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युद्ध संकट में भी Aramco बनी रही 'क्रूड किंग' (Image Source-AI)
दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने साल 2025 के अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं. यह नतीजे इस बात का सबूत हैं कि बाजार में चाहे कितना भी उतार-चढ़ाव क्यों न हो, अरामको अपनी कुशलता और बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता के दम पर मुनाफा कमाना बखूबी जानती है.
हालांकि, कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने कंपनी की कमाई पर थोड़ा असर जरूर डाला है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी ने अपने निवेशकों का ख्याल रखने और भविष्य के लिए बड़े निवेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.
सऊदी अरामको ने 2025 में 93.4 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया है. हालांकि यह पिछले साल के 106.2 अरब डॉलर के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन इसके पीछे की वजह बाजार में तेल की गिरती कीमतें थीं. जब तेल का भाव 80 डॉलर से गिरकर 69 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाए, तो मुनाफा कम होना स्वाभाविक है. लेकिन, इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी अरामको जिस मजबूती के साथ खड़ी है, वह दिखाता है कि कंपनी का काम करने का तरीका कितना दमदार है.
136.2 अरब डॉलर का ऑपरेटिंग कैश फ्लो अरामको की सबसे बड़ी ताकत है. आसान शब्दों में कहें तो कंपनी के पास अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसों की कोई कमी नहीं है और उन्हें दूसरों के सामने हाथ फैलाने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती. यह कैश फ्लो कंपनी को अपना काम सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है.
फ्री कैश फ्लो के मामले में अरामको ने 85.4 अरब डॉलर का आंकड़ा छुआ, जो पिछले साल के 85.8 अरब डॉलर के लगभग बराबर है. यह वह पैसा है जो सारे खर्चों के बाद कंपनी की तिजोरी में बचता है. इतनी बड़ी रकम का होना अरामको को एक सुरक्षित ठिकाना (सेफ हेवन) बनाता है.
कंपनी का गियरिंग रेशियो 2024 के 4.5% से गिरकर 2025 के अंत तक 3.8% पर आ गया है. यह डेटा बताता है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ बहुत कम हो रहा है. कम कर्ज का मतलब है कि कंपनी पूरी तरह से अपने पैसों पर काम कर रही है.
अरामको ने 2025 में 52.2 अरब डॉलर का निवेश किया है. यह पैसा इसलिए खर्च किया गया ताकि भविष्य में उत्पादन में कोई कमी न आए. कंपनी ने 2026 के लिए भी 50 से 55 अरब डॉलर का बजट तय किया है, जो बताता है कि वे रुकने वाले नहीं हैं.
अरामको ने 2025 में अपने निवेशकों को कुल 85.5 अरब डॉलर बांटे. इतनी बड़ी रकम शायद ही कोई और कंपनी अपने निवेशकों को दे पाती है. अरामको ने यह संदेश साफ दिया है कि बाजार में चाहे कैसी भी स्थिति हो, उनके निवेशक सुरक्षित हैं.
चौथी तिमाही में कंपनी ने 21.89 अरब डॉलर का डिविडेंड घोषित किया, जो पिछले साल से 3.5% ज्यादा है. यह लगातार चौथा साल है जब अरामको ने लाभांश बढ़ाया है.
कंपनी ने 3 अरब डॉलर का शेयर बायबैक शुरू किया है. जब कंपनी अपने ही शेयर बाजार से वापस खरीदती है, तो इसका मतलब है कि कंपनी को पूरा भरोसा है कि उनका बिजनेस बहुत अच्छा कर रहा है.
2025 में एआई और डिजिटल तकनीक से कंपनी ने 5.3 अरब डॉलर बचाए हैं. यह कोई मामूली बात नहीं है. अरामको अब केवल एक तेल कंपनी नहीं, बल्कि एक 'एनर्जी-टेक' कंपनी बनती जा रही है.
संचयी तकनीकी वैल्यू (TRV)
2023 से अब तक अरामको ने तकनीक के जरिए कुल 11.3 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया है. यह Total Relationship Value (TRV) आंकड़ा बताता है कि तकनीक में किया गया निवेश कैसे सीधे कंपनी के बैंक बैलेंस में जुड़ रहा है.
अरामको ने 2030 तक अपनी गैस उत्पादन क्षमता में 80% बढ़ोतरी करने का लक्ष्य रखा है. यह उनके बिजनेस को केवल तेल तक सीमित न रखकर गैस की तरफ मोड़ने की बड़ी चाल है.
जाफुरा और तनाजीब गैस प्लांट अरामको की 2030 वाली रणनीति की धुरी हैं. जाफुरा में काम जोर-शोर से चल रहा है और तनाजीब अब चलने लगा है.
इक्तवा (iktva) प्रोग्राम के तहत 70% सामान कंपनी स्थानीय स्तर पर ही जुटा रही है. इससे उन पर वैश्विक लॉजिस्टिक बाधाओं का असर नहीं पड़ता.
मारजान और बेरी तेल क्षेत्रों में कंपनी ने काम और तेज कर दिया है. यह अरामको को यह ताकत देता है कि जब दुनिया को ज्यादा तेल की जरूरत हो, तो वे तुरंत सप्लाई बढ़ा सकें.
2025 में 'टोटल रिकॉर्डेबल केस रेट' आईपीओ के बाद से सबसे कम रहा. इसका मतलब है कि काम के दौरान चोट लगने या दुर्घटना होने की घटनाएं न्यूनतम हैं.
सऊदी अरामको के 2025 के नतीजे सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह एक 'ऑपरेटिंग मैनुअल' है. कम कर्ज, भारी नकदी और तकनीक का भरपूर उपयोग- यही वो मिश्रण है जो अरामको को आने वाले दशकों के लिए ऊर्जा बाजार का सबसे ताकतवर खिलाड़ी बनाए रखेगा.