डिजिटाइजेशन, महामारी से बदली इकोनॉमी, करीब 80% अर्थव्‍यवस्‍था हुई फॉर्मल: SBI रिपोर्ट

SBI Research report on Economy: 2020-21 में इनफॉर्मल इकोनॉमी की हिस्‍सेदारी घटकर ग्रॉस वैल्‍यू एडेड (GVA) या फॉर्मल GDP का 15-20 फीसदी रह गई है.
डिजिटाइजेशन, महामारी से बदली इकोनॉमी, करीब 80% अर्थव्‍यवस्‍था हुई फॉर्मल: SBI रिपोर्ट

(Representational) 

डिजिटलीकरण ड्राइव (Digitisation drive) और कोविड19 महामारी (Covid19 pandemic) के चलते गिग इकोनॉमी (Gig Economy) ने तेजी से अर्थव्‍यवस्‍था को फॉर्मल बनाया है. 2021 में इनफॉर्मल सेक्‍टर की हिस्‍सेदारी घटकर सिर्फ 15-20 फीसदी रह गई है, जो 2018 में 52.4 फीसदी थी. SBI रिसर्च रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.

SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्‍य कांति घोष का कहना है कि 2020-21 में इनफॉर्मल इकोनॉमी की हिस्‍सेदारी घटकर ग्रॉस वैल्‍यू एडेड (GVA) या फॉर्मल GDP का 15-20 फीसदी रह गई है. 2017-18 में इनफॉर्मल इकोनॉमी 52.4 फीसदी थी. इसकी बड़ी वजह डिजिटाइजेशन और तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी है. 2011-12 में इनफॉर्मल इकोनॉमी की फॉर्मल जीडीपी में हिस्‍सेदारी 53.9 फीसदी थी.

नोटबंदी ने डिजिटाइजेशन को दिया बूस्‍ट

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घोस का कहना है कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद से इकोनॉमी के डिजिटाइजेशन रफ्तार पकड़ी. उसके बाद महामारी ने गिग इकोनॉमी की तेजी से बूस्‍ट देने का काम किया. जिसके चलते इकोनॉमी को फॉर्मल होने में मिली और दूसरे देशों के मुकाबले इसकी रफ्तार सबसे तेज रही.

नोटबंदी ने इनफॉर्मल सेक्‍टर को बुरी तरह प्रभावित किया. उस समय कुल वर्कफोर्स में इसकी हिस्‍सेदारी 93 फीसदी थी. इनफॉर्मल इकोनॉमी को दूसरा झटका GST ने दिया. इसके बाद सबसे तगड़ा झटका महामारी से लगा. रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ साल में करीब 13 लाख करोड़ रुपये अलग-अलग चैनल से फॉर्मल इकोनॉमी के दायरे में आए. इसमें ई-श्रम पोर्टल पर हाल की स्‍कीम भी शामिल है.

FY21 में रीयल जीडीपी का आकलन 135.13 लाख करोड़ रुपये का था. लेकिन महामारी के चलते इकोनॉमी में आए जबरदस्‍त गिरावट के बाद इसमें FY22 में 7.3 फीसदी का नुकसान हुआ है.

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2011 की जनगणना में कितना बड़ा था इनफॉर्मल सेक्‍टर

2011 की जनगणना के मुताबिक, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्‍युनिकेशन एंड ब्राडकॉस्टिंग में इनफॉर्मल सेक्‍टर का साइज 40 फीसदी, कंस्‍ट्रक्‍शन में करीब 34 फीसदी, पब्लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन में 6 फीसदी और मैन्‍युफैक्‍चरिंग में 20 फीसदी आंकी गई थी. फाइनेंस, इंश्‍योरेंस और यूटिलिटीज में करीब 100 फीसदी फॉर्मल थी. रीयल एस्‍टेट और एग्रीकल्‍चर में यह काफी हद तक इकोनॉमी इनफॉर्मल रूप में थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद फॉर्मल फाइनेंशियल सेक्‍टर में 10 फीसदी का विस्‍तार हुआ है. इसमें डीबीटी टांसफर का अहम रोल रहा. वहीं, फॉर्मल यूटिलिटी सर्विसेज का साइज महामारी के बाद 1 फीसदी बढ़ा है.

EPFO के मंथली पेरोल डेटा के मुताबिक, FY18 से करीब 36.5 लाख जॉब जुलाई 2021 तक फॉर्मल सेक्‍टर में आ चुके हें. वित्‍त वर्ष 2018 से एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर 20-25 फीसदी फॉर्मलाइज्‍ड हुआ है. इसमें केसीसी कार्ड का दायरा बढ़ने का फायदा हुआ है. अब करीब 70-75 फीसदी इनफॉर्मल एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर है.