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पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने पेश किए दमदार तिमाही नतीजे.
Persistent Systems Q4 Results: शेयर बाजार में जब भी आईटी और नई टेक्नोलॉजी की बात होती है, तो पर्सिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems) का नाम ज़रूर लिया जाता है. कंपनी ने मार्च तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2026 के जो आंकड़े पेश किए हैं, उन्हें देखकर निवेशक गदगद हैं.
पिछले 5 साल में कंपनी के शेयर ने अपने निवेशकों को लगभग 472% का छप्परफाड़ रिटर्न दिया है. अब बारी थी चौथी तिमाही के नतीजों की, और कंपनी ने यहां भी निराश नहीं किया. दमदार मुनाफे के साथ-साथ कंपनी के बोर्ड ने 18 रुपये के डिविडेंड का ऐसा ऐलान किया है कि शेयरहोल्डर्स की तो जैसे लॉटरी लग गई है.
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही में ऑपरेशंस से बहुत ही तगड़ा रेवेन्यू कमाया है. कंपनी का कामकाज जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसका अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं.
रेवेन्यू: कंपनी ने इस तिमाही में ₹4,055.9 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया है.
कुल आय: अगर अन्य सोर्स को भी जोड़ लें, तो कुल कमाई ₹4,089.4 करोड़ रही है.
मुनाफे की बात: टैक्स चुकाने से पहले का मुनाफा यानी PBT ₹673.9 करोड़ रहा, जबकि शुद्ध मुनाफा (Net Profit) ₹529.2 करोड़ दर्ज किया गया.

खास बात यह है कि कंपनी ने न केवल पिछले साल के मुकाबले बल्कि पिछली तिमाही के मुकाबले भी अपनी बढ़त बरकरार रखी है. यह ग्रोथ इसलिए भी अहम है क्योंकि पूरी दुनिया में आईटी सेक्टर को लेकर कई तरह की चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन पर्सिस्टेंट ने अपने मजबूत बिजनेस मॉडल के दम पर खुद को साबित किया है.
किसी भी कंपनी की असली ताकत तब दिखती है जब वह कमाई के साथ-साथ अपने खर्चों को भी काबू में रखे. पर्सिस्टेंट ने यहां भी बाजी मारी है. कंपनी का खर्च बढ़ा जरूर है, लेकिन वह उसकी ग्रोथ के अनुपात में ही है.
इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी विस्तार तो कर रही है, लेकिन फिजूलखर्ची पर उसकी लगाम कसी हुई है. यही वजह है कि कंपनी के मार्जिन स्थिर बने हुए हैं और वह कैश जनरेट करने में सफल रही है.
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अगर हम पूरे वित्त वर्ष 2026 की तस्वीर देखें, तो यह पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के इतिहास के सबसे बेहतरीन सालों में से एक रहा है. कंपनी ने हर मोर्चे पर अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
| FY26 | आंकड़े (करोड़ ₹ में) | पिछले साल (FY25) से तुलना |
| कुल रेवेन्यू | ₹14,748.4 | भारी बढ़त (FY25 में ₹11,938.7 था) |
| कुल आय | ₹14,928.8 | जबरदस्त उछाल |
| टैक्स से पहले मुनाफा | ₹2,500.2 | मजबूत पकड़ |
| नेट प्रॉफिट | ₹1,865.1 | शानदार ग्रोथ (FY25 में ₹1,400.1 था) |
यह टेबल दिखा रही है कि कंपनी की गाड़ी सुपरफास्ट ट्रैक पर है. एक साल के भीतर शुद्ध मुनाफे में करीब ₹465 करोड़ की बढ़ोतरी होना कोई छोटी बात नहीं है. यह दिखाता है कि कंपनी को नए ऑर्डर मिल रहे हैं और वह उन्हें बखूबी पूरा भी कर रही है.
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स अपने निवेशकों को खुश रखने का कोई मौका नहीं छोड़ती. कंपनी ने शानदार नतीजों के साथ-साथ तगड़े डिविडेंड का भी ऐलान किया है. बोर्ड ने ₹18 प्रति शेयर के आखिरी डिविडेंड की सिफारिश की है. कंपनी पहले ही ₹22 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड दे चुकी है. इस तरह पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए निवेशकों को कुल ₹40 प्रति शेयर का डिविडेंड मिला है.
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यह डिविडेंड बताता है कि मैनेजमेंट को अपने आने वाले कैश फ्लो और बिजनेस की मजबूती पर पूरा भरोसा है. जब कोई कंपनी इतना भारी डिविडेंड देती है, तो बाजार में यह संकेत जाता है कि कंपनी आर्थिक रूप से बहुत सुरक्षित है.
निवेशकों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कंपनी में किसका कितना पैसा लगा है. पर्सिस्टेंट का शेयरहोल्डिंग पैटर्न काफी संतुलित है. प्रमोटर के पास 30.3%, म्यूचुअल फंड (MF) के पास 22.1%, विदेशी निवेशक (FII) के पास 22.1% और पब्लिक (आम जनता) के पास 16.1% है. जबकि, अन्य के पास 9.3% हिस्सा है.

म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशकों का इतना बड़ा हिस्सा (करीब 44%) यह दिखाता है कि बड़े संस्थानों का इस कंपनी के मैनेजमेंट और भविष्य पर अटूट भरोसा है.
पर्सिस्टेंट की सफलता का राज उसके डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में छिपा है. कंपनी किसी एक सेक्टर के भरोसे नहीं बैठी है, बल्कि तीन बड़े वर्टिकल्स से उसे जबरदस्त कमाई हो रही है.
यह सेगमेंट कंपनी के लिए सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बना हुआ है. पूरे साल में इस वर्टिकल से ₹5,093.3 करोड़ का रेवेन्यू आया है. नए डील्स और बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल बदलावों का कंपनी को सीधा फायदा मिल रहा है.
हेल्थकेयर सेक्टर में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. पर्सिस्टेंट ने इस मौके को भुनाया और इस सेगमेंट से ₹3,772.2 करोड़ की कमाई की. डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग ने यहां ग्रोथ को स्थिर रखा है.
यह कंपनी का सबसे बड़ा सेगमेंट है. यहां से ₹5,883 करोड़ का रेवेन्यू मिला है. नई टेक्नोलॉजी और एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर की मांग ने इस हिस्से को कंपनी का सबसे मजबूत पिलर बना दिया है.
कंपनी के मार्जिन काफी हेल्दी रहे हैं. हालांकि, इस साल एक "एक्सेप्शनल आइटम" यानी असाधारण खर्च की वजह से मुनाफे पर मामूली असर पड़ा. नए लेबर कोड (Labour Codes) के लागू होने के कारण कंपनी को ₹89 करोड़ का एकमुश्त खर्च उठाना पड़ा. अगर हम इस एक बार के खर्च को हटा दें, तो कंपनी का असली मुनाफा और भी ज्यादा दमदार नजर आता है. कंपनी ने अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर बनाया है और सब-कॉन्ट्रैक्टिंग कॉस्ट को अच्छे से मैनेज किया है.
मैनेजमेंट ने सिर्फ मुनाफे पर ही ध्यान नहीं दिया है, बल्कि भविष्य की नींव भी मजबूत की है. कंपनी ने अपनी ग्लोबल सहायक कंपनियों (Subsidiaries) को और बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं-
अच्छी बात यह है कि इन बदलावों से कंपनी के वित्तीय नतीजों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ा है, बल्कि इससे आने वाले समय में कार्यक्षमता और बढ़ेगी.
कंपनी की वित्तीय स्थिति आज जितनी मजबूत है, उतनी पहले कभी नहीं थी. कंपनी की कुल संपत्ति अब ₹11,376.5 करोड़ पर पहुंच गई है. शेयरहोल्डर्स की इक्विटी भी बढ़कर ₹7,837.8 करोड़ हो गई है, जो वित्त वर्ष 2025 के मुकाबले काफी ज्यादा है. कंपनी के पास ₹1,074.9 करोड़ का कैश और कैश इक्विवेलेंट मौजूद है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने कितना फाइनल डिविडेंड देने का ऐलान किया है?
कंपनी ने ₹18 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने का ऐलान किया है. पूरे साल का कुल डिविडेंड ₹40 प्रति शेयर हो गया है.
Q2 वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट कितना रहा?
पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹1,865.1 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹1,400.1 करोड़ था.
Q3 कंपनी का सबसे बड़ा बिजनेस सेगमेंट कौन सा है?
सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और इमर्जिंग इंडस्ट्रीज कंपनी का सबसे बड़ा सेगमेंट है, जिसने ₹5,883 करोड़ का रेवेन्यू दिया है.
Q4 ₹89 करोड़ के असाधारण खर्च की वजह क्या है?
यह खर्च नए लेबर कोड (New Labour Codes) के प्रभाव के कारण हुआ है, जो एक बार का रेगुलेटरी खर्च है.
Q5 पिछले 5 साल में इस शेयर ने कितना रिटर्न दिया है?
पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने पिछले 5 साल के दौरान अपने निवेशकों को करीब 472% का शानदार रिटर्न दिया है.