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फोटो- एआई जनरेटेड
Defence Stocks: भारत की रक्षा क्षेत्र की दिग्गज सार्वजनिक कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने समुद्र की लहरों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. एक बड़े रणनीतिक घटनाक्रम में, MDL ने श्रीलंका के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शिपयार्ड 'कोलंबो डॉकयार्ड PLC' (CDPLC) में 51% की हिस्सेदारी खरीद ली है. यह सौदा 2.68 करोड़ डॉलर (लगभग 225 करोड़ रुपये) में पूरा हुआ है.
यह न केवल MDL का पहला अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण है, बल्कि भारत सरकार के 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम भी है. इस निवेश के साथ ही कोलंबो डॉकयार्ड अब आधिकारिक तौर पर MDL की एक सहायक कंपनी बन गई है.
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अधिग्रहण के साथ ही कोलंबो डॉकयार्ड के बोर्ड का पुनर्गठन किया गया है. अब इसकी बागडोर MDL के नेतृत्व में होगी. 7 अप्रैल 2026 से MDL के सीएमडी, कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) को बोर्ड का नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, MDL के निदेशक बीजू जॉर्ज और रुचिर अग्रवाल को भी बोर्ड में शामिल किया गया है, जबकि थिमिरा एस. गोडाकुंबुरा एमडी और सीईओ के पद पर बने रहेंगे.
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भारत का साथ मिलते ही कोलंबो डॉकयार्ड की किस्मत चमकने लगी है. MDL के रणनीतिक समर्थन की बदौलत, CDPLC ने अपने 52 साल के इतिहास का सबसे बड़ा जहाज निर्माण अनुबंध हासिल किया है. फ्रांस की कंपनी 'ऑरेंज मरीन' के साथ करीब 150 मिलियन डॉलर (लगभग 1250 करोड़ रुपये) का समझौता हुआ है. इसके तहत दो आधुनिक केबल बिछाने और मरम्मत करने वाले जहाजों का निर्माण किया जाएगा. 100 मीटर लंबे इन जहाजों में हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक तकनीक का इस्तेमाल होगा और इनकी डिलीवरी 2028-29 तक की जाएगी.
इस साझेदारी का असर जमीन पर भी दिखने लगा है. 7 अप्रैल 2026 को कोलंबो डॉकयार्ड और 'ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (DCI) के बीच एक समझौता (MoU) हुआ. अब CDPLC, भारतीय कंपनी DCI का पसंदीदा मरम्मत और रखरखाव पार्टनर बन गया है. इतना ही नहीं, 'शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' (SCI) के जहाजों की मरम्मत का काम भी अब कोलंबो भेजने की तैयारी है.
MDL का लक्ष्य है कि चालू वित्त वर्ष में कोलंबो डॉकयार्ड के राजस्व और मुनाफे में कम से कम 20% की बढ़ोतरी की जाए. नए ऑर्डर्स और भारत से मिलने वाले काम के जरिए इस लक्ष्य को हासिल करना काफी आसान लग रहा है.
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मझगांव डॉक द्वारा कोलंबो डॉकयार्ड का अधिग्रहण हिंद महासागर में भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक है. इससे न केवल भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने का मौका मिलेगा, बल्कि श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को भी नए ऑर्डर्स और रोजगार के जरिए बड़ी राहत मिलेगी.
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