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प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने तिमाही नतीजे पेश कर दिए हैं. बैंक ने न केवल मोटा पैसा कमाया है, बल्कि अपने शेयरधारकों की जेब भरने का भी पूरा इंतजाम कर दिया है. बैंक की तरफ से ₹17.35 प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया गया है. इसका मतलब है कि अगर आपके पास बैंक के शेयर हैं, तो जून की शुरुआत में आपके खाते में सीधी रकम आने वाली है.
चौथी तिमाही में बैंक का मुनाफा ₹19,683.75 करोड़ रहा. हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें थोड़ी नरमी रही, लेकिन साल दर साल के आधार पर यह जबरदस्त बढ़त है. पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹80,032 करोड़ रहा. पिछले साल यह आंकड़ा ₹70,901 करोड़ था.
अगर एसबीआई की सभी सहयोगी कंपनियों को मिला दें, तो कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹83,299 करोड़ के पार निकल गया है. बैंक की मुख्य आय यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी बढ़कर ₹44,379 करोड़ हो गई है, जो इसकी मजबूती को दिखाते हैं.
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शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सबसे बड़ी खबर डिविडेंड की है. बैंक के बोर्ड ने मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा अपने मालिकों यानी शेयरहोल्डर्स के साथ बांटने का फैसला किया है.
| विवरण (Details) | महत्वपूर्ण जानकारी (Information) |
| डिविडेंड की रकम | ₹17.35 प्रति इक्विटी शेयर |
| रिकॉर्ड डेट | 16 मई 2026 |
| भुगतान की तारीख | 4 जून, 2026 |
| कुल एसेट्स | ₹76.23 लाख करोड़ से ज्यादा |
किसी भी बैंक की सेहत उसके लोन बुक से मापी जाती है. एसबीआई ने इस मोर्चे पर बाजी मार ली है. बैंक का फंसा हुआ कर्ज यानी NPA अब अपने सबसे निचले स्तरों में से एक पर है.
बैंक को अब पुराने खराब लोन के लिए बहुत कम पैसे अलग रखने पड़ रहे हैं. प्रोविजनिंग खर्च ₹6,442 करोड़ से घटकर मात्र ₹2,872 करोड़ रह गया है, जिससे सीधे तौर पर मुनाफे को बूस्ट मिला है.
बैंक ने इस साल अपनी रणनीतिक निवेश वाली कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर भी मोटा मुनाफा कमाया है. इसे बैंकिंग की भाषा में 'स्मार्ट मूव' कहा जा रहा है. एसबीआई ने यस बैंक में अपनी 13.18% हिस्सेदारी ₹21.50 के भाव पर बेची. इससे बैंक की झोली में ₹4,593 करोड़ का शुद्ध मुनाफा आया. इसके बावजूद बैंक के पास अभी भी 10.78% हिस्सा बचा है.
बैंक ने जियो पेमेंट्स बैंक से भी अपना पूरा 14.96% हिस्सा बेचकर बाहर निकलने का फैसला किया. एक तरफ हिस्सा बेचा, तो दूसरी तरफ एसबीआई जनरल इंश्योरेंस में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 73.87% कर ली है.
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लोग एसबीआई पर कितना भरोसा करते हैं, यह बैंक के डिपॉजिट और लोन बुक से साफ पता चलता है. बैंक का बैलेंस शीट अब ₹76 लाख करोड़ के पार जा चुका है. बैंक ने बाजार में ₹48.78 लाख करोड़ का कर्ज दिया हुआ है. इसमें पिछले साल के मुकाबले भारी बढ़ोतरी हुई है.
बैंक के पास लोगों की जमा पूंजी बढ़कर ₹59.76 लाख करोड़ हो गई है. बैंक ने QIP के जरिए ₹25,000 करोड़ जुटाए हैं, जिससे उसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो सुधरकर 15.40% हो गया है.
वित्त वर्ष 2026 के नतीजे गवाही दे रहे हैं कि भारतीय स्टेट बैंक अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है. ₹17.35 का डिविडेंड देना बैंक के आत्मविश्वास को दिखाता है. खराब कर्ज में भारी गिरावट और नेट इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी यह संकेत है कि बैंक आने वाले समय में और भी मजबूत होगा. डिजिटल बैंकिंग और बढ़ते क्रेडिट एक्सपेंशन के दम पर एसबीआई ने न केवल अपना मुनाफा बढ़ाया है, बल्कि करोड़ों निवेशकों का भरोसा भी जीता है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 बैंक द्वारा डिविडेंड घोषित करने का क्या मतलब होता है?
जब कोई बैंक या कंपनी मुनाफा कमाती है, तो वह उस मुनाफे का एक हिस्सा अपने शेयरधारकों को इनाम के तौर पर देती है. इसे ही डिविडेंड कहा जाता है. यह निवेशक की अतिरिक्त कमाई होती है.
Q2 बैंकिंग सेक्टर में 'प्रोविजनिंग' कम होने के क्या मायने हैं?
प्रोविजनिंग वह रकम होती है जो बैंक संभावित डूबने वाले कर्ज के लिए पहले से अलग रखते हैं. इसमें कमी आने का मतलब है कि बैंक को अब अपने बांटे गए लोन के डूबने का खतरा कम लग रहा है, जो बैंक की अच्छी वित्तीय स्थिति का संकेत है.
Q3 'रिकॉर्ड डेट' निवेशकों के लिए क्यों जरूरी होती है?
रिकॉर्ड डेट वह कट-ऑफ तारीख होती है जिस दिन बैंक अपने रजिस्टर में शेयरधारकों के नाम चेक करता है. डिविडेंड पाने के लिए इस तारीख तक निवेशक के डीमैट खाते में बैंक के शेयर होना अनिवार्य है.
Q4 कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) क्या बताता है?
यह रेशियो दिखाता है कि बैंक के पास किसी भी जोखिम या आपात स्थिति से निपटने के लिए कितनी पूंजी उपलब्ध है. CAR का ज्यादा होना बैंक की स्थिरता और मजबूती का प्रमाण माना जाता है.
Q5 बैंकों के लिए रणनीतिक हिस्सेदारी बेचना (Stake Sale) क्यों महत्वपूर्ण है?
बैंक अक्सर दूसरी कंपनियों में निवेश करते हैं. जब उन निवेशों की वैल्यू बढ़ जाती है, तो बैंक अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफा कमाते हैं. इससे बैंक को अपनी मुख्य बैंकिंग गतिविधियों के लिए अतिरिक्त पूंजी मिल जाती है.