Defence Stocks: ₹6,000 करोड़ के डिफेंस डील की तैयारी? BDL, BEL के लिए रक्षामंत्री ला सकते हैं अच्छी खबर

Defence Stocks: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं. माना जा रहा है कि इस दौरे का बड़ा फोकस डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ब्रह्मोस मिसाइल डील को आगे बढ़ाने पर है. इस संभावित डील में सिर्फ मिसाइल सप्लाई ही नहीं, बल्कि सैन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul सपोर्ट की पेशकश भी शामिल है.
Defence Stocks: ₹6,000 करोड़ के डिफेंस डील की तैयारी? BDL, BEL के लिए रक्षामंत्री ला सकते हैं अच्छी खबर

वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल के लिए डील की संभावनाओं पर चर्चा. (प्रतीकात्मक तस्वीर:AI/ChatGPT)

Defence Stocks: भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए एक और बड़ी एक्सपोर्ट डील की चर्चा तेज हो गई है. फिलीपींस के बाद अब वियतनाम के साथ करीब ₹6000 करोड़ की ब्रह्मोस मिसाइल डील फाइनल होने की खबरों ने डिफेंस शेयरों में नया उत्साह भर दिया है. सूत्रों के हवाले से आई इस खबर के बाद बाजार में BDL, BEL और HAL जैसे डिफेंस PSU शेयर फिर से फोकस में आ गए हैं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं. माना जा रहा है कि इस दौरे का बड़ा फोकस डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ब्रह्मोस मिसाइल डील को आगे बढ़ाने पर है.

फिलीपींस के बाद अब वियतनाम?

भारत पहले ही फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल एक्सपोर्ट डील कर चुका है. जनवरी 2022 में ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय के साथ Shore Based Anti-Ship Missile System सप्लाई का बड़ा समझौता किया था. यह भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट मिशन के लिए बड़ा माइलस्टोन माना गया था.

अब अगर वियतनाम के साथ भी डील फाइनल होती है, तो यह भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट सेक्टर को और मजबूत कर सकती है. खास बात यह है कि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वियतनाम अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है. ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.

सिर्फ मिसाइल नहीं, MRO सपोर्ट पर भी फोकस

हमारे संवाददाता अनुवेश रथ ने एक्सक्लूसिव सूत्रों के हवाले से बताया कि इस संभावित डील में सिर्फ मिसाइल सप्लाई ही नहीं, बल्कि सैन्य प्लेटफॉर्म्स के लिए MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul सपोर्ट की पेशकश भी शामिल है.

जानकारी है कि भारत ने वियतनाम को Sukhoi-30 फाइटर जेट्स के लिए MRO सपोर्ट और Kilo-class पनडुब्बियों के लिए MRO सपोर्ट देने की पेशकश की है.

यही वजह है कि सिर्फ मिसाइल कंपनियां ही नहीं, बल्कि एविएशन और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों पर भी बाजार की नजर है.

Brahmos Deal

किन कंपनियों को होगा सबसे बड़ा फायदा?

BDL को मिल सकता है सबसे बड़ा बूस्ट

Bharat Dynamics Limited यानी BDL ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम के निर्माण और असेंबली में अहम भूमिका निभाती है. अगर ₹6000 करोड़ की यह डील आगे बढ़ती है, तो कंपनी की ऑर्डर बुक में बड़ा इजाफा हो सकता है.

डिफेंस सेक्टर में पहले से मजबूत ऑर्डर बुक रखने वाली BDL के लिए यह डील लॉन्ग टर्म ग्रोथ ट्रिगर बन सकती है.

BEL को इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार ऑर्डर का फायदा

Bharat Electronics Limited यानी BEL ब्रह्मोस और सुखोई जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, रडार, वेपन कंट्रोल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सॉल्यूशंस सप्लाई करती है.

ऐसे में मिसाइल डील और MRO सपोर्ट दोनों से BEL को सब-कॉन्ट्रैक्ट्स और नए ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है.

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HAL भी रह सकता है बड़ा खिलाड़ी

Hindustan Aeronautics Limited को भी इस पूरे घटनाक्रम से फायदा मिल सकता है. भारत में Sukhoi-30 विमानों की ओवरहॉलिंग और मेंटेनेंस का बड़ा सेटअप HAL के पास है.

अगर वियतनाम के लिए MRO सपोर्ट डील आगे बढ़ती है, तो HAL को टेक्निकल सपोर्ट और सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकते हैं.

डिफेंस शेयरों में क्यों बढ़ रहा उत्साह?

भारत सरकार लगातार ‘Make in India’ और डिफेंस एक्सपोर्ट पर जोर दे रही है. पिछले कुछ सालों में भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. अब भारतीय कंपनियां सिर्फ घरेलू ऑर्डर पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी जगह बना रही हैं.

बाजार को लगता है कि:

  • डिफेंस एक्सपोर्ट अगले कुछ सालों में तेज़ी से बढ़ सकते हैं
  • PSU डिफेंस कंपनियों की ऑर्डर विजिबिलिटी मजबूत रहेगी
  • एशियाई देशों से नए ऑर्डर आने की संभावना बढ़ रही है

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

डिफेंस सेक्टर फिलहाल बाजार का स्ट्रॉन्ग थीम बना हुआ है. BDL, BEL और HAL जैसे शेयर पहले ही लंबी रैली दिखा चुके हैं, लेकिन नई एक्सपोर्ट डील्स इनके लिए अगला ग्रोथ ट्रिगर बन सकती हैं.

हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि फिलहाल यह खबर सूत्रों के हवाले से है और आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा. डील फाइनल होने के बाद ही कंपनियों की ऑर्डर बुक और रेवेन्यू पर असली असर साफ दिखाई देगा.

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