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शेयर से जुड़ी बड़ी खबर, NSE फाइलिंग से हलचल
शेयर बाजार में जब कोई स्टॉक रॉकेट की रफ्तार से भागता है, तो उसके पीछे कोई न कोई बड़ी वजह जरूर होती है. 'लक्स इंडस्ट्रीज' (Lux Industries) के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. महज एक महीने के भीतर इस शेयर ने अपने निवेशकों को 100 पर्सेंट से ज्यादा का रिटर्न दिया है.
लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती, अब कंपनी की ओर से एक ऐसी खबर आई है जिसने बाजार में खलबली मचा दी है. कंपनी का पूरा बिजनेस अब तीन हिस्सों में बंटने जा रहा है. चलिए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है यह पूरा फैमिली सेटलमेंट और निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं.
लक्स इंडस्ट्रीज के प्रमोटर ग्रुप यानी टोडी फैमिली के सदस्यों के बीच एक फैमिली सेटलमेंट एग्रीमेंट (FSA) हुआ है. इसका सीधा मकसद है बिजनेस और हिस्सेदारी को पूरी तरह साफ-साफ बांटना. कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी गई फाइलिंग में बताया है कि यह एग्रीमेंट प्रमोटर ग्रुप के बीच हुआ है और कंपनी खुद इसका हिस्सा नहीं है. हालांकि, इस एग्रीमेंट के आधार पर कंपनी के बोर्ड ने भविष्य की रणनीति तय कर ली है. कंपनी अपने पूरे कारोबार को तीन वर्टिकल्स (Vertical A, B और C) में बांटने की तैयारी कर रही है-
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में निवेशकों के पास एक कंपनी के बदले तीन अलग-अलग कंपनियों के शेयर हो सकते हैं.
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डिमर्जर (बंटवारा) के बाद जिम्मेदारी और कंट्रोल को भी फैमिली के अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है-
इस कदम से हर ग्रुप अपने-अपने हिस्से के बिजनेस पर पूरी तरह फोकस कर पाएगा, जिससे आपसी विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.
लक्स इंडस्ट्रीज के पास आज भारत के कुछ सबसे बड़े इनरवियर ब्रांड्स हैं. इस समझौते के तहत ब्रांड्स और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को भी बांटा जाएगा-
अभी के लिए मैनेजमेंट या कंट्रोल में कोई तुरंत बदलाव नहीं होगा. इसका असली असर डिमर्जर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नजर आएगा.
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लक्स इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए अप्रैल का महीना किसी लॉटरी से कम साबित नहीं हुआ. शेयर की कीमतों में जो तेजी आई, उसने सबको हैरान कर दिया है.

सिर्फ 24 दिनों के भीतर शेयर का भाव 825 रुपये (30 मार्च 2026) से उछलकर 1,747 रुपये (23 अप्रैल 2026) पर पहुंच गया है. यानी निवेशकों का पैसा एक महीने से भी कम समय में दोगुना हो चुका है.
भले ही शेयर का भाव आसमान छू रहा हो, लेकिन कंपनी के वित्तीय आंकड़े (Financials) कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. शेयर की इस तेजी ने वैल्यूएशन को काफी महंगा कर दिया है.
लक्स इंडस्ट्रीज का P/E रेश्यो फिलहाल 40 से 46.6 के बीच है. अगर इसकी तुलना इसके प्रतिद्वंदियों से करें, तो यह काफी ज्यादा नजर आता है. डॉलर इंडस्ट्रीज का P/E 14.9-18.2 और गो फैशन का 21.94-36.96 के बीच है. भले ही पेज इंडस्ट्रीज का P/E 53-56 के साथ इससे ऊपर हो, लेकिन लक्स का वैल्यूएशन उसके मौजूदा मुनाफे के हिसाब से बहुत ज्यादा लग रहा है.
Q3 FY26 के नतीजे निराशाजनक रहे हैं. रेवेन्यू पिछले क्वार्टर के मुकाबले 13.63% घटकर ₹672.64 करोड़ रह गया. सबसे ज्यादा चिंता नेट प्रॉफिट को लेकर है, जिसमें पिछले क्वार्टर के मुकाबले 45.75% और पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 60.30% की भारी गिरावट देखी गई है. अब कंपनी का नेट प्रॉफिट गिरकर सिर्फ ₹12.51 करोड़ रह गया है.
कंपनी के मार्जिन्स भी लगातार दबाव में दिख रहे हैं. EBITDA मार्जिन, जो पिछले साल 9.03% था, अब घटकर 5.33% पर आ गया है. इसके पीछे मुख्य कारण विज्ञापन पर होने वाला भारी खर्च और नए प्रोडक्ट्स को डेवलप करने में आने वाली लागत है. कंपनी अपने ब्रांड्स को प्रमोट करने के लिए काफी पैसा खर्च कर रही है, जिसका सीधा असर उसके मुनाफे पर पड़ रहा है.

भारतीय कपड़ा बाजार (Indian Apparel Market) का भविष्य बहुत उज्ज्वल है. एक अनुमान के मुताबिक, 2034 तक यह बाजार 117.05 बिलियन डॉलर का हो सकता है. लक्स इंडस्ट्रीज जिस तरह से विस्तार कर रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फोकस बढ़ा रही है, उससे उम्मीद है कि वह इस ग्रोथ का फायदा उठा पाएगी.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह नहीं दी गई है. किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श जरूर कर लें.)