Semiconductor Mission 2.0 की तैयारी? (प्रतीकात्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)
Semiconductor Mission 2.0: भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इंडस्ट्री बॉडी IESA के प्रेसिडेंट अशोक चांडाक ने संकेत दिए हैं कि सरकार जल्द Semiconductor Mission 2.0 यानी ISM 2.0 ला सकती है. मौजूदा Indian Semiconductor Mission की समयसीमा खत्म होने के करीब है और इंडस्ट्री अब इसके अगले और बड़े चरण की मांग कर रही है.
इस बीच वैश्विक तनाव, खासकर ईरान युद्ध से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने लगा है. इसका असर अब इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की कीमतों पर भी दिख रहा है.
भारत सरकार ने कुछ साल पहले Indian Semiconductor Mission शुरू किया था, जिसका मकसद देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करना था. यह योजना शुरुआती तौर पर 5 साल के लिए बनाई गई थी.
अब इंडस्ट्री का कहना है कि सेमीकंडक्टर सेक्टर लंबी अवधि का खेल है. इसलिए नए चरण यानी ISM 2.0 को 10 साल या उससे ज्यादा अवधि के लिए लागू किया जाना चाहिए. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है और अगले चरण में पहले से ज्यादा बजट दिया जा सकता है.
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IESA के अनुसार वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है. खासकर:
यही वजह है कि एंट्री लेवल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स 20% तक महंगे हो सकते हैं, जबकि हाई-एंड डिवाइसेज की कीमतों में भी 6% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
अशोक चांडाक का कहना है कि मेमोरी प्लांट रातोंरात नहीं बनते. नई फैक्ट्रियां शुरू होने में काफी समय लगता है, इसलिए सप्लाई और डिमांड का दबाव अभी बना रह सकता है.
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आज के दौर में चिप्स सिर्फ मोबाइल या लैपटॉप तक सीमित नहीं हैं. AI, डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, 5G, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इंडस्ट्रियल मशीनरी, लगभग हर सेक्टर में सेमीकंडक्टर की जरूरत है. इसी वजह से भारत अब इस सेक्टर को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मान रहा है.
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सरकार का लक्ष्य है कि:
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सरकार अब तक करीब 12 सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दे चुकी है. इनमें से 2 प्लांट शुरू हो चुके हैं. 2 अगले साल शुरू होने की उम्मीद है
ISM 2.0 में सिर्फ चिप मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि इन सेगमेंट्स पर भी फोकस बढ़ाया जाएगा.
Generative AI और डेटा सेंटर बूम की वजह से दुनियाभर में हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसके चलते पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, मेमोरी और एडवांस्ड सेमीकंडक्टर सिस्टम की जरूरत लगातार बढ़ रही है. इसी वजह से भारत इस मौके को बड़े अवसर के रूप में देख रहा है.
सेमीकंडक्टर थीम आने वाले कई सालों तक बड़ा ग्रोथ सेक्टर बन सकती है. EMS, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और चिप सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियां इस थीम से फायदा उठा सकती हैं.
हालांकि यह सेक्टर लंबी अवधि का है और इसमें बड़े निवेश, टेक्नोलॉजी और समय की जरूरत होती है. इसलिए निवेशकों को सिर्फ शॉर्ट टर्म खबरों के बजाय लॉन्ग टर्म इकोसिस्टम पर नजर रखनी होगी.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 Semiconductor Mission 2.0 क्या है?
यह भारत सरकार की अगली सेमीकंडक्टर रणनीति है, जिसका मकसद देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करना है.
Q2 इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स महंगे क्यों हो रहे हैं?
मेमोरी चिप्स की कीमत बढ़ने और सप्लाई चेन दबाव की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं.
Q3 भारत में कितने सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी मिली है?
अब तक करीब 12 प्लांट्स को मंजूरी मिली है.
Q4 AI का सेमीकंडक्टर सेक्टर से क्या संबंध है?
AI और डेटा सेंटर के लिए हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की भारी जरूरत होती है, जिससे मांग बढ़ रही है.
Q5 क्या भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बन सकता है?
सरकार का लक्ष्य 2035 तक भारत को दुनिया के प्रमुख सेमीकंडक्टर देशों में शामिल करना है.