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अगर आप भी आलस के मारे या स्वाद के चक्कर में अक्सर बाहर से खाना मंगाते हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है. अगस्त 2023 में महज ₹2 से शुरू हुई 'प्लेटफॉर्म फीस' अब धीरे-धीरे आपके बिल का एक बड़ा हिस्सा बनती जा रही है. हाल ही में Zomato ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी.
ताजा अपडेट के मुताबिक, Swiggy ने भी अपनी फीस में करीब बढ़ोतरी कर दी है. आइए, देखते हैं कि अब आपका पसंदीदा पिज्जा या बिरयानी मंगाना कितना महंगा हो गया है.
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कंपनियों ने पिछले 6 महीनों की स्थिरता के बाद अपनी फीस को बढ़ा दिया है. ध्यान दें कि Swiggy की प्लेटफॉर्म फीस अब Zomato से लगभग 15% अधिक हो गई है. आइए जानते हैं प्लेटफॉर्म फीस में कितनी बढ़ोतरी की गई है. स्विगी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए उसे 14.99 रुपये से 17.58 रुपये कर दिया है. वहीं जोमैटो पहले ही प्लेटफॉर्म फीस को 19.2 फीसदी बढ़ाकर 14.90 रुपये कर चुका है, जो पहले 12.50 रुपये थी.

शायद आपको लग रहा होगा कि इससे ग्राहक नाराज होंगे, लेकिन बिजनेस के नजरिए से कंपनियां इसे सही मान रही हैं:
ग्रोथ को सपोर्ट: फूड डिलीवरी की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, ऐसे में यह फीस रेवेन्यू को बनाए रखने में मदद करेगी.
पैकेजिंग कॉस्ट की भरपाई: कच्चे माल और पैकेजिंग की बढ़ती कीमतों (पैकेजिंग कॉस्ट) के बोझ को कम करने के लिए यह जरूरी था.
मिडिल ईस्ट संकट का असर: वैश्विक अस्थिरता के बीच सरकारी और कॉर्पोरेट ग्रोथ को बनाए रखने के लिए कंपनियां अपना मुनाफा सुरक्षित करना चाहती हैं.
स्मार्ट स्ट्रेटेजी: कंपनियां इसे चरणों में (Phased Manner) बढ़ा रही हैं, ताकि अचानक बड़ा झटका न लगे और ऑर्डर्स की संख्या में गिरावट न आए.
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प्लेटफॉर्म फीस में ₹1 की बढ़ोतरी भी इन कंपनियों की बैलेंस शीट को बदल देती है:
भारी वॉल्यूम: दोनों कंपनियां औसतन हर दिन 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करती हैं.
Zomato का फायदा: हर ₹1 की बढ़ोतरी से कंपनी के Adjusted EBITDA में सालाना 120 करोड़ रुपये की बढ़त हो सकती है.
Swiggy का फायदा: इस नई बढ़ोतरी से Swiggy का प्रतिदिन का रेवेन्यू करीब 2.8 करोड़ रुपये बढ़ जाएगा.
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आपको याद होगा कि अगस्त 2023 तक कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं लगती थी. तब कंपनियों ने प्रयोग के तौर पर इसे ₹2 से शुरू किया था. आज, 3 साल से भी कम समय में यह बढ़कर ₹17 के पार पहुंच गई है. यह दिखाता है कि कंपनियां अब 'डिस्काउंट' मॉडल से हटकर 'प्रॉफिटेबिलिटी' (मुनाफे) पर ध्यान दे रही हैं.
भले ही ₹2-3 की बढ़ोतरी सुनने में छोटी लगे, लेकिन अगर आप महीने में 10 बार ऑर्डर करते हैं, तो आपकी जेब से अब काफी ज्यादा पैसे प्लेटफॉर्म फीस के नाम पर जाएंगे. कंपनियों के लिए यह मुनाफे की चाबी है, लेकिन ग्राहकों के लिए यह धीरे-धीरे 'महंगा स्वाद' बनता जा रहा है.
1- प्लेटफॉर्म फीस क्या होती है?
यह वह शुल्क है जो कंपनियां अपने ऐप के इस्तेमाल और सेवाओं को बनाए रखने के लिए हर ऑर्डर पर ग्राहकों से वसूलती हैं. यह डिलीवरी चार्ज से अलग होता है.
2- क्या Swiggy One या Zomato Gold में यह फीस माफ होती है?
आमतौर पर, ये सब्सक्रिप्शन डिलीवरी चार्ज माफ करते हैं, लेकिन 'प्लेटफॉर्म फीस' अक्सर सभी ग्राहकों को देनी पड़ती है, हालांकि कुछ ऑफर्स में इसमें छूट मिल सकती है.
3- क्या रेस्टोरेंट में जाकर खाना सस्ता है?
हां, क्योंकि ऐप पर न केवल प्लेटफॉर्म फीस लगती है, बल्कि रेस्टोरेंट भी अक्सर ऐप पर डिश की कीमतें 10-20% ज्यादा रखते हैं.
4- Swiggy की फीस Zomato से ज्यादा क्यों है?
हर कंपनी की अपनी रेवेन्यू स्ट्रेटेजी होती है. Swiggy शायद अपनी प्रीमियम सर्विस या क्विक कॉमर्स (Instamart) के घाटे को कम करने के लिए यहां से ज्यादा रिकवरी कर रही है.
5- क्या भविष्य में यह और बढ़ेगी?
जिस तरह से कंपनियां मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं, इसकी पूरी संभावना है कि आने वाले समय में यह ₹20-25 तक भी पहुँच सकती है.
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