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मार्केट बंद होने का बाद आई Suzlon Energy से जुड़ी बुरी खबर!
पूंजी बाजार नियामक SEBI ने Suzlon Energy के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी पर 15.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई कंपनी के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस सर्विसेज (OMS) बिजनेस के ट्रांसफर, वित्तीय विवरणों में कथित गलत प्रस्तुति और संबंधित पक्षों के लेनदेन से जुड़े मामलों को लेकर की गई है. इस मामले में कंपनी से जुड़े कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर भी दंड लगाया गया है, जिससे कुल जुर्माने की राशि 29 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है.
SEBI ने इस मामले में कंपनी के पूर्व एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन विनोद आर. तांती पर 5.75 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. वहीं गिरिश आर. तांती पर 5.45 करोड़ रुपये, पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी कीर्ति जे. वागाडिया पर 1.5 करोड़ रुपये और अमित अग्रवाल पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. नियामक की यह कार्रवाई कंपनी और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच के बाद सामने आई है.
मामले की शुरुआत 12 दिसंबर 2019 को मिली एक गुमनाम शिकायत से हुई थी. बाद में इस शिकायत को प्रारंभिक जांच के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) को भेजा गया.
समीक्षा के दौरान निवेश, ऋण, इम्पेयरमेंट अकाउंटिंग, संबंधित पक्षों के खुलासे और PFUTP Regulations, 2003 तथा LODR Regulations, 2015 के संभावित उल्लंघनों से जुड़े मुद्दे सामने आए. इसके बाद SEBI ने विस्तृत जांच शुरू की.
यह जांच वित्त वर्ष 2014-15 से 2019-20 तक की अवधि और वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तीन तिमाहियों तक फैली हुई थी. जांच में Sarath & Associates द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट का भी सहारा लिया गया.
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कार्यवाही का मुख्य केंद्र Suzlon Energy के OMS बिजनेस की स्लंप सेल रही. यह ट्रांजैक्शन 29 मार्च 2014 को कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई Suzlon Global Services को किया गया था.
SEBI के अनुसार यह सौदा 2,000 करोड़ रुपये में किया गया था, जबकि बताई गई वैल्यू 77.08 करोड़ रुपये थी. नियामक ने कहा कि Suzlon Energy ने वित्त वर्ष 2013-14 में इस सौदे से 1,922.92 करोड़ रुपये का लाभ एक्सेप्शनल आइटम्स के तहत दर्ज किया था.
आदेश में यह भी कहा गया कि बिक्री मूल्य का 1,300 करोड़ रुपये वाला हिस्सा 90 दिनों के भीतर प्राप्त नहीं हुआ था और बाद में मार्च 2017 में कथित तौर पर सर्कुलर ट्रांजैक्शंस के जरिए इसका रूटिंग किया गया.
SEBI ने अपने आदेश में कहा कि 21 मार्च से 23 मार्च 2017 के बीच धनराशि को बार-बार Suzlon Energy और Suzlon Global Services के बैंक खातों के माध्यम से भेजा गया.
नियामक के अनुसार इस तरह के लेनदेन जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे और इन्हीं बिंदुओं के आधार पर वित्तीय रिपोर्टिंग और ट्रांजैक्शन स्ट्रक्चर की समीक्षा की गई.
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SEBI ने यह भी देखा कि OMS बिजनेस ट्रांसफर के बाद Suzlon Global Services की एसेट बेस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि पहले के वित्तीय विवरणों में कंपनी की गतिविधियां सीमित दिखाई गई थीं.
इसके अलावा वित्त वर्ष 2015-16 में Suzlon Global Services में हिस्सेदारी को Suzlon Structures को 927.83 करोड़ रुपये में बेचने का मामला भी जांच के दायरे में रहा. इस सौदे से 829.78 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ दर्ज किया गया था.
नियामक के आदेश के मुताबिक OMS से जुड़े लेनदेन से प्राप्त लाभ अलग-अलग वित्तीय वर्षों में दो बार दर्ज किए गए. इसी वजह से कंपनी के वित्तीय विवरणों की सटीकता और प्रस्तुति को लेकर सवाल खड़े हुए.
SEBI ने अपने आदेश में कहा कि इन लेनदेन के बिना Suzlon Energy की नेटवर्थ की स्थिति काफी कमजोर दिखाई देती. नियामक ने वित्त वर्ष 2014-15 में रिपोर्ट किए गए 6,026 करोड़ रुपये के इम्पेयरमेंट का भी उल्लेख किया. साथ ही समीक्षा अवधि के दौरान कंपनी द्वारा किए गए इक्विटी इश्यू और पुनर्गठन प्रक्रियाओं का भी जिक्र किया गया.