'गरीबों का गुलाब' है ये फूल! ₹20 हजार लीटर तक बिकता है इसका तेल, खेती से होगी छप्परफाड़ कमाई

Geranium ki kheti: इस फूल को 'गरीबों का गुलाब' भी कहा जाता है क्योंकि इसके तेल में गुलाब जैसी खुशबू आती है. इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम, औषधि और आयुर्वेदिक उत्पादों किया जाता है.
'गरीबों का गुलाब' है ये फूल! ₹20 हजार लीटर तक बिकता है इसका तेल, खेती से होगी छप्परफाड़ कमाई

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Geranium ki kheti: अगर किसान परंपरागत फसलों के साथ ही फल, सब्जियों या फूलों की खेती करें तो उससे भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. जिरेनियम (Geranium) एक खुशबूदार पौधा है, जिसका इस्तेमाल खासतौर पर तेल निकालने के लिए किया जाता है. इस फूल को 'गरीबों का गुलाब' भी कहा जाता है क्योंकि इसके तेल में गुलाब जैसी खुशबू आती है. इसका उपयोग कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम, औषधि और आयुर्वेदिक उत्पादों किया जाता है.

कैसे करें जिरेनियम की खेती?

जलवायु और भूमि- जिरेनियम ठंडे और समशीतोष्ण क्षेत्रों में बेहतर उगता है। 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसे अनुकूल होता है. अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी आदर्श है। भारी मिट्टी या पानी जमा रहने वाली भूमि से बचना चाहिए.

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बुवाई का समय और विधि- जिरेनियम की बुवाई मुख्यतः फरवरी से अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर के बीच की जाती है. पौधरोपण विधि अपनाई जाती है, जिसमें कटिंग या तना लगाकर पौधे तैयार किए जाते हैं. कटिंग से तैयार पौधे 30-45 दिन में जमीन में रोपण के लिए तैयार होते हैं. पौधरोपण के बीच की दूरी लगभग 30 से 45 सेमी रखी जाती है.

खाद और उर्वरक प्रबंधन- खेत की तैयारी के बाद गोबर की अच्छी खाद (8-10 टन प्रति हेक्टेयर) दी जाती है. नाइट्रोजन, फास्फोरस, और पोटाश की संतुलित मात्रा का उपयोग किया जाता है. बुवाई से पहले मिट्टी का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार उर्वरकों की मात्रा निर्धारित करें.

सिंचाई-

  • जिरेनियम की फसल को मध्यम सिंचाई की जरूरत होती है.
  • शुरुआती दौर में नियमित सिंचाई जरूरी होती है, जबकि बाद में मिट्टी के सूखने पर ही पानी देना चाहिए.
  • ज्यादा पानी देने से जड़ों को नुकसान हो सकता है.
  • फसल के बीच निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण जरूरी है.

कीट और रोग

  • जिरेनियम में आम तौर पर कीट और रोग कम लगते हैं, लेकिन कभी-कभी पत्ती खाने वाले कीट या फफूंदी की समस्या हो सकती है.
  • जैविक और रासायनिक कीटनाशकों का समय-समय पर छिड़काव करें.
  • पौधों की देखभाल और खेत की सफाई रोग नियंत्रण में मददगार होती है.

कटाई

जिरेनियम की कटाई लगभग 5-6 महीने के बाद की जाती है, जब पौधे पूरी तरह विकसित हो जाते हैं. पौधों को काटकर छाया में सुखाया जाता है और फिर ताजा पत्तियों से तेल निकाला जाता है. देश में कुछ क्षेत्रों में सीधी ताजी पत्तियों से भी डिस्टिलेशन कर तेल निकाला जाता है. तेल की गुणवत्ता और मात्रा पौधे की किस्म, मौसम और खेती के तरीकों पर निर्भर करती है.

जिरेनियम के तेल की कीमत

जिरेनियम के पौधे से निकलता है जो तेल काफी महंगा होता है. भारत में इसकी कीमत प्रति लीटर करीब 12,000 से लेकर 20,000 रुपए तक होती है, जो बाजार की मांग और गुणवत्ता पर निर्भर करती हैं. जिरेनियम की खेती से किसानों को प्रति हेक्टेयर 3 लाख से ज्यादा की तक की कमाई हो सकती है, जो पारंपरिक फसलों से कहीं ज्यादा है.

निष्कर्ष

जिरेनियम की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक फसलें जल संकट या कम उत्पादन के कारण घाटे में जा रही हैं. सही तकनीक और उचित प्रबंधन के साथ जिरेनियम से आय बढ़ाना अब आसान हो गया है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQs


Q1. जिरेनियम की खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम कौन सा होता है?
जिरेनियम ठंडे और समशीतोष्ण जलवायु में अच्छी तरह उगता है.

Q2. जिरेनियम के लिए कौन सी मिट्टी उपयुक्त है?
अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है.

Q3. बुवाई का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
जिरेनियम की खेती में पौधरोपण किया जाता है. कटिंग से पौधे तैयार कर उन्हें 30-45 सेमी की दूरी पर रोपा जाता है.

Q4. जिरेनियम तेल का बाजार मूल्य कितना होता है?
इसकी कीमत प्रति लीटर करीब 12,000 से लेकर 20,000 रुपए तक होती है, जो बाजार की मांग और गुणवत्ता पर निर्भर करती हैं.

Q4. क्या जिरेनियम की खेती से अच्छी आमदनी हो सकती है?
हां, सही तकनीक और देखभाल से प्रति हेक्टेयर ₹3 लाख तक की कमाई हो सकती है.

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