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NMDC ने लोहे के दाम में किया बदलाव.
शेयर बाजार के निवेशकों और स्टील सेक्टर पर नजर रखने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खबर आ रही है. भारत की दिग्गज माइनिंग कंपनी NMDC ने न सिर्फ अपने लोहे (Iron Ore) की कीमतों में बड़ा बदलाव किया है, बल्कि उत्पादन के मामले में एक ऐसा इतिहास रच दिया है जिसे आज तक देश की कोई भी माइनिंग कंपनी छू नहीं पाई है सोमवार को जब बाजार खुलेगा, तो निवेशकों की नजरें NMDC के शेयरों पर टिकी होंगी, क्योंकि कंपनी ने उत्पादन और विस्तार के मोर्चे पर धमाकेदार आंकड़े पेश किए हैं.
NMDC ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी जानकारी में बताया है कि उसने आयरन ओर प्रोडक्ट्स के दामों को रिवाइज कर दिया है. ये नई कीमतें 5 अप्रैल 2026 से ही प्रभावी हो गई हैं. कंपनी ने साफ किया है कि ये बेस प्राइसेस हैं और इनमें टैक्स का हिस्सा अलग से जोड़ा जाएगा.
| कच्चा लोहा | ग्रेड और साइज | नई कीमत (₹ प्रति टन) |
| बैला लंप (Baila Lump) | 65.5%, 10-40 mm | 5,300 |
| बैला फाइन्स (Baila Fines) | 64%, -10 mm | 4,500 |
कीमतों से जुड़ी खास बातें-
NMDC के लिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 किसी सपने जैसा रहा है. स्टील मंत्रालय के मुताबिक, यह भारत के माइनिंग इतिहास की पहली ऐसी कंपनी बन गई है जिसने एक साल में 50 मिलियन टन उत्पादन का आंकड़ा पार किया है. कंपनी ने कुल 53.15 मिलियन टन लोहे का उत्पादन कर सबको हैरान कर दिया है.
बाजार बंद होने के वक्त (2 अप्रैल) NMDC का शेयर 78.08 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा था. लेकिन अब रविवार को कीमतों में बदलाव और रिकॉर्ड प्रोडक्शन की खबरों के बाद सोमवार को इसमें बड़ी हलचल की उम्मीद है. कंपनी ने न सिर्फ लोहा निकाला है, बल्कि अपने बिजनेस का विस्तार भी बहुत तेजी से किया है.
इस ऐतिहासिक कामयाबी में छत्तीसगढ़ की किरंदुल और बचेली खदानों के साथ-साथ कर्नाटक की दोनिमलाई खदान का सबसे बड़ा योगदान रहा है. इन खदानों ने अपने अब तक के इतिहास का सबसे बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है. यही वजह है कि स्टील मंत्रालय भी NMDC की इस उपलब्धि की तारीफ कर रहा है.
NMDC ने इस साल माइनिंग की दुनिया में अपनी बादशाहत साबित कर दी है. 53 मिलियन टन का प्रोडक्शन और लोहे की कीमतों में समय पर बदलाव यह बताता है कि कंपनी अपनी स्ट्रैटेजी को लेकर बहुत स्पष्ट है. सोमवार को शेयर बाजार में इस स्टॉक की चाल कैसी रहती है, यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि कंपनी के पास अब लोहे के साथ-साथ कोयला और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी जुड़ गई है.