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सोमवार को एक्शन में दिख सकता है Suzlon का शेयर! प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
Suzlon Energy ने 22 मई 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि उसके 3 मेगावाट पवन ऊर्जा प्लेटफॉर्म की कुल बिक्री अब करीब 9 गीगावाट तक पहुंच गई है. कंपनी को यह बढ़त Sunsure Energy से मिले 195 मेगावाट के नए ऑर्डर के बाद मिली है. कंपनी के अनुसार उसके S144 पवन टरबाइन की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है.
कंपनी ने बताया कि उसे Sunsure Energy से 195 मेगावाट का दोबारा ऑर्डर मिला है. इसके साथ ही दोनों कंपनियों के बीच कुल साझेदारी अब महाराष्ट्र और कर्नाटक में करीब 300 मेगावाट तक पहुंच गई है.

इस परियोजना के तहत Suzlon कुल 65 पवन टरबाइन लगाएगी. हर टरबाइन की क्षमता 3 मेगावाट होगी. यह पूरा प्रोजेक्ट कर्नाटक के बीजापुर जिले में लगाया जाएगा. कंपनी ने कहा कि टरबाइन लगाने से लेकर उन्हें चालू करने और बाद में उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी वही संभालेगी.
Suzlon के मुताबिक उसका S144 प्लेटफॉर्म वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला प्लेटफॉर्म बन गया है. इस प्लेटफॉर्म को 2.4 गीगावाट से ज्यादा के ऑर्डर मिले हैं. नए 195 मेगावाट ऑर्डर के बाद कंपनी के 3 मेगावाट प्लेटफॉर्म की कुल बिक्री करीब 9 गीगावाट तक पहुंच चुकी है. कंपनी इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है.
कंपनी ने बताया कि इस नए ऑर्डर के बाद कर्नाटक में उसका कुल ऑर्डर 2 गीगावाट से ज्यादा हो गया है. Suzlon के लिए कर्नाटक अब सबसे बड़े पवन ऊर्जा बाजारों में शामिल हो गया है.
कंपनी का कहना है कि कर्नाटक में उसकी कुल स्थापित क्षमता 1,500 मेगावाट है. दक्षिण भारत में Suzlon की कुल स्थापित क्षमता का करीब 24 प्रतिशत हिस्सा अकेले कर्नाटक से आता है. इसके अलावा कंपनी कर्नाटक में 664 मेगावाट के दूसरे कारोबारी पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है.
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Girish Tanti ने कहा कि भारत के सुरक्षित ऊर्जा भविष्य के लिए पवन ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि Suzlon का 3 मेगावाट प्लेटफॉर्म कंपनी की सबसे सफल तकनीकों में से एक बन चुका है और यही कंपनी की बढ़त को आगे बढ़ा रहा है.
उनके मुताबिक कर्नाटक अब Suzlon का सबसे बड़ा बाजार बन गया है. साथ ही गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी कंपनी की मजबूत मौजूदगी है. उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी कंपनियों के बीच ऐसी हरित ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है जो हर समय बिजली उपलब्ध करा सके.
Shashank Sharma ने कहा कि आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वही कंपनियां आगे रहेंगी जो जरूरत पड़ने पर लगातार बिजली उपलब्ध करा सकेंगी. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी उद्योगों में प्रदूषण कम करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा सेंटर की बढ़ती बिजली जरूरत, इलेक्ट्रिक वाहनों और देश में बढ़ते बिजली इस्तेमाल को ध्यान में रखकर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट पूरे करने और लंबे समय तक रखरखाव की क्षमता के कारण Suzlon के साथ साझेदारी करना स्वाभाविक फैसला था.
Ajay Kapur ने कहा कि Sunsure Energy के साथ करीब 300 मेगावाट की साझेदारी दोनों कंपनियों के बीच मजबूत भरोसे को दिखाती है. उन्होंने कहा कि दोबारा मिला यह ऑर्डर इस बात का संकेत है कि बड़ी परियोजनाओं में Suzlon की काम करने की क्षमता पर ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक Sunsure Energy की शुरुआत साल 2014 में हुई थी. यह कंपनी भारत में कारोबार और बिजली कंपनियों को हरित ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराती है.
कंपनी सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज की मदद से लंबे समय के बिजली समझौतों पर काम करती है. रिलीज में बताया गया कि कंपनी को Partners Group AG से 400 मिलियन डॉलर का निवेश समर्थन मिला हुआ है.
फिलहाल कंपनी के पास 700 मेगावाट चालू परियोजनाएं हैं जबकि 7.10 गीगावाट क्षमता की परियोजनाएं निर्माण और विकास चरण में हैं. कंपनी महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और कर्नाटक में काम कर रही है. उसका लक्ष्य 2030 तक 10 गीगावाट चालू क्षमता हासिल करना है.
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Suzlon Group ने बताया कि उसकी कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 17 देशों में करीब 21.5 गीगावाट है. कंपनी का मुख्यालय पुणे में है. इसके शोध केंद्र जर्मनी, नीदरलैंड, डेनमार्क और भारत में मौजूद हैं. कंपनी के पास भारत में कई निर्माण इकाइयां हैं और दुनिया भर में 8,500 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं. Suzlon के मुताबिक भारत में उसकी स्थापित क्षमता 15.5 गीगावाट है जबकि भारत के बाहर करीब 6 गीगावाट क्षमता मौजूद है.