Exclusive: LIC में 3-5% हिस्सा बेचेगी सरकार, OFS से जुटेंगे ₹20-30 हजार करोड़, मर्चेंट बैंकर हुए नियुक्त

LIC भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है और अभी भी सरकार के पास इसका बड़ा हिस्सा है. जब LIC का IPO आया था तो इसे लेकर भारी उत्साह देखा गया था, लेकिन अभी भी सरकार के पास 95% से ज्यादा हिस्सेदारी है.
Exclusive: LIC में 3-5% हिस्सा बेचेगी सरकार, OFS से जुटेंगे ₹20-30 हजार करोड़, मर्चेंट बैंकर हुए नियुक्त

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC (Life Insurance Corporation of India) एक बार फिर सुर्खियों में है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस साल LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. यह बिक्री OFS (Offer for Sale) के जरिए होगी और इसमें 3 से 5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेची जा सकती है. इस डील से सरकार को करीब 20 से 30 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. खास बात यह है कि मई 2027 तक सरकार को LIC में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग का नियम पूरा करना ही होगा. इसी को देखते हुए सरकार ने रोडशो शुरू कर दिए हैं और मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति भी हो चुकी है.

LIC में हिस्सेदारी बिक्री क्यों जरूरी?

LIC भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है और अभी भी सरकार के पास इसका बड़ा हिस्सा है. जब LIC का IPO आया था तो इसे लेकर भारी उत्साह देखा गया था, लेकिन अभी भी सरकार के पास 95% से ज्यादा हिस्सेदारी है.

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  • SEBI का नियम कहता है कि किसी भी कंपनी में न्यूनतम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग जरूरी है.
  • सरकार के पास मई 2027 तक का समय है, ताकि वह इस नियम को पूरा कर सके.
  • इसी वजह से सरकार ने OFS (Offer for Sale) का रास्ता चुना है.

क्या है OFS (Offer for Sale)?

OFS यानी Offer for Sale एक ऐसा तरीका है जिसमें कंपनी का प्रमोटर (यहां सरकार) स्टॉक एक्सचेंज के जरिए अपने शेयर आम जनता और संस्थागत निवेशकों को बेचता है.

  • इसमें नीलामी जैसी प्रक्रिया होती है.
  • निवेशक एक तय प्राइस बैंड के अंदर बोली लगाते हैं.
  • अंत में शेयर अलॉटमेंट बोली और उपलब्ध शेयरों के हिसाब से होता है.

सरकार ने LIC के OFS के लिए Motilal Oswal और IDBI Capital को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया है. ये बैंक रोडशो और निवेशकों से बातचीत का काम देखेंगे.

कितनी हिस्सेदारी बिकेगी?

  • सूत्रों के मुताबिक सरकार 3% से 5% हिस्सेदारी बेच सकती है.
  • मौजूदा मार्केट प्राइस के हिसाब से इससे 20,000 करोड़ से 30,000 करोड़ रुपये जुटने का अनुमान है.
  • यह पैसा सरकार के डिसइन्वेस्टमेंट टारगेट को पूरा करने में मदद करेगा.

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?

LIC का स्टॉक अभी भी निवेशकों के बीच लोकप्रिय है, लेकिन पिछले कुछ समय में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. अगर सरकार OFS लाती है तो-

  • निवेशकों को सस्ता खरीदने का मौका मिल सकता है क्योंकि OFS में अक्सर डिस्काउंट ऑफर होता है.
  • लिक्विडिटी बढ़ेगी- LIC के शेयर बाजार में ज्यादा उपलब्ध होंगे, जिससे ट्रेडिंग आसान होगी.
  • लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटी- बीमा सेक्टर में LIC की पकड़ मजबूत है और सरकार का समर्थन भी इसके साथ है.

रोडशो और निवेशकों की दिलचस्पी

सरकार ने इस OFS से पहले रोडशो शुरू कर दिए हैं. इसका मकसद है-

  • बड़े-बड़े घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना.
  • LIC के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ स्टोरी को समझाना.
  • बाजार में सकारात्मक माहौल बनाना.

सरकार का बड़ा टारगेट

हर साल सरकार बजट में डिसइन्वेस्टमेंट से जुड़े टारगेट रखती है. LIC की हिस्सेदारी बिक्री उस टारगेट को पूरा करने में अहम रोल निभाएगी.

  • LIC जैसा ब्रांड निवेशकों के लिए भरोसे का नाम है.
  • OFS से होने वाली कमाई सीधा सरकार की आय को बढ़ाएगी और फिस्कल मैनेजमेंट में मदद करेगी.

नतीजा (Conclusion)

कुल मिलाकर, LIC का यह OFS सरकार और निवेशकों दोनों के लिए बड़ा मौका है.

  • सरकार को डिसइन्वेस्टमेंट का पैसा मिलेगा.
  • निवेशकों को मजबूत कंपनी में डिस्काउंट पर हिस्सा खरीदने का मौका मिलेगा.
  • बाजार में LIC के शेयरों की पकड़ और मजबूत होगी.

आने वाले महीनों में LIC से जुड़ी यह बड़ी डील बाजार में चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा बनी रहेगी.

FAQs

Q1. LIC में सरकार कितनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है?

सरकार इस साल 3% से 5% हिस्सेदारी OFS के जरिए बेच सकती है.

Q2. OFS (Offer for Sale) क्या होता है?

OFS एक प्रक्रिया है जिसमें प्रमोटर अपने शेयर स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों को बेचता है. इसमें अक्सर डिस्काउंट ऑफर भी दिया जाता है.

Q3. इस बिक्री से सरकार को कितना पैसा मिलेगा?

अनुमान है कि सरकार को इस OFS से 20,000 से 30,000 करोड़ रुपये तक की रकम मिलेगी.

Q4. निवेशकों को क्या फायदा होगा?

निवेशकों को सस्ते दाम पर LIC के शेयर खरीदने का मौका मिल सकता है और मार्केट में शेयर की लिक्विडिटी बढ़ेगी.

Q5. सरकार को हिस्सेदारी क्यों बेचनी पड़ रही है?

SEBI के नियम के मुताबिक मई 2027 तक सभी कंपनियों में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग होना जरूरी है. LIC में यह अभी 5% से कम है, इसलिए सरकार हिस्सेदारी बेच रही है.

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