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HDFC Bank ने पेश किए दमदार Q4 नतीजे!
देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक, HDFC Bank ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक ने न सिर्फ मुनाफे में अपनी बादशाहत बरकरार रखी है, बल्कि अपने शेयरहोल्डर्स के लिए डिविडेंड की भी झड़ी लगा दी है.
लागत के दबाव और बाजार की चुनौतियों के बावजूद बैंक ने अपनी बैलेंस शीट को जिस मजबूती से संभाला है, वह बैंकिंग सेक्टर के लिए एक मिसाल है. अगर आप इस बैंक के निवेशक हैं या बैंकिंग सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो ये आंकड़े आपके चेहरे पर चमक ला सकते हैं.
बैंक के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹13 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है. अगर इसमें ₹2.5 के अंतरिम डिविडेंड को भी जोड़ दिया जाए, तो पूरे साल का कुल डिविडेंड ₹15.5 प्रति शेयर हो जाता है.
| पैरामीटर | Q4 FY26 की स्थिति | सालाना बढ़त (YoY) |
| नेट रेवेन्यू | ₹462.8 बिलियन | 5.0% |
| नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) | ₹330.8 बिलियन | 3.2% |
| शुद्ध मुनाफा (PAT) | ₹192.2 बिलियन | 9.1% |
| ग्रॉस NPA | 1.15% | स्थिर |
| नेट NPA | 0.38% | मजबूत |
पूरे वित्त वर्ष (Full-Year FY26) की बात करें तो बैंक का शुद्ध मुनाफा ₹746.7 बिलियन रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 10.6% ज्यादा है. बैंक का कुल रेवेन्यू भी बढ़कर ₹1,912.2 बिलियन पर पहुंच गया है. यह दिखाता है कि बैंक की कमाई की रफ्तार सुस्त नहीं पड़ी है.
किसी भी बैंक की असली ताकत उसके पास जमा पैसा और उसके द्वारा दिया गया लोन होता है. HDFC Bank ने इन दोनों ही मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन किया है. बैंक का कुल डिपॉजिट ₹43,649 बिलियन पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह ₹39,102 बिलियन था. यानी लोग बैंक पर दिल खोलकर भरोसा कर रहे हैं.
वहीं, बैंक ने लोन देने के मामले में 12% की ग्रोथ दिखाई है. कुल एडवांस अब ₹26,060 बिलियन हो गए हैं. बैंक का चालू खाता और बचत खाता (CASA) डिपॉजिट ₹9,184 बिलियन रहा, जो 10.8% की बढ़त दिखाता है.
बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा डर इस बात का होता है कि कहीं दिया हुआ पैसा डूब न जाए (NPA). लेकिन HDFC Bank ने यहां भी बाजी मारी है. बैंक का ग्रॉस NPA 1.15% पर स्थिर है, जो पूरे सेक्टर में सबसे बेहतरीन आंकड़ों में से एक है.
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बैंक का नेट NPA महज 0.38% है और क्रेडिट कॉस्ट रेशियो भी 0.35% के निचले स्तर पर बना हुआ है. इसका सीधा मतलब यह है कि बैंक लोन बांटते वक्त बहुत सावधानी बरत रहा है और उसका रिस्क मैनेजमेंट बहुत तगड़ा है.
जहां एक तरफ कमाई बढ़ी है, वहीं बैंक के खर्चों (Operating Expenses) में भी 17.5% की बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह से कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो 39.9% पर पहुंच गया है. बैंक लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, नए आउटलेट्स खोल रहा है, जिसकी वजह से ये खर्चे बढ़े हैं.
HDFC Bank का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) 19.7% है, जो इसे बेहद सुरक्षित और भविष्य की ग्रोथ के लिए तैयार बनाता है. बैंक ने आगे के विस्तार के लिए बॉन्ड्स (AT1, Tier II और इंफ्रा बॉन्ड्स) के जरिए ₹60,000 करोड़ जुटाने की मंजूरी भी दे दी है.
मैनेजमेंट का लहजा 'सावधानी के साथ सकारात्मक' (Cautiously Positive) रहा है. मैनेजमेंट का कहना है कि बैंक का फोकस टिकाऊ ग्रोथ पर है. भले ही अभी खर्च थोड़े ज्यादा दिख रहे हों, लेकिन यह भविष्य के लिए किए जा रहे निवेश का हिस्सा है.
बैंक अब ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में अपनी पकड़ और मजबूत करने जा रहा है. उनके पास बैंकिंग आउटलेट्स का नेटवर्क अब 9,689 से ज्यादा हो गया है और एटीएम की संख्या 21,000 पार कर चुकी है.
कुल मिलाकर, HDFC Bank के Q4 नतीजे एक संतुलित और मजबूत कहानी बयां करते हैं. जहाँ एक तरफ खर्चों में बढ़त और ट्रेजरी इनकम में कमी थोड़ी चिंता की बात लग सकती है, वहीं दूसरी तरफ बैंक की एसेट क्वालिटी, डिपॉजिट ग्रोथ और तगड़ा डिविडेंड निवेशकों का हौसला बढ़ाने के लिए काफी है. बैंकिंग सेक्टर के इस 'हाथी' ने दिखा दिया है कि वह मुश्किल वक्त में भी अपनी चाल को स्थिर और मजबूत रख सकता है.