कोल शेयरों में आ सकती है नई चमक! सरकार बजट के पहले ही ले सकती है बड़ा फैसला

Coal Stocks: देश में Coal Gasification को बहुत बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी है, जिसके तहत कोल गैसिफिकेशन की क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है.
कोल शेयरों में आ सकती है नई चमक! सरकार बजट के पहले ही ले सकती है बड़ा फैसला

Coal Stocks: कोल कंपनियों के लिए सरकार एक अहम फैसला करने वाली है. देश में Coal Gasification को बहुत बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी है, जिसके तहत कोल गैसिफिकेशन की क्षमता में बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है. अभी भारत में कोल गैसिफिकेशन की क्षमता करीब 12 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) है, लेकिन सरकार इसे बढ़ाकर 100 MTPA करना चाहती है. यानी आने वाले समय में कोयले को सीधे जलाने की बजाय उससे गैस और दूसरे प्रोडक्ट बनाए जाएंगे. सरकार का फोकस है कि यह लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक काफी हद तक पूरा किया जाए. इसके लिए नई परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी दी जाएगी.

सरकार करेगी कंपनियों की मदद

चूंकि इतने बड़े प्रोजेक्ट में कंपनियों को भारी निवेश करना होता है. जानकारी है कि सरकार इसके लिए Viability Gap Funding (VGF) देगी. यानि कि अगर किसी प्रोजेक्ट में लागत ज्यादा जा रही है, लेकिन कमाई कम हो रही है, तो सरकार बीच का अंतर भरने में मदद करेगी. सूत्रों के मुताबिक अतिरिक्त 50–60 MTPA क्षमता के लिए VGF सपोर्ट दिया जाएगा. पहले ही जनवरी 2024 में सरकार ने ₹8,500 करोड़ की VGF स्कीम का ऐलान किया था. अब बजट से पहले कैबिनेट में इसे और मजबूत किया जा सकता है. साथ ही सरकार कंपनियों को यह भरोसा भी देगी कि जो प्रोडक्ट बनेंगे, उनका ऑफटेक यानी खरीद की गारंटी मिलेगी, ताकि प्रोजेक्ट्स फेल न हों.

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किन कंपनियों को फायदा मिल सकता है?

इस प्लान में कई बड़ी सरकारी कंपनियां शामिल हैं जैसे: Coal India, BHEL, GAIL और SAIL, ये कंपनियां कोल गैसिफिकेशन से जुड़े प्लांट, टेक्नोलॉजी और गैस-आधारित प्रोडक्ट्स पर काम कर रही हैं. सरकार गैसिफिकेशन क्षमता बढ़ाती है, तो इससे इनके बिजनेस में नई ग्रोथ आ सकती है.

Coal Gasification क्या होता है?

Coal Gasification एक ऐसी तकनीक है जिसमें कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस में बदला जाता है. इस प्रक्रिया में कोयले को सीमित ऑक्सीजन, भाप या कार्बन डाइऑक्साइड के साथ गर्म किया जाता है. इससे एक गैस बनती है जिसे Syngas (Synthetic Gas) कहते हैं. इस गैस से आगे कई चीजें बनाई जा सकती हैं जैसे- Methanol, Ammonium Nitrate, Synthetic Natural Gas (SNG), Fertilizers और Chemical products. यानि कोयला सिर्फ बिजली के लिए नहीं, बल्कि केमिकल और फ्यूल बनाने में भी इस्तेमाल होता है.

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सरकार क्यों बढ़ाना चाहती है गैसिफिकेशन?

भारत में कोयला बहुत ज्यादा मात्रा में उपलब्ध है. सरकार चाहती है कि कोयले का क्लीन और वैल्यू-एडेड इस्तेमाल हो. तेल और गैस पर निर्भरता कम हो. घरेलू फ्यूल और केमिकल प्रोडक्शन बढ़े और Developed India 2047 का विजन पूरा किया जा सके. सरकार ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोल गैसिफिकेशन करने का लक्ष्य रखा है और इसमें ₹4 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश की उम्मीद है.

सरकार ने पहले क्या फैसले लिए हैं?

सरकार ने इसके पहले कोल ब्लॉक ऑक्शन में 20% रेवेन्यू शेयर की छूट दी थी. गैसिफिकेशन में इस्तेमाल होने वाले कोल पर 50% रिबेट दिया है. Syngas सेक्टर को अलग सब-सेक्टर बनाया गया है. Coal India को BHEL और GAIL के साथ JV बनाने की मंजूरी दी थी. इस स्कीम में निजी कंपनियों को भी शामिल किया गया है.

सरकार के गैसीफिकेशन क्षमता विस्तार से Coal सेक्टर में नई ग्रोथ स्टोरी बन सकती है. इससे Coal India, BHEL, GAIL जैसी कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट मिलेंगे. गैस, केमिकल और फर्टिलाइज़र बिजनेस को सपोर्ट मिल सकता है. साथ ही लॉन्ग टर्म में कोल कंपनियों की वैल्यू बढ़ सकती है. फिलहाल बजट के पहले कैबिनेट की ओर से इस संबंध में कोई फैसला आता है या नहीं, ये देखना होगा.

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