Vodafone Idea पर सरकार को SEBI से बड़ी राहत, ओपन ऑफर लाने से मिली छूट! जानें क्यों?

Vodafone Idea Limited: सेबी ने सरकार को VIL के ओपन ऑफर से छूट दी है. स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलने से सरकार की हिस्सेदारी 49% होगी, पर उसे ओपन ऑफर नहीं देना होगा.
Vodafone Idea पर सरकार को SEBI से बड़ी राहत, ओपन ऑफर लाने से मिली छूट! जानें क्यों?

VIL Update: मार्केट रेगुलेटर सेबी ने सरकार को वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (VIL) के शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश लाने से छूट दे दी. यह छूट वीआईएल में स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलने के एवज में 34 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के प्रस्तावित अधिग्रहण के बाद दी गई है. इस बदलाव के बाद से कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी वर्तमान के 22.6 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हो जाएगी - जिससे प्रमुख टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइड VIL अपने यूजर बेस को सेवा देना जारी रख सकेगी और भारत में दूरसंचार पहुंच बढ़ा सकेगी.

VIL Update: सरकार नहीं होगी मैनेजमेंट, बोर्ड का हिस्सा

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने अपने आदेश में कहा, “भारत सरकार वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में हिस्सेदारी सिर्फ आम जनता के हितों की रक्षा के लिए खरीद रही है." वहीं, यह छूट देते हुए सेबी ने कहा कि फिलहाल भारत सरकार का वीआईएल के प्रबंधन या बोर्ड में भाग लेने का कोई इरादा नहीं है और दूरसंचार कंपनी के नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं होगा. इसके अलावा, ऐसी होल्डिंग को सार्वजनिक शेयरधारिता के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा.

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VIL Update: 36,950 करोड़ रुपये को इक्विटी में बदलने का निर्णय

पिछले महीने, सरकार ने संकटग्रस्त दूरसंचार कंपनी को एक लाइफलाइन देते हुए सितंबर, 2021 के दूरसंचार सुधार पैकेज के प्रावधानों के तहत वीआईएल के स्पेक्ट्रम नीलामी बकाया के 36,950 करोड़ रुपये को इक्विटी में बदलने का निर्णय लिया था. आम तौर पर भारत सरकार की शेयरहोल्डिंग को बढ़ाकर 48.99 प्रतिशत करने से अधिग्रहण नियमों के तहत खुली पेशकश की बाध्यता पैदा हो जाएगी, लेकिन नियामक ने सरकार को इससे छूट दी है.

VIL Update: क्या कहते हैं सेबी के नियम

नियमों के तहत, किसी लिस्टेड कंपनी में 25 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी हासिल करने वाली संस्थाओं को शेयरधारकों के लिए एक खुली पेशकश करनी होती है. अपने आदेश में, नियामक ने उल्लेख किया कि VIL द्वारा सरकार को एक बड़ी राशि का भुगतान किया जाना है, जो कंपनी की वित्तीय स्थिति पर संभावित बोझ डाल सकता है. इसके अलावा, अगर भारत सरकार को ओपन ऑफर लाना पड़ा, तो इसमें बहुत सारा पैसा खर्च होगा.

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