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स्मॉलकैप स्टॉक पर निवेशक रखें नजर, असम इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कॉरपोरेशन से मिला ऑर्डर (फोटो- AI)
स्मॉलकैप सेक्टर की कंपनी Marsons Limited एक बार फिर चर्चा में आ गई है. कंपनी को असम इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कॉरपोरेशन (AEGCL) से ₹31.27 करोड़ का नया ऑर्डर मिला है. यह ऑर्डर पावर ट्रांसफॉर्मर की सप्लाई और उससे जुड़ी सेवाओं के लिए दिया गया है. इसके अलावा कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसने बाजार के निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
कंपनी द्वारा 3 जून 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार, Marsons Limited को असम इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कॉरपोरेशनसे लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) प्राप्त हुआ है. इस ऑर्डर की कुल कीमत ₹31,26,70,500 है, जिसमें GST भी शामिल है.

यह ऑर्डर Durlavcherra, Karimganj और Srikona सबस्टेशनों के लिए Package T-3 के तहत दिया गया है. कंपनी को 132/33kV, 50MVA क्षमता वाले पावर ट्रांसफॉर्मर की सप्लाई करनी है और इसके साथ संबंधित सेवाएं भी प्रदान करनी होंगी.
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार यह एक घरेलू (Domestic) ऑर्डर है. कंपनी को इस कॉन्ट्रैक्ट का निष्पादन 12 महीनों के भीतर करना है. निर्धारित समय सीमा के भीतर ट्रांसफॉर्मर की सप्लाई और संबंधित कार्य पूरे किए जाएंगे.
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कंपनी ने अपनी फाइलिंग में यह भी स्पष्ट किया है कि ऑर्डर देने वाली संस्था में प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की कोई हिस्सेदारी या रुचि नहीं है. साथ ही यह किसी प्रकार का संबंधित पक्ष (Related Party) ट्रांजैक्शन भी नहीं है.
Marsons Limited को मिला यह ऑर्डर कुल ₹31.27 करोड़ का है, जिसमें GST शामिल है. ऑर्डर असम इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कॉरपोरेशन द्वारा दिया गया है. इसके तहत 132/33kV, 50MVA पावर ट्रांसफॉर्मर और संबंधित सेवाओं की सप्लाई की जाएगी. यह कार्य Durlavcherra, Karimganj और Srikona सबस्टेशनों के लिए किया जाएगा तथा पूरे प्रोजेक्ट को 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
कंपनी के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में भी एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले एक वर्ष के दौरान कंपनी में अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाई है.
जानकारी के अनुसार 2025 के अधिकांश समय तक FII होल्डिंग बेहद कम रही, लेकिन मार्च 2026 तिमाही में इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह करीब 0.1 प्रतिशत तक पहुंच गई. संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को अक्सर कंपनी के प्रति बढ़ते विश्वास और संभावित विकास संभावनाओं के संकेत के रूप में देखा जाता है.
कंपनी को मिला नया ऑर्डर और FIIs की बढ़ती हिस्सेदारी दोनों ऐसे कारक हैं जिन पर बाजार के निवेशक नजर बनाए हुए हैं. एक तरफ कंपनी के ऑर्डर बुक में नया काम जुड़ा है, वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों की बढ़ती मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. आने वाले समय में निवेशक कंपनी के प्रोजेक्ट निष्पादन और शेयरहोल्डिंग पैटर्न में होने वाले बदलावों पर नजर रख सकते हैं.
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