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सवालों के घेरे में NARCL (प्रतीकात्मक/AI/Gemini)
जब प्राइवेट कंपनियां करें तो चोरी, लेकिन जब सरकारी कंपनी ही अनदेखी करे तो उसे क्या कहेंगे. एक सरकारी कंपनी सवालों के घेरे में है, जिसकी वजह से पब्लिक मनी का 1600 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया. जी हां, 1600 करोड़ रुपये. एक सरकारी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने बगैर प्राइस डिस्कवरी किए उसी डिफॉल्टर कंपनी को ही लोन सेटल कर दिया. सरकारी व्यवस्था में हर चीज की बिडिंग होती है. लेकिन सरकारी कंपनी ने बिडिंग करवाने की जहमत नहीं उठाई और इससे जनता के पैसे का नुकसान हुआ. जी न्यूज की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (SIT) के हाथ लगे एक्सक्लूसिव दस्तावेजों में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.
इस पूरे मामले के केंद्र में Agson Global Pvt Ltd नाम की कंपनी है. इस कंपनी ने कई बैंकों के एक समूह से हजार करोड़ रुपए का लोन लिया था. जब कंपनी यह लोन चुकाने में नाकाम रही, तो अकाउंट बट्टे खाते यानी एनपीए हो गया.
NARCL को ट्रांसफर हुआ कर्ज
NARCL एक तरह से फंसे हुए लोन की रिकवरी का प्लेटफॉर्म है, जहां बैंकों के फंसे हुए बड़े लोन के लिए रिजॉल्यूशन प्लान लाए जाते हैं. ZEE MEDIA के पास मौजूद डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक NARCL को 2,172 करोड़ रुपये रिकवर करने थे.
1600 करोड़ रुपए का नुकसान
सरकारी व्यवस्था में हर चीज की बोली (बिडिंग) लगती है, लेकिन NARCL ने लोन सेटलमेंट के लिए कोई प्राइस डिस्कवरी की ही नहीं है. अगर बोली लगवाई जाती, तो संभव था कि 579 करोड़ की जगह कोई दूसरा बिडर 1000 से 1500 करोड़ रुपए की बोली लगाता.
कंपनी के पास थी 30 एकड़ जमीन, 300 करोड़ का इंश्योरेंस क्लेम
अभी तक आरोप लगते थे कि प्राइवेट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियां लोन सेटलमेंट के दौरान धांधली करती हैं और इसीलिए सरकारी कंपनी NARCL का गठन करीब 3 साल पहले किया गया था, लेकिन इस बार सरकारी एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ही सवालों के घेरे में है. NARCL के लोन सेटलमेंट से जुड़ा एक और खुलासा बहुत जल्द करेंगे.
परिवेश वात्स्यायन, स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम, जी मीडिया