आपका फेवरेट साबुन-शैम्पू हुआ महंगा, इस दिग्गज FMCG कंपनी ने दिया बड़ा झटका, जानिए कितना पड़ेगा असर

HUL ने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है. कंपनी अपने साबुन और शैम्पू की रेंज की कीमत को बढ़ा दिया है. आने वाले समय में ये महंगे हो जाएंगे. जानें आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा?
आपका फेवरेट साबुन-शैम्पू हुआ महंगा, इस दिग्गज FMCG कंपनी ने दिया बड़ा झटका, जानिए कितना पड़ेगा असर

HUL का झटका, ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर (फोटो- एचयूएल)

HUL Stock: देश की दिग्गज FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड ने ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने साबुन और शैम्पू की कीमतों को बढ़ाने का फैसला किया है. देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में शामिल Hindustan Unilever Limited (HUL) ने अपने कई लोकप्रिय साबुन ब्रांड्स के दाम बढ़ा दिए हैं. कंपनी ने यह फैसला कच्चे माल और पैकेजिंग की बढ़ती लागत के दबाव में लिया है.

HUL ने अपने प्रमुख साबुन ब्रांड्स जैसे- Liril, Pears और Dove की कीमतों में ₹2 से ₹3 प्रति 100 ग्राम तक की बढ़ोतरी की है. यह बढ़ोतरी करीब 3% से 5% के बीच बैठती है.

5 प्वाइंट्स में समझें पूरी बात

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HUL

कौन-कौन से साबुन हुए महंगे?

अब Liril का 100 ग्राम साबुन ₹41 में मिलेगा, जो करीब 5.13% महंगा हो गया है. वहीं Pears की कीमत 4% बढ़कर ₹52 हो गई है. Dove के अलग-अलग वैरिएंट्स में भी बढ़ोतरी हुई है. Dove Serum (White) अब ₹60 और Dove Pink ₹70 प्रति 100 ग्राम पर पहुंच गया है.

सिर्फ साबुन ही नहीं, बल्कि शैंपू की कीमतों में भी 4-6% तक बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऐसे में पर्सनल केयर से जुड़े प्रोडक्ट्स की कुल लागत उपभोक्ताओं के लिए बढ़ने वाली है.

कंपनी ने जारी किया बयान

कंपनी की ओर ये इस मामले पर बयान आया है. कंपनी ने कहा कि कच्चे तेल, पाम ऑयल और प्लास्टिक जैसी कमोडिटी में बढ़ती महंगाई को देखते हुए हम अपने पोर्टफोलियो में चुनिंदा तौर पर कीमतों में बढ़ोतरी कर रहे हैं. कीमतों में कोई भी बदलाव करते समय हम हमेशा इस बात का ध्यान रखते हैं कि उपभोक्ताओं के लिए प्राइस और वैल्यू का संतुलन बना रहे.

कंपनी ने क्यों बढ़ाई कीमतें?

इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे माल की महंगाई है. खासतौर पर Palm Fatty Acid Distillate (PFAD) की कीमतों में तेज उछाल आया है, जो साबुन बनाने का एक अहम कच्चा माल है. सप्लाई की कमी और पाम ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण PFAD महंगा हुआ है.

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इसके अलावा, केमिकल इनपुट्स की कीमतें भी बढ़ी हैं. वेस्ट एशिया में जारी तनाव के चलते सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, जिससे फ्रेट और एनर्जी कॉस्ट भी बढ़ी है. इसका सीधा असर FMCG कंपनियों की लागत पर पड़ा है.

पैकेजिंग कॉस्ट भी बढ़ी

पैकेजिंग कॉस्ट भी इस बार बड़ा फैक्टर बनकर सामने आई है. इंडस्ट्री के मुताबिक, पेपर, प्लास्टिक और लैमिनेट्स की कीमतों में 15% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है. यानी प्रोडक्ट बनाने के साथ-साथ उसे पैक करने की लागत भी काफी बढ़ गई है.

दरअसल, साबुन HUL के लिए एक बेहद अहम सेगमेंट है. पर्सनल केयर कैटेगरी में साबुन का हिस्सा करीब 90% है. यह सेगमेंट कंपनी को 17-18% तक EBIT मार्जिन देता है. वहीं, कुल रेवेन्यू में भी साबुन कैटेगरी का योगदान करीब 15-18% तक है.

कंपनी के मुनाफे पर असर

इसका मतलब साफ है कि साबुन की कीमतों में बदलाव का असर कंपनी के बिजनेस और मुनाफे दोनों पर पड़ता है. यही वजह है कि कंपनी ने बढ़ती लागत के बीच कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है.

आने वाले समय में अगर कच्चे माल की कीमतों में राहत नहीं मिलती है, तो FMCG सेक्टर में और भी प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं. फिलहाल, ग्राहकों को अपने डेली यूज प्रोडक्ट्स के लिए थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 किन प्रोडक्ट्स के दाम बढ़े हैं?

Liril, Pears और Dove साबुन महंगे हुए हैं.

Q2 कितनी बढ़ोतरी हुई है?

₹2–₹3 प्रति 100 ग्राम (करीब 3–5%).

Q3 दाम क्यों बढ़े हैं?

कच्चे माल और पैकेजिंग की लागत बढ़ने से.

Q4 क्या शैंपू भी महंगे होंगे?

हां, 4–6% तक बढ़ सकते हैं.

Q5 HUL के लिए साबुन कितना अहम है?

पर्सनल केयर सेगमेंट का करीब 90% हिस्सा.