दिल्ली की रियल एस्टेट कंपनी का पुणे के प्रॉपर्टी बाजार पर कब्जा! 294 करोड़ में की बड़ी डील, शेयरों पर असर तय

रियल एस्टेट दिग्गज लोढ़ा डेवलपर्स ने पुणे की सॉलिडराइज रियल्टी में 80% हिस्सेदारी खरीदी है. 294 करोड़ रुपये के इस सौदे से पुणे के प्रॉपर्टी बाजार में लोढ़ा की पकड़ और मजबूत होगी.
दिल्ली की रियल एस्टेट कंपनी का पुणे के प्रॉपर्टी बाजार पर कब्जा! 294 करोड़ में की बड़ी डील, शेयरों पर असर तय

लोढ़ा डेवलपर्स ने सॉलिडराइज रियल्टी (SRPL) के साथ एक शेयर खरीद समझौता (SPA) किया है

रियल एस्टेट की दुनिया में हलचल तेज है. मुंबई में अपना लोहा मनवाने के बाद अब लोढ़ा डेवलपर्स पुणे के प्रॉपर्टी मार्केट में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है. शनिवार को लोढ़ा डेवलपर्स ने शेयर बाजार को एक बड़ी जानकारी दी है. कंपनी ने पुणे स्थित सॉलिडराइज रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के लिए हाथ मिलाया है.

यह सौदा सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि लोढ़ा की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) से बाहर निकलकर देश के अन्य बड़े शहरों में अपनी पहचान बनाना चाहता है. आइए जानते हैं इस डील की बारीकियां और इससे पुणे के रियल्टी मार्केट पर क्या असर पड़ेगा.

क्या है इस पूरी डील का गणित?

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लोढ़ा डेवलपर्स ने सॉलिडराइज रियल्टी (SRPL) के साथ एक शेयर खरीद समझौता (SPA) किया है. इस समझौते के तहत लोढ़ा कंपनी में 80 फीसदी की इक्विटी हिस्सेदारी खरीदेगी. इसके लिए लोढ़ा कुल 294.07 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी. यह पूरा सौदा कैश में होगा और उम्मीद है कि 16 फरवरी 2026 तक यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.

 Lodha Developers Solidrise Realty Acquisition

सबसे खास बात यह है कि इस खरीदारी के बाद सॉलिडराइज रियल्टी अब लोढ़ा डेवलपर्स की एक सहायक कंपनी (Subsidiary) के तौर पर काम करेगी. यह अधिग्रहण किसी संबंधित पार्टी के साथ नहीं किया गया है और न ही इसमें कंपनी के प्रमोटरों का कोई निजी हित शामिल है.

पुणे को ही क्यों चुना लोढ़ा ने?

पुणे इस समय भारत के सबसे तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजारों में से एक है. यहां आईटी सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग हब होने की वजह से घरों की मांग हमेशा बनी रहती है. लोढ़ा का मानना है कि सॉलिडराइज रियल्टी को अपने साथ जोड़कर वह पुणे के बाजार में और भी तेजी से अपने प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर पाएगा. कंपनी पहले से ही पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में सक्रिय है और हाल ही में उसने दिल्ली-एनसीआर के रिहायशी बाजार में भी कदम रखा है.

लोढ़ा के खजाने और ग्रोथ की तस्वीर

अगर हम लोढ़ा डेवलपर्स के हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें, तो कंपनी काफी मजबूत स्थिति में दिख रही है. चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 1 फीसदी बढ़कर 956.9 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. पिछले साल इसी दौरान यह 944.4 करोड़ रुपये था.

डील का नामसॉलिडराइज रियल्टी (SRPL) अधिग्रहण
हिस्सेदारी (Stake)80% इक्विटी हिस्सेदारी
डील की कीमत₹294.07 करोड़
तीसरी तिमाही मुनाफा₹956.9 करोड़ (1% बढ़त)
नई जमीनों की वैल्यू₹34,000 करोड़ (5 लैंड पार्सल)
कुल विकसित एरिया10 करोड़ स्क्वायर फीट से ज्यादा

यही नहीं, कंपनी की कुल आय भी 4,146.6 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,775.4 करोड़ रुपये हो गई है. कंपनी की आक्रामक रणनीति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसी तिमाही में लोढ़ा ने मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 5 जमीन के बड़े टुकड़े खरीदे हैं. इन जमीनों पर बनने वाले प्रोजेक्ट्स की अनुमानित बिक्री वैल्यू करीब 34,000 करोड़ रुपये है.

10 करोड़ स्क्वायर फीट से ज्यादा का अनुभव

लोढ़ा ग्रुप ने अब तक 10 करोड़ स्क्वायर फीट से भी ज्यादा का एरिया डेवलप कर लिया है. कंपनी जमीन खरीदने के लिए सीधे तौर पर खरीदारी तो करती ही है, साथ ही जमीन के मालिकों के साथ साझेदारी (Partnership) करके भी नए प्रोजेक्ट्स तैयार करती है. पुणे में किया गया यह ताजा सौदा इसी विजन को आगे ले जाने की एक कड़ी है. निवेशकों के लिए भी यह एक अच्छा संकेत है क्योंकि कंपनी कैश के जरिए सौदे कर रही है और अपने कारोबार को सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रख रही है.

निवेशको के काम की बात

लोढ़ा डेवलपर्स का सॉलिडराइज रियल्टी में 294 करोड़ रुपये का निवेश यह साफ बताता है कि कंपनी पुणे के भविष्य को लेकर कितनी गंभीर है. अपनी सहायक कंपनी के जरिए अब लोढ़ा पुणे के हाई-ग्रोथ इलाकों में नए प्रोजेक्ट्स की लाइन लगा सकता है. मजबूत मुनाफे और आक्रामक विस्तार योजना के साथ लोढ़ा अब देश के हर बड़े शहर में अपनी 'ब्रैंड लोढ़ा' की पहचान को और मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है.

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