वेदांता ग्रुप पर ED की कार्रवाई, FEMA मामले में चल रही जांच, दिल्ली-मुंबई ऑफिस पर छापे

PTI की खबर के मुताबिक, ED ने विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच के तहत यह कार्रवाई शुरू की है. फिलहाल एजेंसी की ओर से कथित उल्लंघन की प्रकृति या जांच के दायरे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
वेदांता ग्रुप पर ED की कार्रवाई, FEMA मामले में चल रही जांच, दिल्ली-मुंबई ऑफिस पर छापे

वेदांता के ऑफिस पर ईडी की कार्रवाई (फोटो - पीटीआई)

देश की बड़ी माइनिंग और मेटल कंपनी वेदांता ग्रुप एक बार फिर चर्चा में है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी से जुड़े परिसरों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत तलाशी अभियान शुरू किया है. अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई सोमवार से जारी है और मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है.

PTI की खबर के मुताबिक, ED ने विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच के तहत यह कार्रवाई शुरू की है. फिलहाल एजेंसी की ओर से कथित उल्लंघन की प्रकृति या जांच के दायरे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

FEMA के तहत कब कार्रवाई करती है ED?

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत ED आमतौर पर तब जांच करती है जब किसी व्यक्ति या कंपनी पर विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़े नियमों के उल्लंघन का संदेह हो. इसमें विदेश में अवैध रूप से धन भेजना, नियमों के खिलाफ विदेशी निवेश करना, विदेश में संपत्ति खरीदना या विदेशी निवेश से जुड़े अनुपालन नियमों का पालन न करना जैसे मामले शामिल हो सकते हैं.

डिमर्जर प्लान के बाद बढ़ी चर्चा

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल ही में कंपनी को अपने बड़े डिमर्जर प्लान के लिए सुरक्षित ऋणदाताओं (Secured Creditors) की मंजूरी मिली थी. इस योजना के तहत कंपनी अपने कारोबार को 6 अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों में बांटने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

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कंपनी का मानना रहा है कि इस कदम से कारोबार को अधिक फोकस्ड और बेहतर वैल्यू क्रिएशन का अवसर मिलेगा. हालांकि ED की मौजूदा जांच ने इस प्रक्रिया पर बाजार की नजर और बढ़ा दी है.

इलेक्टोरल बॉन्ड्स को लेकर भी रहा नाम चर्चा में

वेदांता का नाम पहले इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद को लेकर भी चर्चा में रहा था. सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी ने ₹400 करोड़ से अधिक मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे. इनमें अलग-अलग राजनीतिक दलों को योगदान दिया गया था. हालांकि इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को अब समाप्त किया जा चुका है.

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