2019 में व्यापारियों ने GST को ले कर की ये मांग, बढ़ सकता है सरकार का फायदा

नए साल में व्यापारी समुदाय ने मंगलवार को देश में 'दोस्ताना जीएसटी' (वस्तु एवं सेवा कर) की मांग की है और कहा है कि सात करोड़ छोटे कारोबारियों में से आधे से अधिक को अप्रत्यक्ष कर शासन के तहत लाए जा सकते हैं, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा
2019 में व्यापारियों ने GST को ले कर की ये मांग, बढ़ सकता है सरकार का फायदा

व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी को और सरल बनाने की जरूरत (फाइल फोटो)

नए साल में व्यापारी समुदाय ने मंगलवार को देश में 'दोस्ताना जीएसटी' (वस्तु एवं सेवा कर) की मांग की है और कहा है कि सात करोड़ छोटे कारोबारियों में से आधे से अधिक को अप्रत्यक्ष कर शासन के तहत लाए जा सकते हैं, इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा. व्यापारियों के संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा है की देश भर के व्यापारियों को उम्मीद है की वर्ष 2019 में जीएससटी को और अधिक सरल एवं तर्कसंगत कर प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा और यदि केंद्र एवं राज्य सरकारें जीएसटी से समन्धित व्यापारियों की समस्याओं को सुलझाने पर केंद्रित करती हैं तो निश्चित रूप से जीएसटी एक व्यापारी मित्र कर प्रणाली के रूप में साबित हो सकती है.

2018 में कई मुश्किलों से गुजरना पड़ा
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि यह और भी अच्छा होगा यदि जीएसटी को ज्यादा से ज्यादा अपनाने के लिए सरकार व्यापारियों को जीएसटी कर में छूट का लाभ दे. उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में जीएसटी को लेकर व्यापारियों को अनेक परेशनियों को भी झेलना पड़ा है जिसमें मुख्य रूप से जीएसटी पोर्टल का सुचारू रूप से काम न करना, विभिन्न कर दरों में डाली गई वस्तुओं में विसंगतियां , कर प्रणाली की जटिल प्रक्रिया, विभाग से व्यापारियों का रिफंड न मिलना, रिटर्न फॉर्म की जटिलताएं आदि समस्याएं हैं जिनको अभी ठीक होना जरूरी है.

व्यापारियों के लिए है बेहतर कर व्यवस्था
खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी एक मायने में व्यापारियों के लिए बेहतर कर प्रणाली सिद्द हुई है क्योंकि अब व्यापारियों को अनेक प्रकार के कर की जगह केवल एक ही कर की पालना करनी होती है एवं विभिन्न करों की कागज़ी कार्यवाही के झंझट से भी मुक्ति मिल गई है वहां दूसरी ओर अनेक करों के इंस्पेक्टरों के मकड़ जाल से भी व्यापारी अब मुक्त हो गया है. किन्तु अभी भी देश भर 7 करोड़ व्यापारियों में से केवल 35 प्रतिशत के पास ही कम्यूटर है जबकि बाकी बचे व्यापारियों के सामने जीएसटी कर प्रणाली की समय पर पालना एक चुनौती है. इसके साथ ही जीएसटी के कानून एवं नियमों के बारे में अभी भी देश हर में व्यापारियों के एक बड़े तबके को कोई जानकारी नहीं है जिसके कारण स्वत: कर पालना अभी भी एक बड़ी चुनौती है.

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जीएसटी की सफलता व्यापारियों पर निर्भर है
कैट के महामंत्री ने कहा कि जीएसटी क्योंकि एक अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है जिसमें कर देने की जिम्मेदारी अंतिम रूप से उपभोक्ताओं के ऊपर है और व्यापारी क्योंकि उपभोक्ता के साथ सीधे संपर्क की एक मात्र कड़ी है इस वजह से जीएसटी की सफलता बहुत कुछ व्यापारियों पर निर्भर करती है. इस दृष्टि से देश भर में फैले व्यापारी संगठनों को यदि सरकार विश्वास में लेकर एक देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाये तो देश के अंतिम कोने तक आसानी से जल्द समय में पहुंचा जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा की देश में प्रत्येक जिला स्तर पर व्यापारियों और अधिकारियों के एक संयुक्त जीएसटी कमेटी का गठन किया जाए एवं व्यापारियों को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए सरकार सब्सिडी दे. खंडेलवाल ने उम्मीद जताई है की प्रस्तावित नए जीएसटी रिटर्न फॉर्म को अपेक्षाकृत अधिक सरल बनाया जाएगा जिससे एक आम व्यापारी भी अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स अधिवक्ता पर निर्भर न रहकर खुद ही रिटर्न समय पर भर दे और रिटर्न हर महीने की जगह तिमाही हो जाए. जीएसटी से निश्चित रूप से बड़ी संख्यां में लोग इनफॉर्मल सिस्टम से फॉर्मल इकॉनमी में आएं है और यदि जीएसटी को और अधिक सरल बनाया जाया है तो बड़ी संख्यां में लोग फॉर्मल इकॉनमी में आएंगे जिससे सरकार का टैक्स बेस तो बढ़ेगा ही वहीँ राजस्व में भी वृद्धि होगी.

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