&format=webp&quality=medium)
महारत्न PSU PowerGrid के नए बॉस बने वामसी राम मोहन बुर्रा.
देश की बिजली सप्लाई की लाइफलाइन कही जाने वाली कंपनी पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PowerGrid) को अपना नया मुखिया मिल गया है. वामसी राम मोहन बुर्रा ने कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक यानी CMD का पदभार संभाल लिया है.
वामसी राम मोहन बुर्रा इससे पहले पावरग्रिड में ही निदेशक (परियोजना) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. अब उनके कंधों पर महारत्न कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जिम्मेदारी है. चलिए, करीब से जानते हैं पावरग्रिड के इस नए कैप्टन की कहानी और उनके उन फैसलों को जिन्होंने पावर सेक्टर की तस्वीर बदल दी.
वामसी राम मोहन बुर्रा का पावरग्रिड के साथ रिश्ता बहुत पुराना और गहरा है. वह साल 1993 में पावरग्रिड में शामिल किए गए एग्जीक्यूटिव ट्रेनीज के सबसे पहले बैच का हिस्सा थे. उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि पहले बैच का एक नौजवान एक दिन इसी विशाल संगठन का नेतृत्व करेगा.
बिजली पारेषण (Power Transmission) और टेलीकॉम सेक्टर में उनका 33 साल से भी ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने कंपनी के क्षेत्रीय दफ्तरों से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक कई अहम रोल निभाए हैं. उनकी इस यात्रा में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, रेगुलेटरी मामले और कमर्शियल सेक्टर जैसे मुश्किल क्षेत्रों की गहरी समझ शामिल है.
जब पावर सेक्टर में रेगुलेटरी फ्रेमवर्क यानी नियमों का ढांचा तैयार हो रहा था, तब वामसी राम मोहन बुर्रा ने उसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी. वह पावरग्रिड के रेगुलेटरी सेल के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं. उनकी इसी समझ ने कंपनी को बदलते बाजार में खुद को ढालने में मदद की.
इतना ही नहीं, जब बिजली के बाजार में कॉम्पिटिटिव बिडिंग यानी प्रतिस्पर्धात्मक बोली की शुरुआत हुई, तो वह इसके मुख्य रणनीतिकार बनकर उभरे. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पावरग्रिड इस नए और चुनौतीपूर्ण माहौल में न केवल टिके, बल्कि अपनी धाक भी जमाए रखे.
वामसी राम मोहन बुर्रा का विजन सिर्फ बिजली के तारों तक सीमित नहीं रहा. जब वह पावरग्रिड टेलीसर्विसेज लिमिटेड के CEO थे, तब उन्होंने कंपनी के टेलीकॉम बिजनेस को एक नई पहचान दी. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी पावरग्रिड के पहले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की शुरुआत.
यह प्रोजेक्ट कंपनी के डिजिटल सफर में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उन्होंने मशीनीकरण और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दिया ताकि बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा सके. उनकी इन कोशिशों की वजह से बड़े पैमाने की बुनियादी परियोजनाओं में काम करने की रफ्तार और क्वालिटी में बहुत सुधार आया है.
वामसी राम मोहन बुर्रा की सफलता के पीछे उनकी ठोस शिक्षा और लगातार कुछ नया सीखने की ललक है. वह इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं और उन्होंने गुरुग्राम के मशहूर मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (MDI) से मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा भी किया है.
अपनी लीडरशिप क्वालिटी को और निखारने के लिए उन्होंने हार्वर्ड मैनेज मेंटर प्रोग्राम और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों से उन्नत प्रबंधन कार्यक्रम भी पूरे किए हैं. यही वजह है कि आज वह एक कुशल इंजीनियर के साथ-साथ एक बेहतरीन लीडर भी माने जाते हैं.