&format=webp&quality=medium)
देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC (Life Insurance Corporation of India) एक बार फिर सुर्खियों में है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस साल LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. यह बिक्री OFS (Offer for Sale) के जरिए होगी और इसमें 3 से 5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेची जा सकती है. इस डील से सरकार को करीब 20 से 30 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. खास बात यह है कि मई 2027 तक सरकार को LIC में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग का नियम पूरा करना ही होगा. इसी को देखते हुए सरकार ने रोडशो शुरू कर दिए हैं और मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति भी हो चुकी है.
LIC भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है और अभी भी सरकार के पास इसका बड़ा हिस्सा है. जब LIC का IPO आया था तो इसे लेकर भारी उत्साह देखा गया था, लेकिन अभी भी सरकार के पास 95% से ज्यादा हिस्सेदारी है.
OFS यानी Offer for Sale एक ऐसा तरीका है जिसमें कंपनी का प्रमोटर (यहां सरकार) स्टॉक एक्सचेंज के जरिए अपने शेयर आम जनता और संस्थागत निवेशकों को बेचता है.
सरकार ने LIC के OFS के लिए Motilal Oswal और IDBI Capital को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया है. ये बैंक रोडशो और निवेशकों से बातचीत का काम देखेंगे.
LIC का स्टॉक अभी भी निवेशकों के बीच लोकप्रिय है, लेकिन पिछले कुछ समय में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. अगर सरकार OFS लाती है तो-
सरकार ने इस OFS से पहले रोडशो शुरू कर दिए हैं. इसका मकसद है-
हर साल सरकार बजट में डिसइन्वेस्टमेंट से जुड़े टारगेट रखती है. LIC की हिस्सेदारी बिक्री उस टारगेट को पूरा करने में अहम रोल निभाएगी.
कुल मिलाकर, LIC का यह OFS सरकार और निवेशकों दोनों के लिए बड़ा मौका है.
आने वाले महीनों में LIC से जुड़ी यह बड़ी डील बाजार में चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा बनी रहेगी.
FAQs
सरकार इस साल 3% से 5% हिस्सेदारी OFS के जरिए बेच सकती है.
OFS एक प्रक्रिया है जिसमें प्रमोटर अपने शेयर स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों को बेचता है. इसमें अक्सर डिस्काउंट ऑफर भी दिया जाता है.
अनुमान है कि सरकार को इस OFS से 20,000 से 30,000 करोड़ रुपये तक की रकम मिलेगी.
निवेशकों को सस्ते दाम पर LIC के शेयर खरीदने का मौका मिल सकता है और मार्केट में शेयर की लिक्विडिटी बढ़ेगी.
SEBI के नियम के मुताबिक मई 2027 तक सभी कंपनियों में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग होना जरूरी है. LIC में यह अभी 5% से कम है, इसलिए सरकार हिस्सेदारी बेच रही है.