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Defence PSU Stock: भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी डिफेंस कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) के साथ अपने तेजस हल्के लड़ाकू विमान (LCA Tejas) कार्यक्रम के लिए 113 जेट इंजनों की खरीद का करार किया है. इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,870 करोड़) बताई जा रही है. डिफेंस पीएसयू स्टॉक (Defence PSU Stock) शुक्रवार को 0.76 फीसदी बढ़कर 4626.95 रुपए पर बंद हुआ.
यह बड़ा करार ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय उत्पादों के आयात पर अमेरिका में 50% सीमा टैरिफ लगाए जाने जैसे मुद्दों से दोनों देशों के व्यापार संबंधों में तनाव बना हुआ है. इसके बावजूद दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के क्षेत्र में मजबूत रिश्ते बनाए रखे हैं. इस सौदे को भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
अधिकारियों के मुताबिक, F-404 GE-IN20 इंजन की सप्लाई 2027 से शुरू होकर 2032 तक पूरी की जाएगी. इन इंजनों का इस्तेमाल तेजस एमके-1ए (Tejas Mk1A) के नए बेड़े में किया जाएगा. HAL ने बताया कि यह इंजन और इससे संबंधित सहयोगी पैकेज एलसीए तेजस एमके-1ए के 97 विमानों के निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है.
एचएएल ने कहा कि उसने एलसीए तेजस एमके-1ए (LCA Tejas Mk1A) के 97 विमानों के निर्माण कार्यक्रम के लिए इंजन और सहयोगी पैकेज की आपूर्ति के लिए जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी (GE) के साथ यह करार किया है.

बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने सितंबर महीने में HAL के साथ 62,370 करोड़ रुपये का सौदा किया था. इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 97 तेजस एमके-1ए (Tejas Mk1A) विमानों की खरीद की जाएगी. HAL GE F-404 इंजन का उपयोग एलसीए एमके-1ए विमानों के पहले बैच में भी कर रही है.
‘तेजस’ (Tejas) सिंगल इंजन वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे ज्यादा खतरे वाले हवाई अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. यह वायु रक्षा, समुद्री टोही अभियान और हमला करने जैसे अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है.
वायुसेना वर्तमान में अपने लड़ाकू विमानों के बेड़े की घटती संख्या की भरपाई के लिए तेजस विमानों की समय पर आपूर्ति चाहती है. फिलहाल वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसकी अधिकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है.
रक्षा मंत्रालय ने फरवरी, 2021 में HAL के साथ 48,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया था, जिसके तहत 83 तेजस एमके-1ए विमान खरीदे जाने थे. हालांकि, GE एयरोस्पेस द्वारा इंजन आपूर्ति में देरी के कारण इन विमानों की आपूर्ति में रुकावट आई. यह नया समझौता पिछली देरी को दूर करने और सप्लाई चेन को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
Q1. HAL और GE एयरोस्पेस के बीच यह समझौता किस बारे में है?
यह समझौता HAL द्वारा GE Aerospace से तेजस हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए 113 जेट इंजनों की खरीद के संबंध में है.
Q2. इस सौदे की अनुमानित कीमत क्या है?
इस सौदे की अनुमानित कीमत लगभग 1 अरब डॉलर (करीब ₹8,870 करोड़) है.
Q3. ये इंजन किस विमान के लिए उपयोग किए जाएंगे?
इन इंजनों का उपयोग मुख्य रूप से Tejas Mk1A लड़ाकू विमानों के निर्माण कार्यक्रम के लिए किया जाएगा.
Q4. इंजनों की आपूर्ति कब शुरू होगी और कब तक पूरी होगी?
इंजनों की आपूर्ति 2027 से शुरू होगी और 2032 तक पूरी होने का लक्ष्य है.
Q5. तेजस विमान की मुख्य क्षमताएं क्या हैं?
'तेजस' सिंगल इंजन वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे अधिक खतरे वाले हवाई अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है.
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