का प्रयोग करें.

पौधों के बीच दूरी- पौधों की दूरी 2.5 x 2.5 मीटर रखें, जिससे अच्छे से फैलाव हो और फसल तक धूप पहुंचे.

सिंचाई प्रबंधन- सहजन को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. शुरुआती 1-2 महीनों में 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें. वर्षा आधारित क्षेत्रों में यह बिना सिंचाई के भी बढ़ता है.

खाद और उर्वरक- खेत की जुताई के समय 10-15 टन गोबर की खाद मिलाएं. 50-75 ग्राम नाइट्रोजन, 50 ग्राम फॉस्फोरस, और 25 ग्राम पोटाश प्रति पौधा दें. पत्तियों के लिए जैविक खाद जैसे नीम की खली, वर्मी कम्पोस्ट भी कारगर हैं.

रोग और कीट नियंत्रण

फल भेदक कीड़ा- नीम तेल या जैविक कीटनाशकों से नियंत्रित करें.
टिड्डी और सफेद मक्खी- कीटनाशकों का सीमित प्रयोग करें.
जैविक खेती में नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क आदि का प्रयोग करें.

फसल की तुड़ाई और पैदावार

सहजन की फलियां रोपाई के 6-8 महीने बाद तोड़ी जा सकती हैं. एक पौधे से सालाना 100-150 फलियां मिल सकती हैं. एक एकड़ में 1000 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं, जिससे 10-12 टन उपज मिलती है.

बेहद चमत्कारी सहजन का पेड़

आयुर्वेद में सहजन का उपयोग प्राचीन काल से विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है. यह पेड़ न केवल स्वाद बढ़ाने वाला है, बल्कि सेहत की सुरक्षा का भी बड़ा साधन है.
सहजन को कफ-नाशक और वातहर माना गया है. यह शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. इसकी पत्तियां और फलियां पाचन को दुरुस्त रखने, रक्त को शुद्ध करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं.

अन्य सब्जियों और फलों की तुलना में कई गुना ज्यादा पोषक तत्व

सहजन की खासियत यह है कि इसमें अन्य सब्जियों और फलों की तुलना में कई गुना ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते हैं.
उदाहरण के लिए, इसमें संतरे की तुलना में सात गुना अधिक विटामिन सी और गाजर से चार गुना ज्यादा विटामिन ए पाया जाता है.
इसके अलावा, इसमें दूध से ज्यादा कैल्शियम और केले से अधिक पोटैशियम होता है. यही वजह है कि सहजन को 'ट्री ऑफ लाइफ' भी कहा जाता है.

एंटी-कैंसर गुण भी मौजूद

सहजन में एंटी-कैंसर गुण भी पाए जाते हैं. सहजन का पाउडर या बीजों का सेवन शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर रक्त शुद्धिकरण करता है.
इसके अतिरिक्त, यह शरीर को एनर्जी देने और थकान दूर करने में भी कारगर है.
सहजन का नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करता है, ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है और वजन घटाने में भी मदद करता है.
यही नहीं, इसमें मौजूद विटामिन B6 मस्तिष्क को सक्रिय रखने और मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में भी सहायक है.

खबर से जुड़ा FAQs


Q1. सहजन की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सबसे बेहतर है?
सहजन की खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है

Q2. सहजन के कौन-कौन से हिस्से उपयोगी होते हैं?
सहजन की खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है.

Q3. सहजन की खेती कब करनी चाहिए?
सहजन की बुवाई मानसून की शुरुआत या बसंत ऋतु में की जा सकती है.

Q4. एक एकड़ में कितने पौधे लगाए जा सकते हैं?
एक एकड़ में लगभग 1000 से 1200 पौधे लगाए जा सकते हैं.

Q5. सहजन की फसल कब तैयार होती है?
सहजन के पौधे 6-8 महीने में फलियां देना शुरू कर देते हैं.

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6