online sale के मौसम में व्यापारियों ने सरकार से की ये मांग, बढ़ेगी मुश्किल

व्यापारियों के संगठन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) ने सरकार से मांग की है कि ई कामर्स पॉलिसी को लागू करने की तारीख किसी भी सूरत में आगे न बढ़ाई जाए साथ ही नीति में कोई परिवर्तन भी न की जाए. ये नीति 1 फरवरी से निश्चित रूप से लागू की जानी चाहिए.
online sale के मौसम में व्यापारियों ने सरकार से की ये मांग, बढ़ेगी मुश्किल

व्यापारियों ने ई कॉमर्स पॉलिसी को समय पर लागू करने की मांग की (फोटो - रॉयटर्स)

व्यापारियों के संगठन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) ने सरकार से मांग की है कि ई कामर्स पॉलिसी को लागू करने की तारीख किसी भी सूरत में आगे न बढ़ाई जाए साथ ही नीति में कोई परिवर्तन भी न की जाए. ये नीति 1 फरवरी से निश्चित रूप से लागू की जानी चाहिए. संगठन के अनुसार यदि पॉलिसी में कोई परिवर्तन होता है तो यह सरकार की कमज़ोरी समझी जाएगी. पॉलिसी में किसी भी प्रकार का परिवर्तन देश के 7 करोड़ व्यापारियों के हितों का अपमान होगा. ऐसे में व्यापारी सड़क कर उतर कर इस बदलाव का विरोध करेंगे.

नीति में हुआ बदलाव तो व्यापारी करेंगे आंदोलन
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की यह अफवाह तेजी से फैल रही है कि सरकार ई कॉमर्स कंपनियों को राहत देने के लिए नीति में बदलाव कर रही है. ऐसे में पॉलिसी में किसी भी प्रकार का बदलाव देश के करोड़ों व्यापारियों के साथ सरकार का विश्वासघात माना जाएगा. देश भर के व्यापारी पूरी ताकत से ऐसे किसी भी कदम का ज़बरदस्त विरोध करेंगे और देश भर में इसके ख़िलाफ़ एक राष्ट्रव्यापि अभियान चलाने के लिए मजबूर होंगे और दबाव की राजनीति का पर्दाफाश करेंगे.

व्यापारियों ने बैठक बुलाए जाने की मांग की
इस पॉलिसी का सीधा सम्बंध देश के करोड़ों व्यापारियों और उनके परिवारों की रोजी रोटी से है इसलिए देश भर के व्यापारी इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशील है. कैट ने वाणिज्य मंत्रालय से माँग की है की इस मुद्दे पर सभी पक्षों की एक मीटिंग तुरंत बुलाई जाए और मंत्रालय इस पर स्थिति स्पष्ट करे जिससे व्यापारियों का भरोसा बढ़े और भ्रम की स्थिति खत्म हो.

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नीति में हुआ बदलाव को चुनाव में होगा नुकसान
व्यापारिक संगठन कैट ने कहा कर यह चुनावी वर्ष है लकिन सरकार को किसी भी दबाव में नहीं आना चाहिए अन्यथा सरकार को इसकी राजनैतिक कीमत चुकानी पड़ेगी. देश में व्यापारी इस मुद्दे पर काफी संवेदनशील हैं. अब यह मामला देश के करोड़ों व्यापारियों के हितों और बड़ी ई कामर्स कम्पनियों के बीच का है. यदि पॉलिसी में कोई परिवर्तन हुआ तो व्यापारियों का वोट सरकार के खिलाफ जा सकता है. देश भर में फैले छोटे व्यापारी राजनीति में रूख बदलने में सक्षम है.

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