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निराशाजनक रहे Ola Electric के Q3 नतीजे.
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की दुनिया में बड़ा नाम रखने वाली कंपनी ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric Mobility Limited) ने 13 फरवरी 2026 को अपने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे पेश कर दिए हैं. बोर्ड मीटिंग दोपहर 3 बजे शुरू हुई और 3:45 बजे तक चली, जिसमें कंपनी की माली हालत का पूरा लेखा-जोखा सामने रखा गया. अगर सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी के लिए यह तिमाही काफी चुनौतीपूर्ण रही है.
कंपनी का रेवेन्यू न सिर्फ पिछले साल के मुकाबले गिरा है, बल्कि पिछली तिमाही की तुलना में भी इसमें कमी आई है. हालांकि, घाटे के मोर्चे पर कंपनी ने पिछले साल की तुलना में थोड़ा सुधार जरूर किया है, लेकिन 487 करोड़ रुपये का नेट लॉस अभी भी एक बड़ी चिंता बना हुआ है. ओला इलेक्ट्रिक के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नई लॉन्चिंग और ऑपरेशनल कुशलता के दम पर वह आने वाले समय में वापसी कर पाएगी. चलिए, इन नतीजों को विस्तार से समझते हैं.
ओला इलेक्ट्रिक का रेवेन्यू इस बार काफी दबाव में नजर आ रहा है. कंपनी ने ऑपरेशन से होने वाली कमाई में भारी गिरावट दर्ज की है.
भले ही रेवेन्यू कम हुआ हो, लेकिन कंपनी का शुद्ध घाटा (Net Loss) भी सुर्खियों में है. कंपनी अभी भी मुनाफे से काफी दूर है.
नेट लॉस का आंकड़ा: Q3 FY26 में कंपनी को 487 करोड़ रुपये का नेट लॉस हुआ है. यह पिछले साल की इसी तिमाही के 564 करोड़ रुपये के घाटे से थोड़ा कम है, लेकिन पिछली तिमाही (416 करोड़ घाटा) के मुकाबले बढ़ गया है.
9 महीने का घाटा: वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों में कंपनी को कुल 1,333 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
EPS पर असर: प्रति शेयर आय (EPS) की बात करें तो यह इस तिमाही में नेगेटिव (1.10 रुपये) रही है.
| Q3 FY26 | 470 | 487 |
| Q2 FY26 | 690 | 416 |
| Q3 FY25 | 1,045 | 564 |
कंपनी के खर्चों का एक बड़ा हिस्सा मटेरियल और अन्य ऑपरेशंस में जा रहा है. कुल खर्चों पर नजर डालें तो-
ओला इलेक्ट्रिक ने अपने आईपीओ (IPO) से 5,275 करोड़ रुपये जुटाए थे. कंपनी ने बताया है कि 31 दिसंबर 2025 तक इसमें से 3,772 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
लगातार हो रहे घाटे और घटती सेल्स के बावजूद मैनेजमेंट का मानना है कि कंपनी 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) बनी रहेगी, यानी यह चलती रहेगी. इसके पीछे कंपनी ने कई तर्क दिए हैं-
ओला इलेक्ट्रिक के लिए यह वक्त किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. रेवेन्यू में साल-दर-साल और तिमाही-दर-तिमाही गिरावट यह इशारा करती है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है या डिमांड में सुस्ती है. हालांकि, आईपीओ फंड का सही इस्तेमाल और सेल सेगमेंट में भविष्य की संभावनाएं कंपनी के लिए उम्मीद की किरण हैं.
487 करोड़ का घाटा कम करने के लिए कंपनी को अपनी सेल्स वॉल्यूम और मार्जिन पर कड़ी मेहनत करनी होगी. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मैनेजमेंट के दावे अगले कुछ क्वार्टर में धरातल पर कितनी मजबूती से उतरते हैं.