&format=webp&quality=medium)
'कॉर्पोरेट लॉ (संशोधन) विधेयक, 2026' पर विचार करने के लिए संसद की एक खास जॉइंट कमेटी (JPC) का गठन कर दिया गया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
संसद से बिजनेस जगत के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. कॉर्पोरेट जगत के नियमों को और अधिक आसान और प्रभावी बनाने के लिए लाए गए 'कॉर्पोरेट लॉ (संशोधन) विधेयक, 2026' (The Corporate Laws (Amendment) Bill, 2026) की बारीकी से जांच करने के लिए एक जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) यानी संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया है.
लोकसभा सचिवालय की तरफ से जारी बुलेटिन के अनुसार, इस समिति में लोकसभा और राज्यसभा के कई प्रमुख सांसदों को शामिल किया गया है, जो इस कानून के हर पहलू पर चर्चा करेंगे.
लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, समिति में दोनों सदनों के कुल 24 सदस्यों को शामिल करके विस्तृत जांच की जिम्मेदारी दी गई है:
लोकसभा सदस्य (21): इनमें कमलजीत सहरावत, पी पी चौधरी, तेजस्वी सूर्या, डॉ. निशिकांत दुबे, डिंपल यादव, महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं.
राज्यसभा सदस्य (3): इनमें विनोद श्रीधर तावड़े, सुजीत कुमार और जाने-माने वकील उज्ज्वल देवराव निकम को जगह दी गई है.
भारत में कोई भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पब्लिक लिमिटेड कंपनी या पार्टनरशिप फर्म (LLP) किस तरह काम करेगी, उसके लिए सरकार ने कानून बनाए हैं. इनके तहत ही कंपनियों का रजिस्ट्रेशन, उनका ऑडिट, शेयरहोल्डर्स के अधिकार और बोर्ड मीटिंग्स के नियम तय होते हैं.
समय के साथ व्यापार करने के तौर-तरीके बदले हैं (जैसे डिजिटल मीटिंग्स और ऑनलाइन फाइलिंग). इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार कुछ खास मकसद से यह नया संशोधन विधेयक, 2026 लाई है. जानिए इसकी वजहों के बारे में:
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: कानून का पालन करने वाली कंपनियों के लिए कागजी कार्रवाई और नियमों के बोझ को कम करना. इससे लोगों के लिए बिजनेस करना आसान हो जाएगा.
गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना (Decriminalisation): कई बार कंपनियों से छोटी-मोटी तकनीकी या कागजी गलतियां हो जाती हैं, जिसके लिए अभी तक जेल या आपराधिक मुकदमे का नियम था. नए बिल में इन छोटे अपराधों को सिविल कैटेगरी में डालकर केवल आर्थिक जुर्माना (Monetary Fine) लगाने का प्रस्ताव है.
डिजिटल और हाइब्रिड मीटिंग्स: अब कंपनियां अपनी सालाना आम बैठकें (AGM) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हाइब्रिड मोड में भी कर सकेंगी, हालांकि 3 साल में एक बार फिजिकल बैठक करना जरूरी होगा.
CSR के नियमों में ढील: कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत समाज सेवा पर खर्च करने की नेट प्रॉफिट सीमा को ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है, जिससे छोटी कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी.
छोटे उद्योगों को बढ़ावा: छोटी कंपनियों के लिए ऑडिट के नियमों को आसान बनाया जा रहा है ताकि वे बिना किसी बड़ी कानूनी उलझन के अपना काम बढ़ा सकें.
संसद द्वारा इस महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट संशोधन बिल को जॉइंट कमेटी (JPC) के पास भेजना एक सराहनीय कदम है. यह कमेटी कॉर्पोरेट जगत के विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और सभी हितधारकों से बातचीत करके यह सुनिश्चित करेगी कि नया कानून देश में व्यापार को बढ़ाने में मददगार साबित हो और साथ ही वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के सुरक्षा इंतजाम भी मजबूत रहें. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद इस बिल को अंतिम मंजूरी के लिए दोबारा संसद में पेश किया जाएगा.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)