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मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म WinZO के संस्थापक सौम्या सिंह राठौर और पवन नंदा को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों को बेंगलुरु में पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया. अधिकारियों के मुताबिक, लंबी पूछताछ के बाद ED ने पाया कि मामला गंभीर है, जिसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने संस्थापकों को एक दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया है.
ED की कार्रवाई तब शुरू हुई जब जांच में पता चला कि कंपनी ने लगभग 43 करोड़ रुपये गेमर्स के फंड के रूप में रोककर रखे थे. भारत सरकार की ओर से रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह पैसा खिलाड़ियों को तुरंत लौटाया जाना चाहिए था. लेकिन आरोप है कि WinZO ने फंड होल्ड रखा और विस्तृत जानकारी भी नहीं दी.
कंपनी ने अपनी ओर से कहा कि उनका फोकस हमेशा यूजर्स की सुरक्षा और पारदर्शिता पर रहता है. कंपनी ने बयान जारी किया कि वह सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करती है. हालांकि ईडी का कहना है कि उनकी जांच इसके उलट कई गंभीर गड़बड़ियों की ओर इशारा करती है.
यह पहली बार नहीं है जब ED ने WinZO और दूसरी गेमिंग कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है. कुछ समय पहले ही ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत WinZO और Gameskraft दोनों के दफ्तरों पर रेड मारी थी. ये छापे बेंगलुरु और गुरुग्राम के कई स्थानों पर किए गए थे.
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कई गंभीर आरोप सामने आए हैं. इनमें धोखाधड़ी, गेम के रिजल्ट्स में हेरफेर, फर्जी डेटा मैनेजमेंट, और संदिग्ध खातों में लेनदेन शामिल हैं. कंपनी के कुछ कर्मचारियों और डायरेक्टर्स के घरों पर भी छापेमारी की गई.
छापों के दौरान ईडी ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए. जांच में मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई डिजिटल डिवाइस मिले, जो संदिग्ध डेटा से भरे हुए थे. Gameskraft कंपनी के ठिकानों से बड़ी मात्रा में डेटा बैकअप भी लिया गया है.
ED ने 18.57 करोड़ रुपये की रकम वाले करीब 8 बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं. ये सभी अकाउंट कंपनी और उससे जुड़े लोगों के बताए जाते हैं. अधिकारियों ने कहा कि ये छापे 18 से 22 नवंबर के बीच चलाए गए.
जांच में यह भी सामने आया कि सरकार द्वारा रियल-मनी गेम्स पर बैन लगाने के बाद भी WinZO के एस्क्रो अकाउंट में 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि पड़ी हुई है. यह पैसा खिलाड़ियों और ग्राहकों का बताया जाता है, जिसे रिफंड नहीं किया गया.
अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक गेमिंग ऐप का मामला नहीं है, बल्कि यह करोड़ों की फंडिंग, बड़ी ट्रांजैक्शंस और संदिग्ध मनी ट्रेल का पूरा नेटवर्क है. ईडी ने कई विदेशी लेनदेन और डिजिटल वॉलेट्स की गतिविधियों की भी जांच शुरू कर दी है.
सरकार की ओर से रियल-मनी गेमिंग कंपनियों को लेकर पहले भी शिकायतें आती रही हैं. कई बार आरोप लगे हैं कि कंपनियां गेमिंग के नाम पर गलत तरीकों से पैसा कमाती हैं और खिलाड़ियों को नुकसान होता है. WinZO और Gameskraft के खिलाफ यह बड़ा एक्शन दिखाता है कि सरकार अब ऑनलाइन गेमिंग पर सख्त रुख अपना चुकी है.
ED की जांच जारी है और मामले में कई और गिरफ्तारियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है. जिन डिवाइसेज से डेटा मिला है, उनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है. अगर आरोप साबित होते हैं तो कंपनी और इसके डायरेक्टर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है.
FAQs
1. WinZO के संस्थापक को क्यों गिरफ्तार किया गया?
मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध लेनदेन और खिलाड़ियों के फंड रोककर रखने के आरोप में.
2. ईडी ने कितने फंड फ्रीज किए हैं?
करीब 18.57 करोड़ रुपये वाले 8 बैंक अकाउंट फ्रीज किए गए.
3. क्या WinZO ने कोई बयान दिया है?
हां, कंपनी ने कहा कि वह यूजर्स की सुरक्षा और कानून के पालन पर जोर देती है.
4. कितने रुपये खिलाड़ियों को वापस नहीं किए गए?
लगभग 43 करोड़ रुपये गेमर्स के फंड के रूप में होल्ड रखे गए थे.
5. क्या आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
हां, जांच के आधार पर ईडी आगे और कार्रवाई कर सकती है.
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