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ITC, Godfrey Philips ने बढ़ाए सिगरेट के दाम. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
ITC, Godfrey Philips Share Price: सिगरेट कंपनियों ITC Limited और Godfrey Phillips India की ओर से बड़ी खबर सामने आई है. दोनों कंपनियों ने अपने कुछ लोकप्रिय सिगरेट ब्रांड्स की कीमतों में बढ़ोतरी की है. माना जा रहा है कि यह फैसला बढ़ती इनपुट कॉस्ट और सरकार की नई एक्साइज ड्यूटी के असर को संतुलित करने के लिए लिया गया है.
COGENCIS के हवाले से खबर है कि ITC Gold Flake की कीमत बढ़ाकर ₹13-14/स्टिक करेगी. Wills Navy Cut की कीमत जून-जुलाई में दोबारा बढ़ाएगी. स्टॉक क्लियरेंस के कारण ITC Flake की सप्लाई पर असर पड़ रहा है. मई-जून में Silk Cut की कीमत ₹8/स्टिक बढ़ाने पर विचार हो रहा है.
इस खबर के बाद सिगरेट सेक्टर के शेयरों पर बाजार की नजर बढ़ गई है. खासतौर पर यह समझने की बात है कि क्या अब सिगरेट कंपनियों का मुश्किल दौर खत्म हो रहा है और क्या आने वाले समय में इनके मार्जिन बेहतर हो सकते हैं.
हालांकि, मंगलवार के सत्र में ITC और Godfrey Philips जैसे शेयरों में हल्की बढ़त ही दिख रही थी. ITC Share Price 0.77% की तेजी के साथ 312 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, Godfrey Philips शेयर प्राइस 1.2% की तेजी के साथ 2,343 रुपये के भाव पर था.
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कुछ और रिपोर्ट्स के मुताबिक Godfrey Phillips ने Marlboro Pocket Pack की कीमत 70 रुपये से बढ़ाकर 85 रुपये कर दी है. यानी इसमें करीब 21% की बढ़ोतरी हुई है.
वहीं ITC ने Gold Flake Superstar की कीमत 70 रुपये से बढ़ाकर 79 रुपये कर दी. इन प्रोडक्ट्स का कंपनियों की कुल बिक्री में करीब 8% से 12% हिस्सा माना जाता है.
| कंपनी | ब्रांड | पुरानी कीमत | नई कीमत |
| Godfrey Phillips | Marlboro Pocket Pack | ₹70 | ₹85 |
| ITC | Gold Flake Superstar | ₹70 | ₹79 |
1 फरवरी 2026 से सरकार ने सिगरेट पर लंबाई के हिसाब से अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लागू की थी. यानी अब सिगरेट जितनी लंबी होगी, उस पर टैक्स का असर उतना ज्यादा पड़ेगा.
नई टैक्स व्यवस्था के बाद कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा. इसके अलावा तंबाकू, पैकेजिंग और दूसरे इनपुट कॉस्ट भी बढ़े हैं. ऐसे में कंपनियों ने मार्जिन बचाने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता चुना. एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियां हर स्टिक पर करीब 2 से 7 रुपये तक कीमत बढ़ा रही हैं.
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मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि Godfrey Phillips की कीमत बढ़ोतरी बाजार अनुमान से ज्यादा रही है. बाजार को करीब 17% प्राइस हाइक की उम्मीद थी, लेकिन कंपनी ने उससे ज्यादा बढ़ोतरी की.
इसका मतलब यह माना जा रहा है कि कंपनी बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल हो रही है. इससे आगे मार्जिन पर दबाव कम हो सकता है.
एनालिस्ट्स का मानना है कि पिछले कुछ सालों से टैक्स बढ़ोतरी और लागत दबाव की वजह से सिगरेट कंपनियां मुश्किल दौर से गुजर रही थीं. लेकिन अब अगले दो साल तक बड़े टैक्स बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है.
ऐसे में कंपनियों को प्राइसिंग पावर का फायदा मिल सकता है. एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि पहले जिस तरह सिगरेट वॉल्यूम में डबल डिजिट गिरावट की आशंका जताई जा रही थी, वह अब कम हो सकती है.
हालांकि तस्वीर पूरी तरह आसान नहीं है. महंगाई की वजह से उपभोक्ता खर्च को लेकर सतर्क बने हुए हैं. लोग जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं और गैर-जरूरी चीजों पर खर्च सीमित कर रहे हैं. ऐसे में कीमतें बढ़ने से कुछ ग्राहक सस्ती ब्रांड्स या अवैध सिगरेट बाजार की तरफ भी जा सकते हैं. इससे कंपनियों के वॉल्यूम पर दबाव आ सकता है.
यानी कंपनियों के लिए यह बैलेंस बनाए रखना जरूरी होगा कि वे मार्जिन भी बचाएं और ग्राहक भी न खोएं.
सिगरेट कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी प्राइसिंग पावर मानी जाती है. अगर कंपनियां बढ़ी लागत को ग्राहकों तक सफलतापूर्वक पहुंचाती रहती हैं, तो इससे उनकी कमाई को सपोर्ट मिल सकता है.
हालांकि निवेशकों को वॉल्यूम ग्रोथ, टैक्स नीति और उपभोक्ता मांग पर नजर बनाए रखनी होगी. आने वाले कुछ तिमाहियों में यह साफ होगा कि कंपनियां कीमत बढ़ोतरी के बावजूद बिक्री को कितना संभाल पाती हैं.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 सिगरेट कंपनियां कीमतें क्यों बढ़ाती हैं?
आमतौर पर इनपुट कॉस्ट बढ़ने, टैक्स में बदलाव और मार्जिन बचाने के लिए कंपनियां कीमतें बढ़ाती हैं.
Q2 एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का कंपनियों पर क्या असर पड़ता है?
एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है.
Q3 क्या कीमत बढ़ने से सिगरेट की बिक्री घट सकती है?
हां, ज्यादा कीमतों की वजह से कुछ ग्राहक सस्ते ब्रांड्स या कम खपत की तरफ जा सकते हैं.
Q4 सिगरेट कंपनियों के शेयरों पर ऐसी खबरों का क्या असर होता है?
अगर बाजार को लगता है कि कंपनियां लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं, तो इसे शेयरों के लिए पॉजिटिव माना जाता है.
Q5 निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
निवेशकों को टैक्स नीति, वॉल्यूम ग्रोथ, मार्जिन और उपभोक्ता मांग जैसे फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए.