जुपिटर वैगन्स की सब्सिडियरी ने साइन की 10 साल की बड़ी डील, रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट्स की करेगी सप्लाई

Jupiter Wagons की सहयोगी कंपनी JTRWF ने यूरोप की Tatravagonka के साथ 10 साल का सप्लाई एग्रीमेंट किया है. ओडिशा में बन रहे ₹3,000 करोड़ के प्लांट से रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट्स का निर्यात किया जाएगा.
जुपिटर वैगन्स की सब्सिडियरी ने साइन की 10 साल की बड़ी डील, रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट्स की करेगी सप्लाई

जुपिटर वैगन्स की सब्सिडियरी ने साइन किया लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट, स्टॉक पर रखें नजर (फाइल - AI)

रेलवे वैगन बनाने वाली देश की दिग्गज कंपनी Jupiter Wagons के स्टॉक पर शुक्रवार को नजर रखना. कंपनी की सब्सिडियरी कंपनी Jupiter Tatravagonka रेलव्हील फैक्टरी (JTRWF) ने यूरोप की बड़ी रेल वैगन निर्माता कंपनी Tatravagonka के साथ लंबी अवधि का सप्लाई एग्रीमेंट किया है. इस समझौते के तहत भारत से यूरोप को रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट्स की सप्लाई की जाएगी.

यह डील भारत के रेलवे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि अब भारत सिर्फ आयातक नहीं बल्कि रेल व्हीलसेट्स का बड़ा निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

10 साल की बड़ी डील

कंपनी के मुताबिक, यह एग्रीमेंट 10 साल के लिए किया गया है. इस डील के तहत Tatravagonka और उसकी सहयोगी कंपनियां JTRWF से रेलवे व्हील, एक्सल और व्हीलसेट खरीदेंगी. कमर्शियल सप्लाई 2027 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है.

यूरोप की यह कंपनी हर साल लगभग 20,000 से 30,000 व्हीलसेट्स का इस्तेमाल करती है, ताकि उसके रेल वैगन ऑपरेशंस चलते रहें. अब इस मांग को भारत में बनने वाले व्हीलसेट्स पूरा करेंगे.

ओडिशा में बन रहा है बड़ा प्लांट

JTRWF ओडिशा में एक ग्रीनफील्ड प्लांट बना रही है, जिसे खासतौर पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है. करीब ₹3,000 करोड़ के निवेश से बन रहे इस प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 1 लाख व्हीलसेट्स रखने की योजना है.

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कंपनी का कहना है कि लंबे समय में इस प्लांट की 40-50% क्षमता एक्सपोर्ट मार्केट के लिए इस्तेमाल की जाएगी. इसके तहत हर साल लगभग 50,000 व्हीलसेट्स यूरोपीय बाजार में एक्सपोर्ट किए जा सकते हैं.

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया ने कहा कि यह समझौता सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय रेलवे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने कहा कि भारत, जो पहले व्हीलसेट्स का आयात करता था, अब दुनिया को एक्सपोर्ट करेगा.

कंपनी का अनुमान है कि आने वाले साल में एक्सपोर्ट बिजनेस से ₹1000-1500 करोड़ तक का अतिरिक्त रेवेन्यू जुड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि यह डील ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की सफलता का बड़ा उदाहरण है.

भारत की बढ़ती वैश्विक पकड़

रेलवे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लंबे समय से यूरोप, चीन और अमेरिका की कंपनियों का दबदबा रहा है. ऐसे में भारतीय कंपनी का इस वैश्विक सप्लाई चेन में प्रवेश करना काफी अहम माना जा रहा है.

कंपनी का कहना है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी, बेहतर इंजीनियरिंग और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स की वजह से भारत अब दुनिया के बड़े रेल बाजारों की जरूरतें पूरी करने की क्षमता रखता है.

कंपनी क्या करती है?

Jupiter Wagons रेलवे और मोबिलिटी सॉल्यूशंस सेक्टर की बड़ी कंपनी है. कंपनी फ्रेट वैगन, लोकोमोटिव, व्हील, एक्सल, ब्रेक सिस्टम और कई रेलवे कंपोनेंट्स बनाती है. कंपनी के भारत में कई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और इसकी साझेदारी कई वैश्विक कंपनियों के साथ है. भारतीय रेलवे, रक्षा मंत्रालय, टाटा मोटर्स , GE और वॉल्वो आयशर जैसे बड़े ग्राहक कंपनी के क्लाइंट्स में शामिल हैं.

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