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जाने वाले HDFC बैंक के अंदरूनी हालात कुछ ठीक नहीं लग रहे हैं. बैंक ने एक सख्त कदम उठाते हुए अपने ब्रांच बैंकिंग के सबसे बड़े चेहरों में से एक, संपथ कुमार को नौकरी से निकाल दिया है.
यह सब तब हो रहा है जब बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने महज कुछ दिन पहले ही अपने पद से यह कहकर इस्तीफा दे दिया था कि बैंक के कुछ तौर-तरीके उनके सिद्धांतों (Ethics) से मेल नहीं खाते. आइए, इस पूरे ड्रामे को और 'क्रेडिट सुइस' के उन बॉन्ड्स की कहानी को आसान भाषा में समझते हैं जिन्होंने बैंक में यह आग लगाई है.
संपथ कुमार HDFC बैंक में ग्रुप हेड - रिटेल ब्रांच बैंकिंग के पद पर थे. उन पर गंभीर आरोप लगे हैं:
गलत जानकारी देकर बेचना (Mis-selling): इन पर आरोप है कि इन्होंने ग्राहकों, खासकर NRI (अनिवासी भारतीयों) को क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) के हाई-रिस्क वाले AT-1 बॉन्ड्स यह कहकर बेचे कि ये फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तरह सुरक्षित हैं.
धोखाधड़ी के आरोप: कुछ ग्राहकों ने दावा किया है कि बैंक अधिकारियों ने उनसे खाली कागजों पर दस्तखत करवाए और उनके FCNR (विदेशी मुद्रा) डिपॉजिट को बिना सही जानकारी दिए इन रिस्की बॉन्ड्स में डाल दिया.
EVP हर्ष गुप्ता और SVP पायल मंध्यान भी बर्खास्त हुए हैं. हर्ष गुप्ता और पायल मंध्यान पर एक्टिव मिस-सेलिंग का आरोप है. निवेशकों का आरोप है कि AT-1 बॉन्ड को Fixed Maturity और Assured Return प्रोडक्ट बताकर बेचा गया.
DIFC (Dubai International Financial Centre) वेबसाइट के मुताबिक दोनों की वर्क ऑथराइजेशन भी वापस ले ली गई है. DFSA (Dubai Financial Services Authority) ने सितंबर में HDFC बैंक को DIFC ब्रांच से नए क्लाइंट जोड़ने से रोका था. मामले पर HDFC बैंक की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है.
AT-1 (Additional Tier-1) बॉन्ड्स को बैंकिंग की दुनिया में बहुत 'खतरनाक' माना जाता है.
पर्पेचुअल बॉन्ड्स: इन बॉन्ड्स की कोई मैच्योरिटी तारीख नहीं होती. अगर बैंक संकट में आता है, तो वह इन बॉन्ड्स को 'जीरो' (Write-off) कर सकता है, यानी निवेशकों का पूरा पैसा डूब सकता है.
क्रेडिट सुइस संकट: मार्च 2023 में जब क्रेडिट सुइस बैंक डूबा, तो वहां करीब 20 बिलियन डॉलर के AT-1 बॉन्ड्स को खत्म कर दिया गया. जिन लोगों ने HDFC बैंक के जरिए ये बॉन्ड्स खरीदे थे, उनका पैसा फंस गया और उन्होंने बैंक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
इस पूरी कार्रवाई की जड़ें चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से जुड़ी हैं. उन्होंने 17 मार्च 2026 को पद छोड़ते हुए कहा कि बैंक की कुछ प्रैक्टिस उनके सिद्धांतों के खिलाफ हैं.
चेयरमैन का निर्देश: बताया जा रहा है कि चक्रवर्ती के निर्देश पर ही इस मामले की जांच शुरू हुई थी. उनकी विदाई के बाद बैंक ने तुरंत इन अधिकारियों को बर्खास्त कर जवाबदेही तय करने की कोशिश की है.
मार्केट का हाल: इस उथल-पुथल के कारण दो दिनों में HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई.
बैंक ने अब केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया है ताकि निवेशकों का भरोसा दोबारा जीता जा सके. लेकिन संपथ कुमार जैसे बड़े लेवल के अधिकारी का जाना यह बताता है कि बैंक के अंदर गवर्नेंस (Governance) को लेकर काफी बड़ी समस्याएं रही हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नजर भी इस पूरे मामले पर बनी हुई है.
HDFC बैंक का यह मामला हर उस इंसान के लिए एक सबक है जो बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर (RM) की बातों में आकर कहीं भी पैसा लगा देता है. बैंक ने सख्त कार्रवाई तो की है, लेकिन निवेशकों का जो भरोसा और पैसा डूबा है, उसकी भरपाई करने में काफी समय लगेगा. अगर आपका भी HDFC बैंक में खाता है या आपने वहां से कोई निवेश किया है, तो अपने पोर्टफोलियो को एक बार जरूर चेक कर लें.
1- संपथ कुमार कौन थे?
वे HDFC बैंक में रिटेल ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड थे और बैंक के दक्षिण और पश्चिम क्षेत्र का बड़ा कार्यभार संभालते थे.
2- क्या ग्राहकों का पैसा वापस मिलेगा?
क्रेडिट सुइस के AT-1 बॉन्ड्स का मामला अभी कानूनी दांव-पेंच में फंसा है. बैंक ने अधिकारियों को निकाला है, लेकिन पैसा वापसी पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
3- मिस-सेलिंग (Mis-selling) क्या होती है?
जब बैंक अधिकारी किसी रिस्की प्रोडक्ट को सुरक्षित बताकर ग्राहक को गलत तरीके से बेचते हैं, तो उसे मिस-सेलिंग कहते हैं.
4- अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा क्यों दिया?
उन्होंने "नैतिक चिंताओं" और "निजी मूल्यों" का हवाला दिया है, जो बैंक की कुछ मौजूदा कार्यप्रणालियों से मेल नहीं खा रहे थे.
5- क्या HDFC बैंक अब सुरक्षित है?
HDFC बैंक भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है और आर्थिक रूप से मजबूत है, लेकिन इस घटना ने बैंक के आंतरिक मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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