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(Image source- AI)
Sugar Stocks: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले. इस समय सेंसेक्स में 2139 अंक या 2.71% की गिरावट है जबकि निफ्टी 598 अंक फिसलकर 23,865 के स्तर पर आ गया. बाजार में बड़ी कमजोरी के बीच शुगर कंपनियों के शेयरों में तेजी दिख रही है. कारोबार के दौरान शुगर स्टॉक्स में 6% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई. उत्पादन अनुमान घटने, एथेनॉल की बढ़ती मांग और प्रमुख राज्यों में गन्ने की कम पैदावार जैसे कई फैक्टर्स ने शुगर सेक्टर को सपोर्ट दिया है.
दरअसल, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान घटाया है. इस्मा का कहना है कि इस सीजन चीनी उत्पादन में 5.5% की कमी संभव है. उसने चीनी का कुल उत्पादन 324 लाख टन रहने का अनुमान जताया है, जो पहले 343 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया था.
वहीं ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) ने शुगर उत्पादन पर अपना दूसरा अनुमान जारी किया है. उसने कहा है कि इस साल 283 लाख टन चीनी का उत्पादन संभव है. इससे पहले AISTA ने 296 लाख टन उत्पादन का अनुमान जताया था.
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शुगर सेक्टर के लिए एक बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर एथेनॉल (Ethanol) से जुड़ा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के चलते सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) एथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं. IOC, BPCL और HPCL जैसी OMCs की तरफ से एथेनॉल की मांग बढ़ने की संभावना है. इससे शुगर मिलों को अतिरिक्त राजस्व का मौका मिल सकता है.
इस साल देश के कुछ प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में फसल कमजोर रही है. उत्तर प्रदेश में गन्ने का उत्पादन घटने के संकेत हैं. वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी पैदावार में गिरावट दर्ज की गई है. इन राज्यों का देश के कुल चीनी उत्पादन में बड़ा योगदान है, इसलिए उत्पादन अनुमान कम किया गया है.
उत्पादन अनुमान घटने और एथेनॉल से जुड़े पॉजिटिव संकेतों के चलते शुगर कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है.
| कंपनी | एक हफ्ते की तेजी |
|---|---|
| Balrampur Chini Mills | 10% |
| Shree Renuka Sugars | 6% |
| Dalmia Bharat Sugar | 7% |
| Praj Industries | 8% |
अगर चीनी उत्पादन में कमी का ट्रेंड जारी रहता है और एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में तेजी आती है, तो शुगर कंपनियों के लिए मुनाफे के नए मौके बन सकते हैं. हालांकि आगे का ट्रेंड काफी हद तक मॉनसून, गन्ने की पैदावार और सरकार की एथेनॉल नीति पर निर्भर करेगा.
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