अदालत के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, पार्ले एग्रो पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना, जानिए मामला

दिल्ली हाईकोर्ट ने पार्ले एग्रो पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. यह साल 2021 का मामला है. कोर्ट के मुताबिक पार्ले एग्रो ने कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया है.
अदालत के आदेश की अनदेखी पड़ी भारी, पार्ले एग्रो पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना, जानिए मामला

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने पार्ले एग्रो पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है. कंपनी ने अदालत में बिक्री का ब्योरा न देने पर जुर्माना लगाया है. यह मामला सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी PepsiCo के साथ के बीच चल रहे “Fizz” ट्रेडमार्क विवाद से जुड़ा है. कोर्ट ने पहले Parle Agro को रेवेन्यू आंकड़े देने का निर्देश दिया था, जिसका पालन नहीं हुआ. जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने इसे न्यायिक निर्देशों का उल्लंघन बताया है. गौरतलब है कि साल 2021 में पेप्सिको ने पारले एग्रो के खिलाफ कोर्ट का रुख किया है.

कोर्ट से पेप्सिको ने की थी ये मांग

पारले एग्रो और पेप्सिको के बीच चल रहे Fizz ट्रेडमार्क और B Fizz बेवरेज से जुड़े हैं. पेप्सिको ने कोर्ट से मांग की थी कि पारले एग्रो को अपने B Fizz बेवरेज लेबल पर 'For The Bold' टैगलाइन का इस्तेमाल करने से रोका जाए.

कोर्ट ने लागू की थी कुछ शर्तें

  • मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पारले एग्रो को टैगलाइन के इस्तेमाल से पूरी तरह से नहीं रोका गया, लेकिन 18 सितंबर 2023 को इसके इस्तेमाल पर कुछ सख्त शर्ते लागू की थीं.
  • शर्तों में एडवर्टाइजमेंट में टैगलाइन का प्रमुखता से इस्तेमाल न करना, कुछ खास फेसबुक विज्ञापनों को हटाना और सबसे अहम हर दो महीने में B Fizz के प्रमाणित आंकड़े अदालत में पेश करना शामिल था.
  • पेप्सिको ने हाईकोर्ट को बतया है कि आवेदन दाखिल कर कहा है कि पारले एग्रो सोशल मीडिया पर टैगलाइन का इस्तेमाल जारी रखे है और आदेशों का उल्लंघन कर रहा है.
  • मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस तुषार राव गेडेला ने पारले एग्रो के रवैये पर भी कड़ा रुख अपनाया है.

कंपनी ने दी थी ये दलीलें

दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि पारले एग्रो ने ढाई साल से ज्यादा के वक्त तक हर दो महीने में सेल्स के रिटर्न दाखिल करने के निर्देशों का पालन नहीं किया है. कंपनी ने अपने बचाव में दलील दी कि इन आंकड़ों की जरूरत केवल ट्रायल के दौरान ही होगी.

भारत के वीर फंड में जमा करेंगे 10 लाख रुपए

  • अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज किया है. बेंच ने साफ किया है कि न्यायिक निर्देशों को मानना किसी पक्ष के अपने आकलन पर निर्भर नहीं हो सकता है.
  • जस्टिस गेडेला ने कहा है कि भले ही अदालत की राय में सेल्स रेवेन्यू का सर्टिफिकेट जानबूझकर जमा नहीं किया गया, लेकिन, यह अदालत के आदेश का एक साफ, बिना किसी शक के गंभीर उल्लंघन है.
  • अदालत ने इस बात पर भी नराजगी जताई थी कि कंपनी द्वारा दाखिल किए गए दोनों एफिडेविट में न तो कोई सफाई दिया है और न ही माफी मांगी गई है. कोर्ट ने कहा है कि अदालत के आदेशों की पवित्रता और शुद्धता हर वक्त बनाई रखी जानी चाहिए.
  • कोर्ट ने पारले एग्रो को यह निर्देश दिया है कि वह तीन हफ्ते के अंदर 10 लाख रुपए की जुर्माना राशि भारत के वीर फंड में जमा करनी होगी.

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सोशल मीडिया पर मौजूद है पेप्सिको

पेप्सिको द्वारा कोर्ट में शिकायत दर्ज की गई थी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर टैगलाइन मौजूद है. कोर्ट ने पारले एग्रो की सफाई को स्वीकार कर लिया है. कोर्ट के मुताबिक साल 2022 के वे दो पुराने पोस्ट कंपनी द्वारा संभाले जाने वाले कंटेंट की भारी मात्रा के कारण भूलवश ऑनलाइन रह गए थे. इस जानबूझकर कोर्ट के आदेश को नहीं माना गया है. इसके लिए कोई पीनल एक्शन नहीं लिया गया है.

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