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सरकारी बीमा कंपनी ने जारी किए तिमाही नतीजे (फाइल फोटो)
देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडि यानी LIC ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. कंपनी ने मार्च तिमाही में मजबूत मुनाफा दर्ज किया है. LIC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 23% बढ़कर 23,467 करोड़ रुपए हो गया. पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹19,039 करोड़ था.
कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹10 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है. इसके अलावा कंपनी 1:1 के रेश्यो से भी बोनस शेयर का ऐलान कर सकती है.
मार्च तिमाही में कंपनी की नेट प्रीमियम इनकम 12% बढ़कर 1.65 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई, जो एक साल पहले समान तिमाही में 1.48 लाख करोड़ रुपए थी. कंपनी की ग्रोथ में रिन्युएल प्रीमियम और सिंगल प्रीमियम दोनों सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा.
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फर्स्ट ईयर प्रीमियम इनकम 17% बढ़कर ₹13,009 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹11,103 करोड़ था. वहीं रिन्युअल प्रीमियम इनकम बढ़कर ₹82,233 करोड़ पहुंच गई, जो एक साल पहले ₹79,425 करोड़ थी.
सिंगल प्रीमियम कलेक्शन में भी शानदार उछाल देखने को मिला. यह 22% बढ़कर ₹70,119 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹57,694 करोड़ था.
LIC की कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश से आता है. मार्च तिमाही में इन्वेस्टमेंट से इनकम करीब 17% बढ़कर ₹1.09 लाख करोड़ हो गई. पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹93,443 करोड़ थी. कंपनी का टोटल सरप्लस भी बढ़कर ₹89,058 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹77,053 करोड़ था.
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वहीं एसोसिएट्स और माइनॉरिटी इंटरेस्ट के हिस्से के बाद सरप्लस बढ़कर ₹24,964 करोड़ पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹20,271 करोड़ था.
हालांकि तिमाही के दौरान कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली. मैनेजमेंट एक्सपेंसेस बढ़कर ₹20,699 करोड़ हो गए, जबकि पिछले साल यह ₹16,526 करोड़ थे.
एम्प्लॉय रिमुनेरेशन और वेलफेयर एक्सपेंसेस में तेज बढ़ोतरी हुई और यह ₹8,891 करोड़ पर पहुंच गए, जो पिछले साल ₹5,943 करोड़ थे. इसके अलावा अदर ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस भी बढ़कर ₹4,074 करोड़ हो गए, जो पिछले साल ₹2,848 करोड़ थे.
LIC का सॉल्वेंसी रेश्यो मार्च 2026 के अंत तक बढ़कर 2.35 हो गया, जो एक साल पहले 2.11 था. यह रेगुलेटरी जरूरतों से काफी ऊपर है और कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति को दिखाता है. वहीं एक्सपेंस मैनेजमेंट रेश्यो भी सुधरकर 12.52% हो गया, जबकि पिछले साल यह 11.15% था.
हालांकि पर्सिसटेंसी रेश्यो में थोड़ी कमजोरी देखने को मिली. कंपनी का 13वां मंथली पर्सिसटेंसी रेश्यो 67.77% रहा, जो पिछले साल 68.62% था. वहीं 61वें मंथ पर्सिसटेंसी रेश्यो घटकर 54.13% रहा, जो पहले 58.54% था.
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