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डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि Essel Group ने हमेशा नए रास्ते बनाने की कोशिश की. (फाइल फोटो)
“कई बार लगा सब खत्म हो जाएगा… लेकिन हर बार हम फिर खड़े हुए.” Essel Group के 100 साल पूरे होने पर चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने जब यह बात कही, तो उसमें सिर्फ एक बिजनेसमैन का अनुभव नहीं था, बल्कि एक पूरी सदी की कहानी छिपी थी.
21 मई 2026 को Essel Group ने अपने 100 साल पूरे किए. इस खास मौके पर आयोजित टाउनहॉल में डॉ. सुभाष चंद्रा ने उस सफर को याद किया, जिसमें कारोबार भी था, संघर्ष भी… बड़े फैसले भी थे और भावनाएं भी.
उन्होंने साफ कहा कि Essel Group की कहानी सिर्फ कंपनियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह भरोसे, रिश्तों, जोखिम लेने की हिम्मत और लगातार आगे बढ़ते रहने की कहानी है.
Essel Group की शुरुआत 1926 में हुई थी.
जगन्नाथ गोयनका ने अपने भाइयों के साथ हरियाणा के आदमपुर मंडी से grain trading business शुरू किया था. उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही छोटा कारोबार आगे चलकर मीडिया, एंटरटेनमेंट, पैकेजिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी जैसे बड़े सेक्टर्स तक पहुंचेगा.
शुरुआत में कारोबार का नाम था: Messrs Ramgopal Indraprasad
फिर समय के साथ यह “Subhash Chandra Laxmi Narain” यानी “SL” बना और आगे चलकर “Essel” नाम पूरी दुनिया में पहचान बन गया.
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डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि Essel Group ने हमेशा नए रास्ते बनाने की कोशिश की.
उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत में private satellite television का दौर शुरू भी नहीं हुआ था, तब Zee TV लॉन्च किया गया.
1992 में शुरू हुआ Zee TV सिर्फ एक चैनल नहीं था. उसने भारतीय टीवी इंडस्ट्री का पूरा ढांचा बदल दिया. उस समय मनोरंजन लगभग Doordarshan तक सीमित था. Zee ने पहली बार private entertainment को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया.
इसके बाद:
जैसे प्लेटफॉर्म आए और Essel Group भारतीय मीडिया इंडस्ट्री का बड़ा नाम बन गया.
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डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि कारोबार में financial growth जरूरी होती है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए भरोसा सबसे अहम चीज होती है.
उन्होंने माना कि 100 साल का सफर आसान नहीं था.
Group ने कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे:
लेकिन हर दौर में Group ने खुद को बदलने की कोशिश की.
आज Essel Group और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स की मौजूदगी दुनिया के 190 से ज्यादा देशों तक है. Group का कारोबार कई सेक्टर्स में फैला हुआ है:
Group से जुड़े हजारों लोग दुनिया भर में काम कर रहे हैं.
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डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि Zee ने सिर्फ टीवी चैनल नहीं बनाए, बल्कि भारत की मीडिया भाषा बदल दी.
पहली बार:
आज:
जैसे प्लेटफॉर्म करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं.
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डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि Essel Group ने अपने सफर में कई कठिन दौर देखे.
उन्होंने माना कि कुछ समय ऐसे भी आए जब लोगों ने Group को खत्म मान लिया था. लेकिन हर संकट के बाद वापसी हुई.
उनके मुताबिक:
“Business सिर्फ profit और loss का नाम नहीं है. असली बात यह है कि मुश्किल समय में आप कितनी मजबूती से खड़े रहते हैं.”
Essel Group की शुरुआत पारिवारिक कारोबार के तौर पर हुई थी. लेकिन समय के साथ यह professionally managed structure में बदला.
आज Group की अलग-अलग कंपनियां:
जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं.
डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि कारोबार सिर्फ balance sheet से नहीं चलता.
उन्होंने कहा:
किसी भी संस्था को लंबे समय तक जिंदा रखते हैं.
उनके मुताबिक Essel Group की सबसे बड़ी ताकत यही रही कि Group ने हर दौर में लोगों के साथ जुड़ाव बनाए रखा.
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टाउनहॉल में डॉ. सुभाष चंद्रा ने Artificial Intelligence यानी AI पर भी बात की. उन्होंने कहा कि AI एक powerful tool है, लेकिन इंसानी सोच हमेशा सबसे ऊपर रहेगी.
उनके मुताबिक:
लेकिन vision और creativity इंसान ही देगा.
डॉ. सुभाष चंद्रा के पूरे संबोधन में एक बात बार-बार सामने आई: बदलाव से डरना नहीं चाहिए.
अनाज मंडी से शुरू हुआ कारोबार:
यही शायद Essel Group की सबसे बड़ी ताकत रही.
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Essel Group के 100 साल सिर्फ किसी कंपनी की anniversary नहीं हैं. यह उस भारतीय कारोबारी सोच की कहानी है:
और शायद यही वजह है कि 1926 में शुरू हुई यह कहानी आज भी जारी है.