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BHEL को नौसेना से मिल सकता है बड़ा ऑर्डर.
BHEL Share Price: देश की महारत्न PSU कंपनी Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) के लिए बड़ी पॉजिटिव खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक कंपनी को आने वाले समय में ₹8,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ तक का बड़ा डिफेंस ऑर्डर मिल सकता है. यह ऑर्डर भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए मरीन गैस टर्बाइन से जुड़ा हो सकता है.
अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह BHEL के डिफेंस बिजनेस के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. खास बात यह है कि यह पूरा प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी रक्षा निर्माण मिशन से जुड़ा हुआ है.
हमारे संवाददाता अनुवेश रथ ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भारतीय नौसेना को अगले कुछ वर्षों में 35 से 40 स्वदेशी 40 MW मरीन गैस टर्बाइन की जरूरत पड़ सकती है. इनका इस्तेमाल युद्धपोतों और नौसेना के बड़े जहाजों में किया जाएगा.
भारत सरकार ने 2035 तक 50 से ज्यादा युद्धपोत और पनडुब्बियां बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है. ऐसे में नेवी को भारी संख्या में हाई-पावर मरीन इंजन और गैस टर्बाइन की जरूरत होगी. इसी जरूरत को देखते हुए BHEL का नाम चर्चा में आया है.
BHEL पहले ही 40 MW मरीन गैस टर्बाइन विकसित कर चुकी है. यही वजह है कि कंपनी को इस संभावित ऑर्डर के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा है. हालांकि कंपनी ने इस खबर पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और Zee Business के ईमेल का भी जवाब नहीं दिया.
BHEL अब सिर्फ पावर सेक्टर तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी लगातार डिफेंस और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. हाल ही में कंपनी ने Defence Research and Development Organisation के तहत काम करने वाली Naval Science & Technological Laboratory (NSTL), विशाखापट्टनम के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट किया था.
इस समझौते के तहत BHEL को Naval Vessels के लिए LM2500 Gas Turbine Infrared Suppression System तैयार करने, इंस्टॉल करने और कमीशनिंग की टेक्नोलॉजी मिलेगी.
आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी तकनीक है जो युद्धपोतों को दुश्मन की इंफ्रारेड ट्रैकिंग से बचाने में मदद करती है. यानी यह सीधे तौर पर एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़ा प्रोजेक्ट है.
भारत सरकार लगातार रक्षा क्षेत्र में आयात कम करने और स्वदेशी निर्माण बढ़ाने पर जोर दे रही है. पहले कई रक्षा उपकरण विदेशों से खरीदे जाते थे, लेकिन अब सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा उत्पादन भारत में ही हो. BHEL जैसी कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है क्योंकि उनके पास भारी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत अनुभव है.
FY26 में BHEL का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है. कंपनी का टर्नओवर करीब ₹32,350 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 18% ज्यादा है.
सबसे बड़ी बात यह रही कि कंपनी को सालभर में करीब ₹75,000 करोड़ के नए ऑर्डर मिले. इसके बाद कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर लगभग ₹2.4 लाख करोड़ पहुंच गई है.

कंपनी ने FY26 में करीब 8.9 GW पावर क्षमता भी कमीशन या सिंक्रोनाइज की. इससे पता चलता है कि कंपनी सिर्फ ऑर्डर लेने में नहीं बल्कि उन्हें समय पर पूरा करने में भी मजबूत स्थिति में है.
अगर BHEL को यह डिफेंस ऑर्डर मिलता है, तो इससे कंपनी के बिजनेस प्रोफाइल में बड़ा बदलाव आ सकता है. अभी तक BHEL की पहचान मुख्य रूप से पावर सेक्टर PSU के तौर पर रही है, लेकिन डिफेंस में मजबूत एंट्री कंपनी के लिए नया ग्रोथ इंजन बन सकती है.
डिफेंस ऑर्डर आमतौर पर लंबे समय तक चलते हैं और इनमें बेहतर मार्जिन मिलने की संभावना रहती है. इससे कंपनी की कमाई और ऑर्डर विजिबिलिटी दोनों मजबूत हो सकती हैं.
हालांकि निवेशकों को यह भी समझना होगा कि अभी यह खबर सूत्रों के हवाले से है और कंपनी की तरफ से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसलिए शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.