भारत में Rare Earth Manufacturing की बड़ी छलांग: ₹7280 करोड़ की PLI स्कीम को मिली कैबिनेट की मंजूरी, कल इन शेयरों पर रखें नजर

Rare Earth PLI Scheme: प्रस्तावित PLI स्कीम की अवधि 7 वर्ष होगी और इसके तहत 6000 Metric Tonnes वार्षिक उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है. इसका उद्देश्य भारत में Rare Earth Magnets के लिए एक इंटीग्रेटेड स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है.
भारत में Rare Earth Manufacturing की बड़ी छलांग: ₹7280 करोड़ की PLI स्कीम को मिली कैबिनेट की मंजूरी, कल इन शेयरों पर रखें नजर

 

Rare Earth PLI Scheme: भारत में Rare Earth Permanent Magnets की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. ज़ी बिज़नेस कि खबर पर मुहर लग गई है. बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में 7280 करोड़ रुपये की Rare Earth Manufacturing Incentive Scheme को मंजूरी मिल गई है.

रेयर अर्थ मैगनेट स्कीम के जरिए 6 हज़ार मीट्रिक टन प्रति साल का कैपेसिटी बनाई जाएगी. इस स्कीम को सात साल के लिए चलाया जाएगा. कुल निवेश 7,280 करोड़ का किया जाएगा. 5 यूनिट जो 1200 यूनिट MTPA की बनाई जाएगी. अगले 2-3 साल में रेयर अर्थ का प्लान शुरू हो जाएगा.

स्कीम का उद्देश्य हाई-टेक इंडस्ट्रीज़ जैसे EV, डिफेंस, विंड टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस के लिए जरूरी Rare Earth Magnets की स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग चेन तैयार करना है. इस स्कीम के सफल होने पर भारत न केवल Rare Earth Magnets की विदेशी निर्भरता से बाहर निकल सकेगा, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में अहम जगह भी हासिल कर सकता है.

स्कीम की मुख्य बातें

  • 6,000 MTPA की REPM उत्पादन क्षमता देश में विकसित की जाएगी.
  • ऑटोमोबाइल, डिफेंस, एयरस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए सप्लाई चेन मजबूत होगी.
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान और Net Zero 2070 लक्ष्य को सहयोग मिलेगा.
  • कुल वित्तीय आवंटन ₹7,280 करोड़, जिसमें:
  • ₹6,450 करोड़ सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव (5 वर्ष)
  • ₹750 करोड़ कैपिटल सब्सिडी
  • स्कीम की कुल अवधि 7 वर्ष-2 वर्ष सेटअप अवधि + 5 वर्ष इंसेंटिव डिस्बर्समेंट.
  • 5 कंपनियों को ग्लोबल बिडिंग प्रक्रिया के जरिए मौका मिलेगा; हर कंपनी को 1,200 MTPA तक क्षमता आवंटित की जा सकती है.

इस स्कीम की जरूरत क्यों?

भारत में REPM का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूएबल एनर्जी, इंडस्ट्रियल एप्लिकेशन और डिफेंस में. फिलहाल भारत अपनी ज़रूरत का लगभग पूरा REPM आयात करता है, जबकि चीन इस बाजार पर सबसे ज़्यादा नियंत्रण रखता है. यह स्कीम भारत की पहली इंटीग्रेटेड REPM मैन्युफैक्चरिंग स्थापित करेगी और इस क्षेत्र में रोजगार व तकनीकी विकास को बढ़ावा देगी.

PLI Scheme की अहम बातें

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित PLI स्कीम की अवधि 7 वर्ष होगी और इसके तहत 6000 Metric Tonnes वार्षिक उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है. इसका उद्देश्य भारत में Rare Earth Magnets के लिए एक इंटीग्रेटेड स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है. वित्त मंत्रालय की एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी पहले ही स्कीम को मंजूरी दे चुकी है, इसलिए कैबिनेट अप्रूवल अब अंतिम औपचारिकता जैसा माना जा रहा है.

कौन-कौन सी कंपनियां दिखा चुकी हैं दिलचस्पी?

इस योजना में भारत की कई बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी जताई है. इनमें शामिल हैं: GMDC, Sona Comstar, Bharat Forge और
JSW Group. इनमें से बड़े प्लेयर्स Rare Earth के Production, Processing और Magnet Manufacturing के लिए रणनीतिक निवेश करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं.

लाइसेंस अलॉटमेंट और इंडस्ट्री लैंडस्केप

अक्टूबर में सरकार ने Rare Earth Magnets के इंपोर्ट लाइसेंस चार कंपनियों को दिए थे. इन्हें बिजली उत्पादन, ऑटो कंपोनेंट्स और डिफेंस सेक्टर में Magnet Supply बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा. Continental India DE Diamond, Hitachi और Jay Ushin के पास लाइसेंस हैं. इन लाइसेंसों का उद्देश्य अंतरिम जरूरत को पूरा करना है, जबकि PLI स्कीम के लागू होने के बाद घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जाएगा.

भारत में Rare Earth Resource vs Production Gap

Rare Earth Elements (REEs) की मौजूदगी के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है. देश में 6.9 मिलियन Metric Tonnes Rare Earth Reserves उपलब्ध हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर उत्पादन काफी कम है. 2024 में भारत सिर्फ 2900 टन का उत्पादन कर पाया, जो रियल डिमांड के मुकाबले बेहद कम है. इसलिए भारत को अपनी इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन जरूरतों के लिए भारी मात्रा में इम्पोर्ट करना पड़ता है.

चीन का दबदबा और चीन पर दुनिया की निर्भरता

रेयर अर्थ मैग्नेट्स का ग्लोबल मार्केट चीन के नियंत्रण में है. चीन के पास Rare Earth Mining की 60% क्षमता और Refining व Processing की 90% क्षमता है. इसी कारण EV, Defence, Aerospace, Medical और Wind Energy Industries पूरी तरह China-dominant सप्लाई चेन पर आधारित हैं. इस PLI स्कीम का सबसे बड़ा उद्देश्य इस निर्भरता को कम करके भारत को क्रिटिकल मिनरल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है.

क्या है रणनीतिक महत्व?

Rare Earth Permanent Magnets का उपयोग इन क्षेत्रों में होता है-

  • Electric Vehicles (Motor & Powertrain)
  • Wind Turbines
  • Semiconductors
  • Satellites & Defence Missiles
  • Robotics & Aerospace
  • Consumer Electronics (Mobiles, Laptops, AC Compressors)

भारत की EV इंडस्ट्री 2030 तक 7.5 मिलियन यूनिट उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है, ऐसे में रेयर अर्थ मैग्नैट की मांग तेजी से बढ़ने वाली है.

किन शेयरों पर होगी नजर?

स्कीम के चलते GMDC, Sona BLW Precision (Sona Comstar), Bharat Forge, JSW Steel जैसे स्टॉक्स निवेशकों के फोकस में सकते हैं. GMDC Rare Earth Mining में और Sona Comstar EV Drivetrain Magnets में बढ़ती भूमिका निभा सकती है. Bharat Forge Defence और Strategic Components में बड़ा बेनेफिशियरी बन सकता है.

निष्कर्ष

भारत Rare Earth पर चीन की प्रभुत्व वाली सप्लाई चेन से निकलने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. 7300 करोड़ रुपये की PLI स्कीम न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि उच्च तकनीक व रक्षा उद्योगों में आत्मनिर्भरता स्थापित करने में मददगार बनेगी. यह योजना भारत को Critical Mineral Powerhouse बनाने की शुरुआत हो सकती है. तेज निवेश संभावनाओं को देखते हुए संबंधित सेक्टर्स में कैपिटल फ्लो बढ़ने की संभावना भी मजबूत हो गई है.

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