38 रुपए वाली इस सरकारी कंपनी का मुनाफा बढ़ा 33 फीसदी, शेयर में जोश भर सकते हैं जून तिमाही के नतीजे

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने जून तिमाही में 33% की लाभ वृद्धि दर्ज की है. एनपीए और प्रावधान घटे हैं, जबकि आमदनी और ऑपरेशन लाभ में सुधार हुआ है. बैंक की बैलेंसशीट पहले से मजबूत हुई है, जिससे निवेशकों को भरोसा मिल सकता है.
38 रुपए वाली इस सरकारी कंपनी का मुनाफा बढ़ा 33 फीसदी, शेयर में जोश भर सकते हैं जून तिमाही के नतीजे

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के बेहतरीन नतीजे पेश किए हैं. बैंक का नेट प्रॉफिट 33 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,169 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है. यह वृद्धि मुख्य रूप से फंसे कर्ज में गिरावट, आमदनी में इजाफा और प्रावधानों में कमी की वजह से आई है. बैंक ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में उसका नेट प्रॉफिट 1,169 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 880 करोड़ रुपए था. यह प्रदर्शन बैंक की बैलेंसशीट और कार्यप्रणाली में आए स्थायित्व और मजबूती को दिखाता है. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि इस कंपनी का शेयर अभी 38 रुपए के भाव पर है. पिछले ट्रेडिंग सेशन में इसमें 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी.

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आमदनी और ब्याज में वृद्धि

समीक्षाधीन तिमाही के दौरान बैंक की कुल आमदनी बढ़कर 10,374 करोड़ रुपए हो गई, जो एक साल पहले 9,500 करोड़ रुपए थी. बैंक की ब्याज से होने वाली आय भी बढ़कर 8,589 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में 8,335 करोड़ रुपए थी. बैंक का ऑपरेशन लाभ भी एक साल पहले की तुलना में बढ़ा है. अप्रैल-जून 2024 में यह लाभ 1,933 करोड़ रुपए था, जो बढ़कर अब 2,304 करोड़ रुपए हो गया है. इससे बैंक की दक्षता और खर्चों पर नियंत्रण का संकेत मिलता है.

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एनपीए में आई बड़ी गिरावट

बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है. सकल एनपीए जून 2024 में जहां 4.54 प्रतिशत था, वह अब घटकर 3.13 प्रतिशत रह गया है. इसी तरह नेट एनपीए 0.73 प्रतिशत से घटकर 0.49 प्रतिशत रह गया है. यह बैंक की ऋण वसूली क्षमता में सुधार को दिखाता है.

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बैंक के प्रावधान और आकस्मिक खर्च आधे होकर 521 करोड़ रुपए रह गए हैं, जो एक साल पहले इसी अवधि में 1,191 करोड़ रुपए थे. इससे बैंक की बैलेंसशीट पर दबाव कम हुआ है और मुनाफे को बल मिला है. बैंक का प्रावधान कवरेज अनुपात (PCR) 97.02 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो पहले 96.17 प्रतिशत था. साथ ही, पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) भी बढ़कर 17.6 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल 15.6 प्रतिशत था. ये दोनों संकेतक बैंक की मजबूती को दिखाते हैं.