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CCI Raids: भारत के कम्पटीशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने मीडिया एडवर्टाइजर कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए GroupM, Dentsu और Interpublic Group जैसी ग्लोबल एडवर्टाइजिंग दिग्गजों के दफ्तरों पर छापा मारा है. आरोप है कि ये कंपनियां मीडिया कंपनियों से मिलकर विज्ञापन दरों और डिस्काउंट को तय कर रही थीं, जिससे कॉम्पिटिशन को नुकसान हो रहा था.
CCI को इन मीडिया एजेंसियों के खिलाफ शिकायत मिली थी कि उन्होंने बड़े ब्रॉडकास्टर्स के साथ मिलकर विज्ञापन दरों को कृत्रिम रूप से तय किया और बाजार में अनुचित फायदा उठाया. यह मामला एड रेट फिक्सिंग और डिस्काउंट डील्स से जुड़ा हुआ है, जिससे विज्ञापनदाता और छोटे ब्रॉडकास्टर्स को नुकसान हो सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, CCI ने मुंबई, नई दिल्ली और गुरुग्राम में करीब 10 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की. जिन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें शामिल हैं.
- GroupM- ब्रिटेन की WPP की स्वामित्व वाली कंपनी
- Dentsu- जापान की एडवर्टाइजिंग दिग्गज
- Interpublic Group (IPG Mediabrands)- अमेरिका की प्रमुख मीडिया एजेंसी
- Indian Broadcasting and Digital Foundation- प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स का संगठन
CCI की जांच का फोकस इस बात पर है कि कैसे ये एजेंसियां ब्रॉडकास्टर्स के साथ मिलकर एडवर्टाइजिंग रेट्स को फिक्स कर रही थीं. इस तरह के मामलों में एडवर्टाइजर कंपनियां एयरटाइम और प्रिंट स्पेस की कीमतें पहले से आपस में तय कर लेती हैं, जिससे कॉम्पिटिशन कम हो जाता है और ग्राहकों को नुकसान होता है.
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत का एडवर्टाइजिंग मार्केट बड़े बदलावों से गुजर रहा है. हाल ही में Disney और Reliance का $8.5 बिलियन का मेगा मर्जर हुआ है, जिससे ये नया ग्रुप टीवी और स्ट्रीमिंग एंड मार्केट का 40% कंट्रोल कर सकता है. ऐसे में CCI की ये कार्रवाई और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है.
इस रेड पर GroupM, Dentsu, और IPG Mediabrands जैसी बड़ी कंपनियों ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. Indian Broadcasting and Digital Foundation और CCI ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है.
- दिसंबर 2023- CCI ने Pernod Ricard और Anheuser-Busch InBev के दफ्तरों पर छापा मारा था, जो शराब निर्माताओं की कीमत तय करने की साजिश से जुड़ा मामला था.
- अक्टूबर 2022- Google पर भारतीय एंटीट्रस्ट बॉडी ने ₹1,337 करोड़ का जुर्माना लगाया था.
- अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इन मीडिया एडवरटाइजर कंपनियों पर भारी जुर्माना लग सकता है और उनके अनुबंध रद्द किए जा सकते हैं.
- इससे एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आ सकता है और छोटे प्लेयर्स को ज्यादा अवसर मिल सकते हैं.
- भारत में मीडिया और विज्ञापन बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए नियम लागू किए जा सकते हैं.
- सरप्राइज रेड्स (अचानक छापेमारी)- CCI अधिकारी कंपनियों के दफ्तरों में जाकर दस्तावेज जब्त करते हैं.
- कर्मचारियों से पूछताछ- कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाते हैं.
- डेटा और ईमेल की जांच- संभावित सबूतों को इकठ्ठा किया जाता है.
- लंबी जांच प्रक्रिया- केस को गोपनीय रखा जाता है और कई महीनों तक जांच चल सकती है.