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NSE का चौंकाने वाला रिजल्ट
अगर आप शेयर बाजार में एक्टिव रहते हैं, तो आपने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का नाम तो सुना ही होगा. जिस प्लेटफॉर्म पर हम और आप ट्रेडिंग करते हैं, उस प्लेटफॉर्म ने खुद अपने रिपोर्ट कार्ड पेश किए हैं. लेकिन इस बार के आंकड़े थोड़े चौंकाने वाले हैं. एक तरफ जहां बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई छू रहा है, वहीं एनएससी (NSE) के मुनाफे में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली है. क्या यह गिरावट चिंता की बात है? या फिर आने वाले आईपीओ (IPO) से पहले यह महज एक छोटा सा झटका है? आइए, इस पूरी खबर को आसान भाषा में समझते हैं.
सबसे पहले बात करते हैं उन नंबरों की जो सुर्खियों में हैं. वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) में एनएससी (NSE) का नेट प्रॉफिट (शुद्ध मुनाफा) 2,408 करोड़ रुपये रहा. पिछले साल इसी तिमाही में यह काफी ज्यादा था, यानी सालाना आधार पर इसमें 37% की भारी गिरावट आई है.
इतना ही नहीं, एक्सचेंज की कुल कमाई (Total Income) भी 9% गिरकर 4,395 करोड़ रुपये रह गई है. अगर हम ऑपरेशनल प्रॉफिट (EBITDA) की बात करें, तो वहां भी 16% की सुस्ती दिखी है.
अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर भारत का इतना बड़ा एक्सचेंज घाटे (मुनाफे में कमी) में क्यों गया? इसकी सबसे बड़ी वजह है 'ट्रांजैक्शन चार्जेस' में आई कमी.
इसका मतलब है कि लोग ट्रेडिंग तो ज्यादा कर रहे हैं, लेकिन चार्ज कम होने की वजह से एक्सचेंज की सीधी कमाई पर असर पड़ा है.
जी हां, अंधेरे में कुछ रोशनी भी है. एनएससी (NSE) की डेटा फीड और टर्मिनल सर्विसेज से होने वाली कमाई 17% बढ़ गई है. साथ ही, लिस्टिंग सर्विसेज (कंपनियों को लिस्ट करने की फीस) से होने वाली इनकम में भी 11% की बढ़त देखी गई है. यह दिखाता है कि एक्सचेंज सिर्फ ट्रेडिंग फीस पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसके अन्य बिजनेस भी बढ़ रहे हैं.
इस रिजल्ट की सबसे खास बात यह है कि यह सेबी (Sebi) द्वारा एनओसी (NOC) मिलने के बाद के पहले आंकड़े हैं. करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद अब एनएससी (NSE) के आईपीओ (IPO) का रास्ता साफ होता दिख रहा है.
मार्केट के जानकारों की मानें तो अगले 7 से 8 महीनों में यह मेगा आईपीओ (IPO) बाजार में दस्तक दे सकता है. ग्रे मार्केट (Grey Market) में तो अभी से एनएससी (NSE) की वैल्यू 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा लगाई जा रही है.
एनएससी (NSE) के चेयरमैन श्रीनिवास इंजेती और एमडी (MD) आशीष चौहान ने इस मंजूरी को 'नए अध्याय की शुरुआत' बताया है. उनका मानना है कि यह आईपीओ (IPO) न केवल एक्सचेंज के लिए बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा संकेत होगा.