अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक $100 पर रहता है तो हमपर क्या होगा असर? 10 प्वाइंट्स में समझें पूरी बात

Crude Oil Price: ईरान क्राइसिस के कारण क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. जानिए क्रूड में तेजी का भारत की अर्थव्यवस्था, ग्रोथ और महंगाई पर किस तरह का असर देखने को मिल सकता है.
अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक $100 पर रहता है तो हमपर क्या होगा असर? 10 प्वाइंट्स में समझें पूरी बात

Crude Oil Price Impact Analysis.

Crude Oil Price: मिडिल ईस्ट क्राइसिस लंबा खिच रहा है जिसके कारण पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल की क्राइसिस पैदा हो गई है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का 85% तक क्रूड आयात करता है. ऐसे में लंबे समय तक क्रूड में तेजी भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर डालेगा.

इस आर्टिकल में जानने कि कोशिश करते हैं कि क्रूड ऑयल का भाव आने वाले समय में किन फैक्टर्स पर डिपेंड करता है और भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका ओवरऑल कैसा असर देखने को मिल सकता है.

Crude Oil Price Outlook
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क्रूड में तेजी क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में बड़ा और अहम योगदान है. ईरान ने इस रास्ते से सप्लाई को रोक दिया है जिसके कारण पूरी दुनिया में क्रूड ऑयल और गैस की कीमत में जोरदार तेजी देखी जा रही है. बता दें कि मिडिल ईस्ट से दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में ऑयल और गैस की सप्लाई होती है.

Strait of Hormuz क्यों इतना महत्वपूर्ण?

  • 20% ग्लोबल ऑयल एंड LNG सप्लाई इसी रास्ते से होता है.
  • भारत का 40% क्रूड इंपोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होता है.
  • भारत अपनी जरूरत का 51% क्रूड वेस्ट एशिया से आयात करता है.
  • भारत का कुल 15% निर्यात वेस्ट एशिया को होता है जिसपर बुरा असर होगा.
  • भारत का एक तिहाई रेमिटेंस गल्फ देशों से आता है जिसपर होगा असर.

$100 क्रूड का भाव तो क्या होगा असर?

ईरान इस समय दो मोर्चे पर हमला कर रहा है. पहला ऑयल एंड गैस प्रोडक्शन यूनिट्स पर हमला किया जा रहा है और दूसरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सप्लाई को रोका जा रहा है. ऐसे में ऑयल एंड गैस की कीमत में तेजी को डबल सपोर्ट मिल रहा है. इलारा कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर FY27 में क्रूड का भाव 100 डॉलर के आसपास बना रहता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर होगा.

10 प्वाइंट्स में समझें A-Z असर

  • भारत का करेंट अकाउंड डेफिसिट (CAD) बढ़ जाएगा.
  • 70 डॉलर प्रति बैरल पर CAD जीडीपी का 1% रहता है.
  • 100 डॉलर प्रति बैरल पर CAD जीडीपी का 2% पहुंच जाएगा.
  • रुपए में और कमजोरी आएगी और यह 94-95 तक फिसल सता है.
  • केंद्र सरकार की सालाना खर्च में 3.6 लाख करोड़ की बढ़ोतरी होगी.
  • LPG को लेकर सरकार को सब्सिडी बढ़ाने की जरूरत होगी.
  • यूरिया, फर्टिलाइजर प्राइस बढ़ोतरी से सब्सिडी 20 हजार करोड़ बढ़ानी होगी.
  • 100 डॉलर पर क्रूड हर महीने सरकार पर 30 हजार करोड़ का बोझ डालेगी.
  • ग्रोथ को झटका लगने से सरकार के टैक्स कलेक्शन में भी कमी आएगी.
  • लंबे समय तक समस्या बने रहने पर सरकार के कैपेक्स प्लान पर असर दिखेगा.

करेंट अकाउंट पर कितना असर?

  • भारत रोजाना करीब 6 मिलियन बैरल तेल का आयात करता है.
  • क्रूड में 10 डॉलर की तेजी से भारत का इंपोर्ट बिल 20 बिलियन डॉलर बढ़ सकता है.
  • 10 डॉलर की क्रूड में तेजी करेंट अकाउंट पर 30–40 bps का असर दिखा सकता है.

गल्फ निर्यात पर असर?

  • भारत बड़े पैमाने पर गल्फ देशों को निर्यात करता है.
  • FY25 के निर्यात में 14.7% गल्फ देशों को किया गया था.
  • FY25 में भारत का निर्यात 64 बिलियन डॉलर के करीब रहा.

रेमिटेंस पर कितना असर?

  • FY25 में भारत का रेमिटेंस कलेक्शन 136 बिलियन डॉलर था
  • इसका एक तिहाई रेमिटेंस गल्फ देशों से आता है.
  • रेमिटेंस में कमी से भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट पर असर होगा.

महंगाई पर कितना असर?

  • क्रूड एंड गैस की कीमत का असर महंगाई पर भी होता है.
  • CPI कैलकुलेशन में डीजल, पेट्रोल, LNG का वेटेज 2.4% से बढ़कर 4.8% पर पहुंच गया है.
  • क्रूड में 10 डॉलर की तेजी से हेडलाइन इंफ्लेशन में 55–60 bps की बढ़ोतरी होती है.
  • इसमें 15 bps का इन-डायरेक्ट असर भी शामिल है जो पेट्रोल, डीजल, गैस की स्थिर कीमत पर भी होगी.
  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 90 डॉलर तक क्रूड का असर खुद वहन कर मैनेज कर सकती हैं.
  • इसके आगे क्रूड जाने पर पेट्रोल, डीजल की कीमत में बढ़ोतरी मजबूरी हो जाएगी.

GDP पर कितना असर?

  • 100 डॉलर प्राइस पर FY27 में हेडलाइन इंफ्लेशन रेट 5.1%-5.3% के दायरे में रह सकता है.
  • इस भाव पर जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6%-7% के दायरे में रह सकता है.
  • 120 डॉलर प्राइस पर FY27 में हेडलाइन इंफ्लेशन रेट 5.8%-6% के दायरे में रह सकता है.
  • इस भाव पर जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5% के नीचे रह सकता है.

शेयर बाजार पर कितना असर?

  • 100 डॉलर क्रूड पर रुपया डॉलर के मुकाबले 91-93 के दायरे में रह सकता है.
  • 100-120 डॉलर क्रूड पर डॉलर के मुकाबले 93-95 के दायरे में रह सकता है.
  • रुपए में कमजोरी आने से FPI आउटफ्लो तेज होगा जिसका असर शेयर बाजार पर होगा.
  • अनसर्टेनिटी के कारण डॉलर में मजबूती आएगी और रुपए में कमजोरी देखने को मिलेगा.
Crude Oil Price

(सोर्स- CareEdge)

कंक्लूजन

क्रूड में तेजी का भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर दिखाती है. ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध को करीब दो हफ्ते होने को है. युद्ध थमने के नाम नहीं ले रहा है ऐर यह युद्ध लंबा चलने की तरफ इशारा कर रहा है. दूसरी तरफ ऑयल एंड गैस सप्लाई एंड प्रोडक्शन का प्रोसेस इतना कॉम्प्लेक्स है कि युद्ध समाप्त होने के बाद नॉर्मल स्थिति होने में कम से कम 2-3 महीने का समय लग जाता है. भारत की अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ी चुनौती है.

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