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सोलर स्टॉक को मिला 350MW का बड़ा BESS ऑर्डर. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
देश में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS प्रोजेक्ट्स की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है. इसी बीच Waaree Renewable Technologies ने एक बड़े बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट का ऑर्डर मिलने की जानकारी दी है.
कंपनी ने बताया कि उसे 350MW/1400MWh क्षमता वाले ग्रिड-कनेक्टेड BESS प्रोजेक्ट के लिए ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इस प्रोजेक्ट को वित्त वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
Waaree Renewable Technologies Limited ने 18 मई 2026 को एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए इस बड़े ऑर्डर की जानकारी दी. कंपनी के मुताबिक उसने 350MW/1400MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम प्रोजेक्ट के लिए टर्नकी ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है.

यह प्रोजेक्ट ग्रिड-कनेक्टेड BESS इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट से जुड़ा हुआ है. इसके तहत कंपनी पूरे प्रोजेक्ट का इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन काम संभालेगी. इसके अलावा कंपनी दो साल तक इस प्रोजेक्ट के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस सर्विस भी देगी. रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को भविष्य के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. ऐसे में इस ऑर्डर को कंपनी के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है.
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह ऑर्डर Waaree Forever Energies Private Limited की तरफ से मिला है. यह कंपनी होल्डिंग कंपनी की सब्सिडियरी कंपनी है.
फाइलिंग में यह भी बताया गया कि यह रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन की कैटेगरी में आता है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि यह डील सामान्य कारोबारी शर्तों यानी आर्म्स लेंथ बेसिस पर की गई है. कंपनी ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को FY27 के दौरान पूरा किए जाने की उम्मीद है.
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS को रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का अहम हिस्सा माना जा रहा है. सोलर और विंड एनर्जी जैसे स्रोतों से बनने वाली बिजली हर समय एक जैसी नहीं रहती. कई बार जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है और कई बार कम.
ऐसे में बैटरी स्टोरेज सिस्टम उस बिजली को स्टोर करने का काम करते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके. इससे पावर सप्लाई को स्थिर बनाए रखने और ग्रिड स्टेबिलिटी सुधारने में मदद मिलती है.
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी लगातार बढ़ रही है. सरकार और कंपनियां क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से फोकस कर रही हैं. इसी वजह से बड़े स्तर पर एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की मांग भी बढ़ती जा रही है. आने वाले वर्षों में BESS प्रोजेक्ट्स देश के एनर्जी ट्रांजिशन में अहम भूमिका निभा सकते हैं. खासकर सोलर एनर्जी सेक्टर के विस्तार के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम की जरूरत और ज्यादा बढ़ने की संभावना मानी जा रही है.
पिछले कुछ समय में रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में कई बड़ी कंपनियां निवेश बढ़ा रही हैं. क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ते फोकस के चलते बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को भविष्य का बड़ा अवसर माना जा रहा है.
ग्रिड-कनेक्टेड BESS प्रोजेक्ट्स का इस्तेमाल बिजली सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए किया जाता है. इससे पीक डिमांड के समय बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलती है. इसके अलावा रिन्यूएबल सोर्सेज से बनने वाली बिजली का बेहतर इस्तेमाल भी संभव हो पाता है. Waaree Renewable Technologies को मिला यह नया ऑर्डर भी इसी तेजी से बढ़ते सेक्टर का हिस्सा माना जा रहा है.
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सोमवार के कारोबारी सत्र में WAAREERTL के शेयर 0.91% की गिरावट के साथ ₹933.80 पर बंद हुए. कंपनी का शेयर 27 अक्टूबर 2025 को ₹1,358 के अपने ऑल-टाइम हाई स्तर तक पहुंचा था. वहीं 30 मार्च 2026 को शेयर ने ₹779.50 का ऑल-टाइम लो दर्ज किया था.

अगर हालिया प्रदर्शन की बात करें तो पिछले एक महीने में स्टॉक में 13% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है. वहीं सालभर के आधार पर शेयर 10% से ज्यादा कमजोर हुआ है. हालांकि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, लेकिन शेयर में उतार-चढ़ाव भी लगातार देखने को मिल रहा है.
आगे क्यों अहम रहेगा एनर्जी स्टोरेज सेक्टर
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है. सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के विस्तार के साथ एनर्जी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी तेजी से बढ़ रही है.
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम प्रोजेक्ट्स को आने वाले समय में पावर सेक्टर के लिए काफी अहम माना जा रहा है. यही वजह है कि कंपनियां अब बड़े स्तर पर BESS प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही हैं. Waaree Renewable Technologies का यह नया ऑर्डर भी इसी तेजी से बढ़ते बाजार की तरफ इशारा करता है.