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यह फैसला कंपनी के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
डालमिया सीमेंट के लिए एक बड़ी कानूनी राहत सामने आई है. PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत अपीलेट ट्रिब्यूनल ने कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाए गए ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (POC) के आंकड़े में भारी कटौती कर दी है.
ट्रिब्यूनल ने इस राशि को ₹793.34 करोड़ से घटाकर ₹92.52 करोड़ कर दिया है. यह फैसला कंपनी के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले ED ने कहीं ज्यादा बड़ी रकम को कथित अवैध लाभ बताया था.
यह मामला उस आदेश से जुड़ा है जिसमें ED ने डालमिया सीमेंट की ₹377 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था. कंपनी ने इस कार्रवाई को चुनौती दी थी, जिस पर अब ट्रिब्यूनल ने आंशिक रूप से कंपनी के पक्ष में फैसला दिया है.
इस फैसले से ED की उस दलील को झटका लगा है जिसमें बड़े पैमाने पर कथित ‘अवैध लाभ’ का दावा किया गया था.
इस केस की जड़ें साल 2011 के एक CBI मामले से जुड़ी हैं. यह मामला आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और डालमिया सीमेंट के बीच कथित निवेश को लेकर सामने आया था.
ED का आरोप था कि डालमिया सीमेंट ने ₹95 करोड़ का निवेश भारती सीमेंट्स में किया. यह निवेश कथित तौर पर बढ़ी हुई प्रीमियम वैल्यू पर किया गया. इसके बदले कंपनी को लाइमस्टोन माइनिंग लीज जैसे फायदे मिले.
ED के अनुसार, इस लीज से कंपनी को करीब ₹709.34 करोड़ का आर्थिक लाभ हुआ, जिसे ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ माना गया.
ED ने अपनी जांच में यह भी कहा था कि भारती सीमेंट्स के शेयर बाद में फ्रांस की कंपनी PARFICIM SAS को ₹139 करोड़ में बेचे गए. इसमें से करीब ₹55 करोड़ कथित तौर पर नकद और हवाला के जरिए वापस भेजे गए. जबकि ₹84 करोड़ कंपनी के पास ही रहे. यही पूरा ट्रांजैक्शन इस केस का अहम हिस्सा रहा है.
PMLA ट्रिब्यूनल के सदस्य वी. आनंदराजन ने अपने फैसले में एक अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि शेयर बिक्री से मिले ₹84 करोड़ को ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ नहीं माना जा सकता. इस टिप्पणी के बाद ही कुल कथित रकम में भारी कटौती हुई और इसे घटाकर ₹92.52 करोड़ कर दिया गया.
यह फैसला डालमिया सीमेंट के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ की व्याख्या बेहद अहम होती है और ट्रिब्यूनल का यह फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस पूरे मामले पर कंपनी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ज़ी बिज़नेस ने जब डालमिया सीमेंट के चेयरमैन पुनीत डालमिया से इस मामले पर ई-मेल पर प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन (sub judice) है और कंपनी की नीति के तहत ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं की जाती. यानी फिलहाल कंपनी ने इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है.
ट्रिब्यूनल ने राहत जरूर दी है, लेकिन मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ED इस फैसले को आगे चुनौती दे सकती है या फिर आगे की कानूनी प्रक्रिया में नए पहलू सामने आ सकते हैं.
डालमिया सीमेंट मामले में PMLA ट्रिब्यूनल का यह फैसला एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है. ₹793 करोड़ से घटाकर ₹92 करोड़ करना यह दिखाता है कि जांच एजेंसियों के दावों की न्यायिक जांच कितनी अहम होती है. अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि आगे इस केस में क्या मोड़ आता है और कंपनी तथा एजेंसियां किस दिशा में कदम बढ़ाती हैं.