'आदमपुर' के A से 'ZEE' के Z तक... Essel Group ने 100 साल में 190 से ज्यादा देशों तक फहराया कामयाबी का परचम

Essel Group के चेयरपर्सन डॉक्टर सुभाष चंद्रा कहते हैं कि आदमपुर की एक छोटी सी मंडी से शुरू होकर पांच बड़े उतार-चढ़ाव झेलने के बाद इस ग्रुप को अरबों डॉलर का कारोबार करते हुए आगे बढ़ते देखना हमारे लिए गर्व का पल है. आने वाले वर्षों में भी हम देश की सेवा करते रहने और भारत को दुनिया के मंच तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
'आदमपुर' के A से 'ZEE' के Z तक... Essel Group ने 100 साल में 190 से ज्यादा देशों तक फहराया कामयाबी का परचम

Essel Group ने अब तक के अपने सफर में एक-दो नहीं, बल्कि पांच बड़े आर्थिक संकटों का सामना किया. (प्रतीकात्मक फोटो/AI)

Essel group 100 years anniversary: हरियाणा के हिसार में एक ऐतिहासिक जगह है अग्रोहा. इसी जगह से रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में एक परिवार फतेहपुर चला गया. समय चक्र चलता रहा और इस परिवार में पीढ़ियां बदलती गईं. फिर आया साल 1926. परिवार में जगन्नाथ गोयनका (एस्सेल ग्रुप के चेयरपर्सन डॉक्टर सुभाष चंद्रा के दादा) की अगुआई में तीन भाइयों ने व्यापार में कुछ बड़ा करने का सपना देखा. उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह सपना अगले 100 वर्षों में भारतीय उद्योग जगत की एक प्रेरणादायक गाथा की नींव बनेगा.

फतेहपुर में भाइयों ने अपना व्यापार बढ़ाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की, क्योंकि लक्ष्य सिर्फ जीविका नहीं थी. सपना बड़ा था, तो काम भी बड़ा ही करना था. व्यापार में नई संभावनाओं की तलाश में परिवार गंगानगर जिले के छोटे से कस्बे भादरा पहुंचा. वहां से वे ओकारा दुकान गए, जिसे आज मिंट गुमरी के नाम से जाना जाता है.

आदमपुर की अनाज मंडी से शुरू हुआ सफर

लेकिन बेचैन सपनों को ठहरना कहां मंजूर था! अपने व्यापार को और बड़ा करने के लिए तीनों भाई 1926 में हिसार के पास स्थित सादलपुर गांव पहुंचे और आदमपुर की अनाज मंडी में अपना कारोबार शुरू किया. इसी जगह से Essel Group की ऐतिहासिक यात्रा का बीजारोपण हुआ. यह एक ऐसी अभूतपूर्व यात्रा है जो 'आदमपुर' के A से शुरू होकर 'ZEE' के Z तक आ पहुंची है.

पांच बड़े आर्थिक संकट- अवसर में बदला

यह यात्रा आसान नहीं थी. यह संघर्षों, जोखिमों और अनगिनत चुनौतियों से भरा हुआ सफर था. Essel Group ने अब तक के अपने सफर में एक-दो नहीं, बल्कि पांच बड़े आर्थिक संकटों का सामना किया. हर बार हालात ने रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन परिवार ने हार मानने से इनकार कर दिया. अटूट साहस, दृढ़ निश्चय और कभी हार न मानने की सोच ने हर संकट को अवसर में बदल दिया. हर कठिन दौर के बाद समूह पहले से अधिक मजबूत बनकर उभरा.

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छह पीढ़ियों की सफलता की कहानी

जगन्नाथ गोयनका के नेतृत्व में शुरू हुई इस यात्रा को नवोन्मेषी और दूरदर्शी डॉ. सुभाष चंद्रा ने समूह के चेयरपर्सन के रूप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनके साथ उनके भाइयों जवाहर गोयल, लक्ष्मी नारायण गोयल और अशोक गोयल ने भी इस विरासत को मजबूत आधार दिया. Essel Group उन चुनिंदा भारतीय कारोबारी समूहों में शामिल है, जिन्होंने अपनी समृद्ध विरासत को सफलतापूर्वक छह पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया है.

अरबों डॉलर का एक बड़ा ग्रुप

आज Essel Group अरबों डॉलर का एक बड़ा ग्रुप बन चुका है, जिसने मीडिया, एंटरटेनमेंट, पैकेजिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, तकनीक समेत कई सेक्टर्स में अपना लोहा मनवाया है. आज यह ग्रुप दुनिया के 190 से भी ज्यादा देशों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा चुका है.

'Impression of a Century'

Essel Group ने केवल भारत के प्री-लिबरलाइजेशन दौर में कारोबारी लक्ष्यों को आकार देने में सिर्फ योगदान नहीं दिया, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति को भी नई मजबूती प्रदान की. समूह ने भारत की हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर, दोनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अपनी दूरदर्शी सोच और बिजनेस में हमेशा नए स्टैंडर्ड सेट करते हुए Essel Group ने केवल कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में एक बेहतरीन इंडस्ट्री को डेवलप किया. 'Impression of a Century' की सोच के साथ Essel ग्रुप ने देशभर में एक करोड़ से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए.

'भारत को दुनिया के मंच तक पहुंचाएंगे'

Essel Group के चेयरपर्सन डॉक्टर सुभाष चंद्रा कहते हैं कि आदमपुर की एक छोटी सी मंडी से शुरू होकर पांच बड़े उतार-चढ़ाव झेलने के बाद इस ग्रुप को अरबों डॉलर का कारोबार करते हुए आगे बढ़ते देखना हमारे लिए गर्व का पल है. आने वाले वर्षों में भी हम देश की सेवा करते रहने और भारत को दुनिया के मंच तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Essel Group की असली ताकत

आज देश में विरासत में मिले कारोबार को दो से तीन पीढ़ियों के बाद कमजोर हो जाते हैं, लेकिन Essel Group की ताकत ही यही है कि इसमें हर अगली पीढ़ी कारोबार को और आगे लेकर जाती है. इस ग्रुप की सबसे बड़ी ताकत यही है कि इसने समय के साथ खुद को अपग्रेड किया, चुनौतियों का डटकर सामना किया और आने वाली पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपी.

अगली पीढ़ी की बारी

आज इस ग्रुप की बागडोर पांचवीं पीढ़ी के हाथों में है. यह केवल कारोबार का विस्तार नहीं, बल्कि मूल्यों, अनुभव और विश्वास की निरंतरता का एक नायाब उदाहरण है. अब छठी पीढ़ी भी इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार खड़ी है. एक ओर जहां इस समूह की समृद्ध विरासत हमें अनुभव, ज्ञान और विशेषज्ञता से और बेहतर बनाती है, वहीं दूसरी ओर 'Youngat90' का जज्बा Essel परिवार के प्रत्येक सदस्य में नई ऊर्जा और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती है.

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